इस गांव में हैं इतनी विधवाएं, जिससे कहलाने लगा 'विधवाओं का गांव'

Published Date 2017/02/03 17:49, Written by- FirstIndia Correspondent

भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में एक ऐसा गांव है, जिसमें शायद ही कोई ऐसा परिवार बचा है, जिसमें कोई विधवा न हो। जी हां, हम बात कर रहे हैं भीलवाड़ा जिले की बनेड़ा तहसील के श्रीजी का खेडा ग्राम की, जिसे लोग अब विधवाओं का गांव के नाम से भी जानने लगे हैं। ये विधवाऐं जिले के बिजौलियां खनन क्षेत्र में अनियमितताओं के कारण हुई है। बिजौलिया में इस गांव के लोग गये तो थे दो जून की रोटी कमाने, लेकिन लौटे सिलकॉसि​स नामक बीमारी से मौत की खबर के साथ। यहां तक कि इस गांव के कई बच्चे तो यह भी नहीं जानते है कि पापा क्या होते हैं।


यह दर्दनाक कहानी है सिलकॉसिस पीड़ित महिला प्रेम खारोल की, जिसने कहा कि गांव में काम नहीं होने के कारण हम दो जून की रोटी के लिए बिजौलिया की खानों पर कार्य करने गये थे, लेकिन 4-5 माह में ही मेरे पति को सिलकॉसिस बीमारी हो गई। उसके कुछ माह बाद ही उनकी मौत हो गई। इस गांव में करीब 60 से 70 महिलाएं इसी कारण से विधवा हुई हैं। प्रेम ने यह भी कहा कि हमें आज तक सरकारी की ओर से काई भी मदद नहीं मिली है, जिसके कारण हमें गुजारा करना भी दूभर हो रहा है।


श्रीजी का खेड़ा ग्राम की यह अकेली प्रेम का दर्द नहीं हैं, बल्कि इस गांव की उन 70 विधवा महिलाओं का दर्द है, जो खनन क्षेत्र में काम करते हुए सिलकॉसिस बीमारी से अपने पति खो चूकी हैं। इस गांव में मौत का सिलसिला अभी तक भी रूका नहीं है। यहां अभी भी 85 व्यक्ति पेट की खातिर बिजौलिया खनन क्षेत्र से सिलकॉसि​स जैसी जानलेवा बीमारी लेकर लौटे हैं। इस गांव का सबसे दर्दनाक पहलू यह भी है कि गांव की प्राथमिक शाला में पढ़ने वाले 45 बच्चों में से 10 के पापा है ही नहीं। ये बच्‍चे यह भी नहीं जानते है कि पापा क्या होते हैं। इन्हें मलाल है कि इनके भी पापा होते तो इनकी इच्छांएं पूरी करते।


बनेड़ा के उपखण्ड अधिकारी रामचन्द्र मीणा स्वीकारते हैं कि इस क्षेत्र के 85 लोगों के सिलकॉसि​स पीड़ित होने पर मुआवजा राशि की कार्यवाही जारी है। जिला कलेक्टर के निर्देश के बाद ये इस महीने भुगतान होने की बात कहते हैं। जबकि ग्रामीणों का दर्द है कि महिनों नहीं सालों गुजर गये, मगर अब तक उनके घावों पर कोई मलहम लगाने नहीं आया। वहीं महात्‍मा गांधी चिकित्‍सालय के टीवी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश शर्मा ने कहा कि हर शुक्रवार को हम कैम्‍प लगाकर ऐसे लोगों का चयन करते हैं और उन्‍हें दवा देते हैं।


क्या‍ आजादी के यही मायने है कि खनीज उत्पादन के नाम पर जिले की बिजौलिया क्षेत्र की करीब 1 हजार 5 सौ खानों में कार्य कर रहे मजदूर खनन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण दम तोडते रहेंगे। यदि अधिकारी अपनी थोडी सी भी जिम्‍मेदारी समझें तो असमय काल का ग्रास बन रहे इन मजदूरों को बचाया जा सकता है।

 

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