Womens Day की शुरुआत के पीछे छिपा है ये राज़

Womens Day की शुरुआत के पीछे छिपा है ये राज़

07-Mar-2017 01:59:42;PM

महिलाएं जहां अपने आप में एक शक्ति है और किसी भी राष्ट्र की शक्ति का केंद्र मानी जाती है| महिला दिवस इस शक्ति के सम्मान को जहां प्रदर्शित करता है, वहीं यह महिलाओं के त्याग, बलिदान और राष्ट्र के लिए उसके योगदान को भी सलाम करता है| महिला दिवस की शुरुआत के पीछे भी एक कारण छुपा हुआ है।


महिलाएं जहां अपने आप में एक शक्ति है और किसी भी राष्ट्र की शक्ति का केंद्र मानी जाती है| महिला दिवस इस शक्ति के सम्मान को जहां प्रदर्शित करता है, वहीं यह महिलाओं के त्याग, बलिदान और राष्ट्र के लिए उसके योगदान को भी सलाम करता है| महिला दिवस की शुरुआत के पीछे भी एक कारण छुपा हुआ है।

 

दरअसल महिला दिवस की शुरुआत महिलाओं को वोट देने के अधिकार के लिए हुई थी क्योंकि बहुत सारे देश ऐसे थे जहां महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं है। 28 फरवरी 1909 में यह दिवस सबसे पहले अमेरिका में 28 फरवरी 1909 में मनाया गया। फिर इस दिवस को फरवरी के अंतिम रविवार को मंजूरी दी गई लेकिन 1990 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन के सम्मेलन में महिला दिवस को इंटरनेशनल मानक दिया गया।

 

8 मार्च का महिला दिवस 1917 में रूस की महिलाओं ने विरोध किया क्योंकि उनके यहां तब जुलियन कैलेंडर मान्य था और पूरे विश्व में ग्रेगेरियन कैलेंडर। जिसके हिसाब से अंतिम रविवार 8 मार्च को पड़ा क्योंकि फरवरी तो 28 दिन की होती थी इसलिए चौथा रविवार मार्च में गिना गया जो कि पूरे विश्व में मान्य हो गया और तभी से 8 मार्च को महिला दिवस घोषित हुआ जिसे रूस को भी मानना पड़ा।

 

महिलाओं को हर मौलिक अधिकार प्राप्त भारत में एक महिला को शिक्षा का, वोट देने का अधिकार और मौलिक अधिकार प्राप्त है यहां तक कि एक महिला अपने पति की संपत्ति में भी बराबरी का दर्जा रखती है। श्रद्दा और सम्मान महिलाओं के सम्मान के लिए घोषित इस दिन का उद्देश्य सिर्फ महिलाओं के प्रति श्रद्दा और सम्मान बताना है| महिला दिवस जहां महिलाओं के त्याग और बलिदान को प्रदर्शित करता है, वहीं समाज में महिलाओं के महत्व को भी दर्शाता है |  

 


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