Women's Day Special : महिला सशक्तिकरण — दिखावा या वास्तविकता

Women's Day Special : महिला सशक्तिकरण — दिखावा या वास्तविकता

07-Mar-2017 07:56:35;PM

हम सभी हर साल 8 मार्च को women's day के रुप मनाते हैं, पर क्या सच में महिलाओं का सशक्तिकरण हुआ है? क्या कोई पिता आज भी अपनी बेटी को देर रात अकेले जाने की अनुमति दे सकता है? इस बात का जवाब हम सभी जानते हैं, जवाब नहीं ही होगा।


जब-जब महिला सशक्तिकरण की बात की जाती है, दिमाग में स्वामी विवेकानन्द द्वारा कहा गया एक कथन हमेशा आता है, जिसमें विवेकानन्द कहते हैं कि जिस देश मे महिलाओं का सम्मान किया जाता है, वह राष्ट्र सदैव प्रगति की ओर अग्रसर होता रहता है और तरक्की करता है। हमारे भारत में भी यह कहा जाता है कि जिस घर में महिलाओ का सम्मान होता है, वहां स्वयं मां लक्ष्मी का वास होता है। वह घर सदैव धन-धान्य से परिपूर्ण रहता है, लेकिन जब हम कथनात्मकता को छोड़कर वास्तविकता की ओर देखते हैं तो समाज का एक ऐसा रूप दिखाई देता है, जो मात्र खोखले आदर्शों पर टिका हुआ है। वर्तमान समय की बात की जाए तो आज भी चोरी छिपे बाल-विवाह और दहेज जैसी कई कुरीतियां हमारे आसपास दिखाई देती है। एक तरफ बेटियां राष्ट्र का नाम पूरे विश्व में ऊंचा कर रही हैं, वहीं कुछ हैवान कन्या भ्रूण हत्या को अन्जाम देते हैं तो कहीं पढे—लिखे युवा भी लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की हरकतें करने से बाज नहीं आते हैं।


हम सभी हर साल 8 मार्च को women's day के रुप मनाते हैं, पर क्या सच में महिलाओं का सशक्तिकरण हुआ है? क्या कोई पिता आज भी अपनी बेटी को देर रात अकेले जाने की अनुमति दे सकता है? इस बात का जवाब हम सभी जानते हैं, जवाब नहीं ही होगा। क्योंकि आज कहने के लिए महिलाओ के पास सभी अधिकार हैं, लेकिन आज भी भारत में रेप, छेड़छाड़, एसिड अटैक जैसी हैवानियत होती है। फर्क बस यह है कि कुछ मामले हमारे सामने आ जाते हैं और कईं को दबा दिया जाता है।


women's day का मतलब सिर्फ लफ्जों में महिला सशक्तिकरण कहना भर नहीं है, बल्कि इसका अर्थ है सही मायने में महिलाओं को सशक्त करना। एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना, जहां सच में महिला सशक्त हो, उसे सारे अधिकार प्राप्त हो और पुरुषों की दृष्टि में उनके लिए सम्मान हो। महिला सशक्तिकरण सच्चे मायने में तभी होगा, जब लड़कियां घर से बाहर होते हुए भी खुद को सुरक्षित व महफूज समझें। वे अपनी मर्जी से जो पढ़ाई करना चाहे कर सके। महिलाएं शिक्षित हो, राष्ट्र विकास में वे भी बराबरी की हकदार बनें और पुरुषों के अधीन न रहते हुए उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ें। और जब ऐसा होगा, तभी हमारा महिला दिवस यानि women's day मनाया जाना सार्थक हो सकेगा।

 

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