Patients suffering from summer in jaisalmer

गांवों में अस्पताल में नहीं मिल रहा है सुकून, मरीजों के लिए गर्मी में बढ़ी परेशानी

Published Date-21-Apr-2017 01:07:38 PM,Updated Date-21-Apr-2017, Written by- FirstIndia Correspondent

जैसलमेर| जैसलमेर जिले भर में पड़ रही गर्मी ने आमजन के हाल बेहाल कर दिए है। जिससे लोगाें को लू व तापघात की बिमारियों ने घेर लिया है। लेकिन जैसलमेर के गांवों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम नहीं मिलने से मरीजों काे सर्वाधिक परेशानी के साथ ईलाज नहीं मिल पा रहा है। जिससे मरीजों के लिए परेशानी खड़ी हाे गई है।

 

इसके साथ ही ग्राम पंचायत में स्थित एएनएम सब सेंटर में भी एएनएम के नहीं मिलने से मरीजों को लू व तापघात का ईलाज नहीं मिल पा रहे है। वहीं शिकायत नहीं मिलने से चिकित्सा विभाग के अधिकारी भी इस ओर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे है। चिकित्सा विभाग के अनुसार जिले के पीएचसी व सीएचसी तथा एएनएम सब सेंटर में गर्मी से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाईयों का स्टॉक है। लेकिन इनमें एएनएम व जीएनएम नहीं मिलने की स्थिति दवाईयों का उपयोग नहीं हो पा रहा है। जैसलमेर में एएनएम के 80, अतिरिक्त एएनएम के 74 व एएनएम आरसीएच के 13 पद रिक्त है। 

 

गौरतलब है कि जैसलमेर में एएनएम के 365 पद स्वीकृत है। जिसमें से 198 पदों पर ही एएनएम कार्यरत है। इस हिसाब से पूरे जिले में 43 प्रतिशत पदों पर एएनएम कार्यरत है ही नहीं। रुपसी गांव में स्थित एएनएम सब सेंटर में मांगीलाल भाटिया अपनी पत्नी का ईलाज करने के लिए सब सेंटर पहुंचे। उनकी पत्नी को भीषण गर्मी के चलते डीहाइड्रेशन हो गया था। लेकिन वहां एएनएम कार्यरत होने के बावजूद उपस्थित नहीं मिली। जिससे उनकी पत्नी को रुपसी में ईलाज नहीं मिला। उसके बाद उन्हें 108 बुलाकर जैसलमेर जवाहर अस्पताल लाया गया। जहां उन्हें लू व तापघात का ईलाज देकर राहत प्रदान की गई। ऐसे कई मामले सामने आये है। 

 

रामगढ़ रामगढ़ में स्थित सीएचसी से आस पास के करीब 12 से 15 गांवों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। इन गांवों की दूरी में शाहगढ़ 80 किलोमीटर से लेकर तनोट व आस पास के 55 से 60 किलोमीटर की दूरी तक मरीजों को सफर करना पड़ता है। मोहनगढ़ कस्बे के नहरी क्षेत्र में आस पास के गांवा के मरीजों को मोहनगढ़ या जैसलमेर अस्पताल में ईलाज के लिए पहुंचना पड़ता है। मोहनगढ़ तक गांवों की दूरी 50 से 60 किलाेमीटर दूर आना पड़ता है। जिससे यह दूरी मरीजों के लिए कभी भी नुकसानदेह साबित हो सकती है।

 

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