अहोई अष्टमी के व्रत और पूजन से अहोई माता देंगी संतान का सुख और लंबी आयु का वरदान

FirstIndia Correspondent Published Date 2017/10/12 10:36

गुरुवार को देश की सभी विवाहित स्त्रियां अहोई अष्टमी मना रही है| यह त्योहार संतान की प्राप्ति और उसकी लंबी आयु के लिए मनाया जाता है| अहोई अष्टमी के दिन सभी विवाहित स्त्रियां सिर पर लाल ओढ़नी, मांग में सिंदूर, बिंदिया व हाथों में मेहंदी लगाकर निर्जला व्रत रखती हैं। माताएं अहोई से अपने पुत्र की लंबी आयु के लिए मंगल कामना करेंगी। दिन भर निर्जल व्रत रहने के बाद रात में तारों को देखने के उपरांत व्रत खोला जाता है। अहोई अष्टमी पूजा मूहूर्त सुबह 6 बजे से 7:14 मिनट तक है।

रात में तारों को देखने के लिए शाम 6:10 से 6:40 बजे तक शुभ समय माना जा रहा है। आपको बता दे जिस प्रकार करवा चौथ में चांद को देखकर व्रत खोला जाता है उसी प्रकार तारों को देखने के बाद विधि-विधान से पूजा करके अहोई व्रत खोला जाता है। अष्टमी को माताएं अपनी संतान और परिवार को किसी भी अनहोनी से बचाने के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को दीवार पर 8 कोनों वाली एक पुतली अंकित करती हैं। जिसे अहोई अष्टमी भी कहा जाता है।

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