जातिवाद के रंग में रंगा नजर आ रहा अजमेर उपचुनाव, ये रहेंगे जीत के समीकरण

Published Date 2018/01/12 06:55, Written by- Dinesh Kumar Dangi

जयपुर। राजस्थान में अजमेर, अलवर और मांडलगढ़ में होने वाले उपचुनावों के बीच सबकी नजरें अजमेर लोकसभा उपचुनाव पर टिकी हैं। चूंकि अजमेर पीसीसी चीफ सचिन पायलट का संसदीय क्षेत्र रहा है। लिहाजा, विधानसभा चुनाव में उतरने से पहले हर हाल में कांग्रेस यहां से जीत दर्ज करना चाहती है।

मौजूदा समीकरणों पर नजर डाली जाए तो अजमेर के रण का मुकाबला अब पूरी तरह से जातिवाद में तब्दील होता जा रहा है। ऐसे में ये कहा जा सकता है कि अजमेर का मुकाबला जाट वर्सेज अन्य जातियों के बीच हो गया है।

अजमेर लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी रामस्वरुप लांबा के पक्ष में जाट वोट एकतरफा यानि 90 फीसदी जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है। वहीं परम्परागत रावत, सिंधी और वैश्य वोटर्स भी भाजपा के साथ जाते दिख रहे हैं। उधर, कांग्रेस प्रत्याशी रघु शर्मा के साथ ब्राह्म्ण, मुस्लिम और गुर्जर लामबंद होकर एकतरफा जाते दिख रहे हैं। इनके बीच आनंदपाल एनकाउंटर प्रकरण और पद्मावत मूवी के मामले के चलते राजपूत का झुकाव इस बार कांग्रेस की तरफ दिख रहा है।

ऐसे में एससी और एसटी वोट काफी अहम हो गए हैं। यानि जो पार्टी एससी-एसटी वोट ज्यादा ले जाएगी, उसके सिर पर जीत का ताज बंध सकता है। हालांकि मीडिया और मंच से कांग्रेस नेता सचिन पायलट के सेंटर में मंत्री रहते हुए विकास कार्यों को गिना रही है। वहीं भाजपा कांग्रेस पर जातिवाद बढ़ाने के आरोप लगा रही है।

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