VIDEO: रनवे में 'पहाड़ी' बाधा ! किशनगढ़ एयरपोर्ट पर कैसे लौटे रौनक ? देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: प्रदेश के सबसे नए विकसित किशनगढ़ एयरपोर्ट पर फ्लाइट संचालन का ग्राफ जिस तेजी से बढ़ा था, उसी तेजी से नीचे आ गया है. पिछले चार माह से किशनगढ़ एयरपोर्ट की रौनक गायब है. जो किशनगढ़ देश के आधा दर्जन बड़े शहरों से जुड़ा हुआ था, वह अब केवल रोज 1 फ्लाइट के लिए भी तरस गया है. कैसे फिर लौट सकती है किशनगढ़ एयरपोर्ट की रौनक, देखिए फर्स्ट इंडिया न्यूज की ये खास रिपोर्ट- 

करीब 4 साल पहले शुरू हुए किशनगढ़ एयरपोर्ट पर फिलहाल फ्लाइट संचालन काफी कम हो चुका है. अब यहां से एक सप्ताह में मात्र 5 फ्लाइट ही संचालित हो पा रही हैं. यानी रोजाना एक फ्लाइट भी नहीं चल पा रही है. जबकि 4 माह पूर्व इसी किशनगढ़ एयरपोर्ट से रोजाना 4 से 5 फ्लाइट चल रही थी. ये फ्लाइट दिल्ली, मुम्बई, अहमदाबाद, हैदराबाद, इंदौर, सूरत जैसे शहरों के लिए चल रही थी. स्पाइसजेट एयरलाइन द्वारा फ्लाइट संचालन बंद करने के बाद से एयरपोर्ट लगभग सूना नजर आने लगा है.

अभी यहां से सप्ताह में 2 दिन इंदौर और 3 दिन सूरत के लिए फ्लाइट चल रही है. यानी सप्ताह में 2 दिन तो ऐसे भी होते हैं, जब एक भी फ्लाइट नहीं चलती. एयरपोर्ट प्रशासन यहां फ्लाइट संचालन बढ़ाने के लिए प्रयास तो कर रहा है, लेकिन रनवे छोटा होने से इसमें दिक्कत आ रही है. दरअसल, अभी एयरपोर्ट का रनवे 2 हजार मीटर लम्बा है. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इसे बढ़ाकर 3000 मीटर करने के लिए मंजूरी जारी कर दी है. लेकिन इसके बावजूद रनवे विस्तार का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है. इसी वजह से यहां पर बड़े विमानों की लैंडिंग भी संभव नहीं हो पा रही है. 

कैसे अटका किशनगढ़ एयरपोर्ट का विस्तार:
- अभी 2 हजार मीटर लम्बा है किशनगढ़ एयरपोर्ट का रनवे
- रनवे छोर 5 की तरफ 1 किमी बढ़ाया जाना प्रस्तावित है एयरपोर्ट का रनवे
- एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने जारी की विस्तार के लिए मंजूरी
- लेकिन इधर रनवे से 20 किमी दूर लगा हुआ है प्रसार भारती का टॉवर
- टॉवर की ऊंचाई है 200 मीटर, जिसे घटाना जरूरी
- टाॅवर की ऊंचाई 71 मीटर कर दी जाए तो रनवे विस्तार करना संभव
- रनवे छोर 23 की तरफ रनवे से 8 किमी दूर स्थित है टूंकड़ा की 2 पहाड़ियां
- इन पहाड़ियों की कटाई की जाए, तो रनवे विस्तार करना संभव
- एक पहाड़ी 27.6 मीटर और दूसरी 21.3 मीटर काटनी होगी 
- इन बाधाओं के चलते अभी विमान लो हाइट पर अप्रोच नहीं कर पाते
- इस कारण रनवे की लंबाई बढ़ेगी, तभी विमानों का संचालन बढ़ेगा

ऐसा नहीं है कि रनवे की मौजूदा लम्बाई पर एयरबस 320 या बोइंग 737 जैसे विमानों को लैंड कराया नहीं जा सकता. दरअसल रनवे की मौजूदा लम्बाई पर भी ये विमान यहां पर लैंड कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए एयरलाइंस को विमान फुल कैपेसिटी में चलाने की परमिशन नहीं मिलेगी. यानी एयरलाइंस को प्रत्येक फ्लाइट में कुछ सीटें खाली छोड़नी होगी. कमर्शियल वायबिलिटी देखकर फ्लाइट चलाने वाली एयरलाइंस इसके लिए राजी नहीं है. यदि रनवे की लम्बाई 3 किलोमीटर हो जाएगी, तब यहां आसानी से फुल कैपेसिटी में बड़े विमान लैंड और टेक ऑफ हो सकेंगे.

इसलिए जरूरी है रनवे विस्तार:
- किशनगढ़ एयरपोर्ट के 2 किमी लम्बे रनवे पर छोटे विमान ही उतर सकते हैं
- यहां क्यू-400 या एटीआर-72 जैसे छोटे विमानों की लैंडिंग संभव
- यानी अधिकतम 90 सीट क्षमता तक के ही विमान उतर सकते हैं
- 180 सीटर एयरबस 320 विमानों के लिए रनवे विस्तार करना जरूरी
- रनवे लम्बाई कम होने और पहाड़ी होने से विमान यहां अप्रोच नहीं कर पाते
- इससे कम लम्बाई के रनवे पर बड़े विमान उतर नहीं सकेंगे