राजस्थान रोडवेज बंद होने के कगार पर, आर्थिक संकट के कारण प्रशासन जमीन बेचने को तैयार

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/02/14 01:15

जयपुर। कभी अपने शानदार अतीत से पुरे देश में डंका पीटने वाली राजस्थान रोडवेज, अब बंद होने के कगार पर है। हालात इतने खरीब है कि अब रोडवेज के पास अपने कर्मचारियों को वेतन, और पेंशन तक देने का पैसा भी नहीं है। कभी सरपट दौडने वाली रोजवेज की यह बसे, अब किसी बिमार वयक्ति जैसी प्रतीत होती है। किसी और का भार तो दूर, आज यह बसे अपना भार ढोने में भी असमर्थ हैं। 

गौरतलब है कि इस समय राजस्थान रोडवेज करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए की घाटे में चल रही है। प्रशासन की आर्थिक मजबूरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कर्मचारियों को पेंशन और अन्य भत्तो के भुगतान के लिए वो अपनी जमीन तक बेचने को तैयार है। 

किसी जमाने में राजस्थान रोडवेज की शान कुछ अलग ही थी। सेवाओं के मामले में इसे सर्वोत्तम दर्जा प्राप्त था। लोग इसमे बैठना पसंद करते थे। उस समय प्रदेश के ग्रामिण इलाके शहर के साथ नहीं जुड़े हुए थे। लिहाजा ग्रामीण इलाकों में हर जरूरी साधनों का अभाव था। लेकिन रोडवेज प्रशासन के आने के बाद राजस्थान में बडा बदलाव हुआ।

शहर और गांव के मध्य की दुरी को राजस्थान रोडवेज ने देखते ही देखते कम कर दिया। आवागमन के लिए प्रशासन ने बसों का ऐसा जाल बिछाया कि गावं का राजस्थान, शहर के राजस्थान से मिलने लगा। लोगों को आवाजाही का साधन मिला तो रोजगार के नए अवसरों का उदय हुआ। 

बता दे कि रोडवेज का रखरखाव सरकार के बड़े आइएएस और आरएएस अफसर संभालते हैं। ऐसा नहीं था कि यह घाटा एकदम अचानक से आ गया। दरसअल सच्चाई तो यह है कि इस घाटे से उबारने के लिए सरकार द्वारा 10 वर्षों में किसी तरह का कारगर प्रयास किया ही नहीं गया। 

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