गुजरात का गदर : व्यूह-रचना में कामयाब हो रहे 'सेनापति' गहलोत

Dinesh Kumar Dangi Published Date 2017/11/11 12:46

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का गृह राज्य होने के नाते गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव काफी अहम हो गए हैं। सूबे में 22 साल से भाजपा सत्ता की सवारी कर रही है। ऐसे में नरेन्द्र मोदी के पीएम रहते हो रहे ये चुनाव बेहद अहम है। मोदी को खुद को साबित करने के लिए ये चुनाव जीतना ही होगा, क्योंकि इस चुनाव के नतीजे 2019 के लोकसभा चुनाव की इबारत लिखेंगे।

गुजरात चुनाव को लेकर मोदी से मुकाबले के लिए कांग्रेस ने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और AICC के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत को गुजरात की कमान सौंपी गई है। बतौर गुजरात प्रभारी राजनीति के जादूगर अशोक गहलोत यहां पार्टी के पक्ष में माहौल और रणनीति बनाने में कामयाब होते नजर आ रहे हैं। चुनाव को लेकर गहलोत इन दिनों नोटबंदी, जीएसटी और पाटीदारों की नाराजगी जैसे मुद्दों को जमकर भुनाने में लगे हैं।

गुजरात में कांग्रेस के पास पीसीसी चीफ भरत सोलंकी, पूर्व पीसीसी चीफ अर्जुन मोडवाड़िया और एमएलए शक्तिसिंह गोविल जैसे गिनती के नेता हैं, लेकिन ये नेता सिर्फ अपनी सीट निकालने तक ही सीमित है। इसीलिए गहलोत जैसे नेता को यहां लगाया गया है। गहलोत पिछले करीब एक माह से गुजरात मे डेरा डाले हुए हैं। अल्पेश ठाकुर, हार्दिक पटेल जैसे नेताओं से कब और क्या वार्ता करनी है, कब राहुल गांधी से मिलाना है। इन सबको लेकर गहलोत ने ही पटकथा लिखी।

राहुल की नवसर्जन यात्रा का पूरा खाका भी उन्होंने प्लान किया। राहुल के मंदिर से लेकर आम लोगों के साथ सेल्फी लेना हो या फिर किसी ढाबे पर खाना लेना हो, सब अशोक गहलोत ने प्लान किया है। गहलोत की इस मेहनत के चलते राहुल भी अब मंच से उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। जबकि एक वक्त था कि राहुल और गहलोत के रिश्ते इतने मधुर नहीं माने जा रहे थे।

कांग्रेस की सभाओं और कांग्रेस के प्रयासों को देखते हुए लगने लगा है कि गुजरात के रण में बतौर सेनापति गहलोत रणनीति और व्यूह—रचना बनाने में जरूर कामयाब होते नजर आ रहे हैं। यहां के सारे नेता भी गहलोत के हर प्लान का समर्थन कर रहे हैं। गहलोत ने ऐसी सीटें तय की है, जहां मेहनत करने पर कांग्रेस जीत सकती है। भाजपा की मजबूत सीटों पर ज्यादा एनर्जी वेस्ट नहीं करने का भी फंडा अपनाया जा रहा है।

फर्स्ट इंडिया से की गई खास बातचीत में गहलोत ने कहा कि गुजरात की जनता बदलाव चाह रही है। झूठे वादों और बातों से वो तंग आ चुकी है। गहलोत ने कहा कि अगर गुजरात मे विकास हुआ तो इतनी बेरोजगारी क्यों है। बहरहाल, 'जादूगर' के 'जादू' ने गुजरात में कांग्रेस के 22 साल के सत्ता के वनवास को दूर करने की राह तैयार कर दी है, लेकिन वोटिंग तक और मोदी मैजिक के आगे ये 'जादूगिरी' कितनी कारगर साबित हो पाएगी, ये तो चुनाव के बाद आने वाले नतीजों से ही साफ हो पाएगा।

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