वहीं विधायक धीरज गुर्जर और सचिन पायलट के चलते गुर्जर वोट भी पूरे मिलने के आसार है। वहीं जाट मतदाता के राजपूत प्रत्याशी वोट नहीं जाने की स्वाभाविक परम्परा यहां भी कायम रहेगी। एेसे में भाजपा का पूरा फोकस वैश्य, एससी-एसटी, राजपूत औऱ अन्य जातियों के वोटर्स पर रहेगा, लेकिन सूबे में सरकार होने के चलते हर जगह भाजपा के ही जनप्रतिनिधि है।

वहीं मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम को भी भाजपा प्रत्याशी पूरी तरह से भुनाएंगे। लिहाजा, इसके चलते भाजपा सीट निकालने के पूरे प्रयास करेगी। हालांकि दोनों ही प्रत्याशी जातिवाद के बजाय विकास के मुद्दे पर वोट मिलने का दावा जता रहे हैं।

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मांडलगढ़ उपचुनाव : कांग्रेस जातिगत तो भाजपा सियासी समीकरण में मजबूत

Published Date 2018/01/13 05:03, Written by- Dinesh Kumar Dangi

जयपुर। राजस्थान की अजमेर व अलवर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में से मांडलगढ़ के नतीजे प्रदेश की भाजपा सरकार के चार साल के कामकाज पर मुहर लगा देंगे। वहीं अगर कांग्रेस मांडलगढ़ सीट निकाल लेती है तो फिर जनमानस में राज्य सरकार की उल्टी गिनती शुरु होने का मैसेज चला जाएगा। वहीं अगर भाजपा जीत हासिल कर लेती है तो वसुंधरा सरकार के चार साल बेमिसाल के दावे पर मुहर लग जाएगी।

लिहाजा, दोनों ही दलों ने जीत दर्ज करने के लिए ऐड़ी—चोटी का जोर लगा रखा है। कांग्रेस ने मांडलगढ़ से विवेक धाकड़ और भाजपा ने जिला प्रमुख शक्ति सिंह को मैदान में उतारा है। दोनों ही प्रत्याशी युवा और खनन कारोबारी है। फिलहाल जातिगत समीकरणों में कांग्रेस और सियासी समीकरणों के तहत भाजपा मजबूत स्थिती में दिख रही है।

दरअसल, मांडलगढ़ में करीब 2 लाख 30 हजार मतदाता है, जिसमें 60 हजार एससी-एसटी, 30-30 हजार धाकड़-ब्राह्म्ण, 15 हजार गुर्जर, 12 हजार जाट और दस-दस हजार वैश्य और राजपूत समाज के मतदाता हैं। कांग्रेस को सीपी जोशी के चलते ब्राह्म्ण समाज और धाकड़ वोट विवेक के खुद प्रत्याशी होने के चलते मिलने की पूरी संभावना है। 

वहीं विधायक धीरज गुर्जर और सचिन पायलट के चलते गुर्जर वोट भी पूरे मिलने के आसार है। वहीं जाट मतदाता के राजपूत प्रत्याशी वोट नहीं जाने की स्वाभाविक परम्परा यहां भी कायम रहेगी। एेसे में भाजपा का पूरा फोकस वैश्य, एससी-एसटी, राजपूत औऱ अन्य जातियों के वोटर्स पर रहेगा, लेकिन सूबे में सरकार होने के चलते हर जगह भाजपा के ही जनप्रतिनिधि है।

वहीं मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम को भी भाजपा प्रत्याशी पूरी तरह से भुनाएंगे। लिहाजा, इसके चलते भाजपा सीट निकालने के पूरे प्रयास करेगी। हालांकि दोनों ही प्रत्याशी जातिवाद के बजाय विकास के मुद्दे पर वोट मिलने का दावा जता रहे हैं।

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