राजस्थान में टिकटों के लिए कांग्रेस करा रही निजी एजेंसी से सर्वे

Published Date 2018/06/21 07:13, Written by- Dinesh Kumar Dangi

जयपुर। राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने उम्मीदवारों की खोजबीन का काम शुरु कर दिया है। इसके लिए पार्टी ने एक बार फिर सर्वे का सहारा लिया है। एआईसीसी ने सर्वे का काम एक निजी एजेंसी को दिया है, जो क्षेत्र में जाकर फिलहाल प्रत्याशियों का फीडबैक लेने में जुटी हुई है। वहीं बताया जा रहा है कि पीसीसी ने भी अपने लेवल पर एक सर्वे कराया है। साथ ही चारों सहप्रभारियों के जरिए भी हर विधानसभा से तीन—तीन प्रत्याशियों का पैनल मांगा गया है।

विधानसभा चुनाव में अब करीब पांच माह का वक्त बचा है। लिहाजा, कांग्रेस ने उम्मीदवारों के चयन का काम शुरु कर दिया है। चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस हर हाल में मजबूत और टिकाऊ प्रत्याशियों को टिकट देना चाहेगी। लिहाजा, इसमें कोई चूक नहीं हो इसके लिए टिकट देने से पहले हर एंगल से हर समीकरण से प्रत्याशी की जांच परख करेगी। इसके लिए कांग्रेस ने सहारा लिया है एक बार फिर सर्वे के फार्मूले का। कांग्रेस आलाकमान ने एक एजेंसी को हायर करते हुए राजस्थान में सर्वे का काम बाकायदा दे भी दिया है।

बताया जा रहा है कि पार्टी ने करीब 30 बिन्दु एजेंसी को दिए हैं, जिनके स्तर पर प्रत्याशियों के बारे डिटेल जुटानी है। सूत्रों के मुताबिक, एक माह में एजेंसी अपना सर्वे करके रिपोर्ट कांग्रेस को सौंप देगी। खास बात यह है कि सर्वे के लिए एजेंसी को बाकायदा पार्टी ने करीब 250 संभावित प्रत्याशियों के नाम भी सौंपे हैं। एजेंसी से इन नेताओं की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक हैसियत कैसी है, इसकी गहराई से पड़ताल करने का भी काम सौंपा है।

सर्वे के दौरान इस फैक्टर का भी डेप्थ में जाकर पता लगाने को कहा है कि अमूमन जाति और वर्ग को इस बार ज्यादा टिकट देते हैं तो क्या रिजल्ट आ सकता है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी दलित और एसटी को जनरल सीट पर भी ज्यादा मौका देने की रणनीति इस बार बना रही है। इसी सर्वे एजेंसी को छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश का भी सर्वे का काम सौंपा गया है। वहीं इससे पहले पीसीसी की तरफ से भी एक सर्वे कराने की बात सामने आई है। दस प्वॉइंट्स के आधार पर पीसीसी का एक फौरी सर्वे हुआ है।

साथ ही चारों सहप्रभारियों को भी 50-50 सीटों का जिम्मा दे रखा है। ऐसे में उनसे भी तीन-तीन प्रत्याशियों का पैनल तैयार करने को कहा है। सितम्बर में एआईसीसी अपने, पीसीसी और सहप्रभारियों की रिपोर्ट को एक टेबल पर रखेगी। बाद में एक कॉमन रिपोर्ट तैयार करते हुए स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष रखा जाएगा। उसी के बाद एक अंतिम नाम पर मुहर लगेगी।

बहरहसल, अब सर्वे में क्या निकलकर आता है और किस नेता की किस्मत खुलती है, यह तो सर्वे पूरा होने के बाद ही पता चलेगा। लेकिन कुछ दावेदारों की सर्वे टीम की सूचना भनक चुकी है। लिहाजा, वो अपनी सीआर बढ़ाने की जुगत कर रहे हैं। सर्वे इतना गोपनीय चल रहा है कि टीम उनके पकड़ में नहीं आ रही है। ऐसे में अब देखना है कि सर्वे के आधार पर टिकटों का फैसला होता है या फिर सिफारिशी सिस्टम चलेगा। यह तो टिकट वितरण के बाद ही खुलासा होगा।

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