वहीं इस मामले में याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका को वापस लिया, जिसमें कहा गया कि हाईकोर्ट पूर्व में वर्ष 2012 में भी ये आदेश दे चुका है, जिसमें डाक्टर्स की हड़ताल को असंवैधानिक माना गया था। गौरतलब है कि वर्ष 2011 में डॉ. अजय चौधरी के नेतृत्व में हुई हड़ताल को असंवैधानिक मानकर हाइकोर्ट ने व्यवस्था दी थी। इसके तहत बताया गया था कि डॉक्टर्स नहीं कर सकते हड़ताल, क्योंकि इसे मरीजों के मौलिक अधिकार का हनन बताया गया था। इस मामले में अगली सुनवाई 15 नवंबर को होगी।

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डॉक्टरों की हड़ताल पर राज्य सरकार को हाई कोर्ट का नोटिस, 13 नवंबर तक मांगा जवाब

Published Date 2017/11/10 05:49, Written by- FirstIndia Correspondent

जयपुर। सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल को लेकर एक ओर जहां चिकित्सकीय सेवाएं गड़बड़ाई हुई है, वहीं अस्पतालों में भर्ती मरीजों की भी हालत खराब है। सरकार के साथ डॉक्टर्स की अभी तक हुई वार्ताएं बेनतीजा रहने के चलते इस मुद्दे का अभी तक कोई हल नहीं निकल पाया है। वहीं डॉक्टर्स की हड़ताल से जुड़े मामले में आज राजसथान हाई कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 13 नवंबर तक जवाब पेश करने के आदेश दिए गए हैं।

हाई कोर्ट में आज जस्टिस केएस झवेरी की खंडपीठ में महेश शर्मा व डॉ अभिनव शर्मा की जनहित याचिका (पीआईएल) पर हुई सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को जारी नोटिस कर 13 नवंबर तक जवाब पेश करने के लिए कहा ​है। हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि एसएमएस अस्पताल एक दिन में करीब 800 मरीजों को संभालता है और डॉक्टरों के पास हड़ताल के अलावा कोई चारा नहीं है। 

वहीं इस मामले में याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका को वापस लिया, जिसमें कहा गया कि हाईकोर्ट पूर्व में वर्ष 2012 में भी ये आदेश दे चुका है, जिसमें डाक्टर्स की हड़ताल को असंवैधानिक माना गया था। गौरतलब है कि वर्ष 2011 में डॉ. अजय चौधरी के नेतृत्व में हुई हड़ताल को असंवैधानिक मानकर हाइकोर्ट ने व्यवस्था दी थी। इसके तहत बताया गया था कि डॉक्टर्स नहीं कर सकते हड़ताल, क्योंकि इसे मरीजों के मौलिक अधिकार का हनन बताया गया था। इस मामले में अगली सुनवाई 15 नवंबर को होगी।

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