प्रसूता के लिए भारी पड़ी चिकित्साकर्मियों की दिवाली की छुट्टियां, जन्म से पहले ही खो दिया नवजात

Published Date 2017/10/22 12:00, Written by- FirstIndia Correspondent

उदयपुर। उदयपुर के कोटड़ा में जननी सुरक्षा योजना के तहत जननी और नवजात की सुरक्षा के दावे एक बार फिर से खोखले सबित हुए हैं, जिसमें एक गभर्वती महिला को समय पर उपचार नहीं मिलने की वजह से एक नवजात की मौत हो गई। इस मामले ने सरकार द्वारा किए जाने वाले जच्चा—बच्चा की सुरक्षा के दावों को धत्ता बताया है।

मामला कोटड़ा के मामेर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है, जहां मामेर निवासी रमी पत्नी कालीया बामणिया को शुक्रवार रात को प्रसव पीड़ा होने पर उसके परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस पर कॉल किया। कॉल करने पर उन्हें बताया गया कि एम्बुलेंस पिछले काफी समय से खराब होने की वजह से मांडवा से एम्बुलेंस बुलानी पड़ेगी, जिसमें कुछ समय लग सकता है।

इस पर परिजन अपने स्तर पर ही एक जीप में उसे लेकर मामेर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जहां मौजूद चिकित्साकर्मी ने स्टाफ मौजूद नहीं होने की बात कहकर कहीं और ले जाने के लिए कहा। इस पर परिजन प्रसूता को गुजरात के खेडब्रहमा लेकर रवाना हुए और उसे गुजरात के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इसके बाद शनिवार को प्रसूता की डिलीवरी की गई, जिसमें एक नवजात मृत पाया गया।

गौरतलब है​ कि प्रसूता को उपचार नहीं मिलने तक काफी परेशानियों और पीड़ा का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उसे अपना बच्चा गंवाना पड़ गया। हालांकि गनीमत रही कि प्रसूता के शरीर में किसी तरह का कोई इंफेक्शन नहीं हुआ, लेकिन ऐसे में जननी सुरक्षा के माध्यम ये मिलने वाली सुविधाओं के दावों की पोल खुलती नजर आई है।

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