पुलिस भर्ती परीक्षा में किन्नर का हिस्सा लेना उसमें चयनित होने का प्रदेश पुलिस के पास पहला मामला सामने आया था। ऐसे में पुलिस अधिकारी नियमों को देखकर नियुक्ति नहीं दे पा रहे थे। हाईकोर्ट जस्टिस दिनेश मेहता ने पुलिस विभाग को आदेश दिये हैं कि छह सप्ताह में नियुक्ति दी जाये।

दरअसल, वर्ष 2013 में 12 हजार पदों के लिए कांस्टेबल भर्ती परीक्षा हुई थी, जिसमें प्रदेश के सभी जिलों से 1.25 लाख अभ्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। इसमें से पुलिस ने 11,400 अभ्यार्थियों का कांस्टेबल पद के लिए चयन कर लिया था। इसमें रानीवाड़ा थाना इलाके जालौर में रहने वाली गंगाकुमारी पुत्री बीकाराम का भी चयन हो गया। सभी अभ्यार्थियों का मेडिकल कराया गया तो गंगा के किन्नर होने की पुष्टि हुई। ऐसे में नियुक्ति को लेकर पुलिस अधिकारी असमंजस में पड़ गए।

गंगा के किन्नर होने की पुष्टि होने के बाद जालौर एसपी ने फाइल रेंज आईजी जोधपुर जीएल शर्मा को भेजकर नियुक्ति को लेकर राय मांगी थी। ऐसा मामला पहली बार आने पर आईजी ने 3 जुलाई 2015 को फाइल पुलिस मुख्यालय भेज दी गई थी, लेकिन यहां पर भी पुलिस के अधिकारी कुछ निर्णय नहीं कर पाए। ऐसे में पुलिस मुख्यालय ने राय जानने के लिए फाइल गृह विभाग को भेज दी थी। गंगा कुमारी का तीन साल पहले परीक्षा में चयन हो गया था।

बरहाल, गंगा कुमारी ने संघर्ष करके अपने हक को प्राप्त किया और यह साबित कर दिया कि किन्नर भी समाज मे सबके समान ही बराबर कंधे से कंधा मिलाकर चल सकते हैं और समाज की मुख्यधारा में वह भी एक भाग है। इसके साथ ही किन्नर समाज के लिए आगे आने वाली नौकरियों में भी रास्ता साफ हो गया है।

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गंगा ने साफ किया सरकारी नौकरियों में किन्नर समाज का रास्ता

Published Date 2017/11/15 12:23, Written by- FirstIndia Correspondent

जोधपुर। राजस्थान में पहला एवं देश में तीसरा ऐसा मामला सामने आया है, जब किसी किन्नर को सरकारी नियुक्ति मिली है। राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश से राजस्थान पुलिस विभाग में पुलिस कांस्टेबल के पद पर पहली बार किसी किन्नर को नियुक्ति दी जाएगी। हाईकोर्ट के जस्टिस दिनेश मेहता की अदालत ने जालौर निवासी किन्नर गंगाकुमारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए छह सप्ताह में नियुक्ति देने एवं साल 2015 से ही नोशनल बेनिफिट देने के आदेश दिये।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रितुराज सिंह ने पैरवी करते हुए कहा कि गंगाकुमारी पुलिस कांस्टेबल के पद के पात्र होने के बावजूद जालौर पुलिस अधीक्षक द्वारा नियुक्ति नहीं दी गई थी। कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में चयनित किन्नर की नियुक्ति को लेकर पुलिस गृह विभाग के आला अधिकारी पशोपेश में थे। पिछले तीन साल से गृह विभाग पुलिस के अधिकारी किन्नर की नियुक्ति को लेकर निर्णय नहीं कर पा रहे थे और लम्बे समय तक मामले की फाइल गृह विभाग में पड़ी हुई थी।

पुलिस भर्ती परीक्षा में किन्नर का हिस्सा लेना उसमें चयनित होने का प्रदेश पुलिस के पास पहला मामला सामने आया था। ऐसे में पुलिस अधिकारी नियमों को देखकर नियुक्ति नहीं दे पा रहे थे। हाईकोर्ट जस्टिस दिनेश मेहता ने पुलिस विभाग को आदेश दिये हैं कि छह सप्ताह में नियुक्ति दी जाये।

दरअसल, वर्ष 2013 में 12 हजार पदों के लिए कांस्टेबल भर्ती परीक्षा हुई थी, जिसमें प्रदेश के सभी जिलों से 1.25 लाख अभ्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। इसमें से पुलिस ने 11,400 अभ्यार्थियों का कांस्टेबल पद के लिए चयन कर लिया था। इसमें रानीवाड़ा थाना इलाके जालौर में रहने वाली गंगाकुमारी पुत्री बीकाराम का भी चयन हो गया। सभी अभ्यार्थियों का मेडिकल कराया गया तो गंगा के किन्नर होने की पुष्टि हुई। ऐसे में नियुक्ति को लेकर पुलिस अधिकारी असमंजस में पड़ गए।

गंगा के किन्नर होने की पुष्टि होने के बाद जालौर एसपी ने फाइल रेंज आईजी जोधपुर जीएल शर्मा को भेजकर नियुक्ति को लेकर राय मांगी थी। ऐसा मामला पहली बार आने पर आईजी ने 3 जुलाई 2015 को फाइल पुलिस मुख्यालय भेज दी गई थी, लेकिन यहां पर भी पुलिस के अधिकारी कुछ निर्णय नहीं कर पाए। ऐसे में पुलिस मुख्यालय ने राय जानने के लिए फाइल गृह विभाग को भेज दी थी। गंगा कुमारी का तीन साल पहले परीक्षा में चयन हो गया था।

बरहाल, गंगा कुमारी ने संघर्ष करके अपने हक को प्राप्त किया और यह साबित कर दिया कि किन्नर भी समाज मे सबके समान ही बराबर कंधे से कंधा मिलाकर चल सकते हैं और समाज की मुख्यधारा में वह भी एक भाग है। इसके साथ ही किन्नर समाज के लिए आगे आने वाली नौकरियों में भी रास्ता साफ हो गया है।

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