इसके बाद अक्टूबर 2015 से वो यहां फरार हो गया, जो कि अब तक नहीं मिल पाया है। ऐसे में अब भवन के लिए स्वीकृत राशी का कोई अता—पता नहीं चल पा रहा है। शिक्षा विभाग का कहना है कि स्कूल भवन के लिए तो बजट दे दिया गया था। अब फिर से बजट मिल पाना मुश्किल है। फरार अध्यापक के इस तहर रिकॉर्ड नहीं देने और फरार होने के बाद बीईओ जीवनलाल सम्बंधित थाना पर अध्यापक के खिलाफ मामला दर्ज करवाने भी गए, लेकिन रिकार्ड नहीं होने के कारण थाने पर भी एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी।

इसके लिए विभाग को कई बार लिखा गया है, लेकिन पूर्व में स्वीकृत बजट का समायोजन पूर्व अध्यापक द्वारा नहीं किए जाने से नया बजट लाना संभव नहीं हो पा रहा है। फरार अध्यापक खराड़ी ने कोई रिकार्ड दिखाया ही नहीं है और अब वो फरार है। पंचायत से नरेगा में स्कूल का कार्य करवाने के लिए आग्रह करेंगें।

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ब्लॉक के 400 स्कूल हुए पक्के, झालरा में अभी भी चल रहा एक मात्र 'बिना छत का स्कूल'

Published Date 2017/11/07 06:55, Written by- FirstIndia Correspondent
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कोटड़ा (उदयपुर)। सालों बंद रहने और अध्यापकों के नियमित नहीं किए जाने से कई बार चर्चा में रहा झालरा स्कूल अब बिना छत के संचालित होने वाली स्कूल के रूप में चर्चा में है। गोगरूद पंचायत के झालरा गांव में संचालित उच्च प्राथमिक स्कूल के भवन पर छत नहीं है। स्कूल भवन की छत पर बिना किसी सपोर्ट के इस पर टीन लगाए हुए हैं। छत केवल लकड़ियों पर टिकी हुई होने से खतरनाक है। ऐसे हालात में भी छत को पूरा नहीं ढका गया है। इस स्थिति में नामांकित 50 बच्चों के लिए ये छत कभी खतरा साबित हो सकती है। 

शिक्षा के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने के लिए सरकार भवन सहित अन्य सुविधाएं मुहैया करा रही है, लेकिन सुविधा तो दूर यहां भवन भी नहीं है। ऐसे हालात में बच्चों को बरसात में भी पढ़ाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में शिक्षा से बच्चों का विकास कैसे होगा, जब बच्चों को पढ़ाने के लिए भवन ही नहीं मिल पा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, स्कूल पूर्व में कार्यरत अध्यापक अनिल खराड़ी के समय में स्कूल के भवन सहित बाउंड्री वॉल, दो शौचालय के लिए बजट भी सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से दिया गया था। लेकिन अध्यापक ने स्कूल सालों तक नहीं खोला। जब मामला प्रकाश में आया तो जांच में सामने आया कि स्कूल में कोई कार्य नहीं हुआ। इस पर अध्यापक से सारे दस्तावेज मांगे तो उसने कोई रिकॉर्ड भी प्रस्तुत नहीं किया।

इसके बाद अक्टूबर 2015 से वो यहां फरार हो गया, जो कि अब तक नहीं मिल पाया है। ऐसे में अब भवन के लिए स्वीकृत राशी का कोई अता—पता नहीं चल पा रहा है। शिक्षा विभाग का कहना है कि स्कूल भवन के लिए तो बजट दे दिया गया था। अब फिर से बजट मिल पाना मुश्किल है। फरार अध्यापक के इस तहर रिकॉर्ड नहीं देने और फरार होने के बाद बीईओ जीवनलाल सम्बंधित थाना पर अध्यापक के खिलाफ मामला दर्ज करवाने भी गए, लेकिन रिकार्ड नहीं होने के कारण थाने पर भी एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी।

इसके लिए विभाग को कई बार लिखा गया है, लेकिन पूर्व में स्वीकृत बजट का समायोजन पूर्व अध्यापक द्वारा नहीं किए जाने से नया बजट लाना संभव नहीं हो पा रहा है। फरार अध्यापक खराड़ी ने कोई रिकार्ड दिखाया ही नहीं है और अब वो फरार है। पंचायत से नरेगा में स्कूल का कार्य करवाने के लिए आग्रह करेंगें।

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