राजनीति में एक अपराधी तय करता है कि सत्ता किसके हाथ में होगी : सुप्रीम कोर्ट

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/02/13 12:47

नई दिल्ली। राजनीति से अपराध का गहरा नाता होता है। बात अगर भारतीय राजनीति की करे, तो यहां अपराध और अपराधियो का वर्चस्व हमेशा रहा है। हमारे देश की राजनीति गवाह रही है कि अपराध के बल पर चुनाव लड़े, और जीते जा सकते हैं। सत्ता की आड़ में अपराध इस तरह छुप जाता है कि वो किसी को दिखाई नहीं देता। या फिर यु कहिए कि, राजनताओं द्वारा किए जा रहे अपराधो की तरफ देखने की कोई हिम्मत नहीं कर पता।

सत्ता में अपराधियों की बढोत्तरी को देखते हुए, सुप्रिम कोर्ट ने अपनी नाराजगी वयक्त की है। कोर्ट ने केंन्द्र से पुछा है कि जब किसी को चुनाव लडने का अधिकार नहीं है, तो उसे सत्ता में बने रहने का अधिकार कैसे है? आखिर कोई चुनाव से बेदखल होने के बावजूद भी कैसे अपनी पार्टी का पदधिकारी बन सकता है, या फिर नई पार्टी बना सकता है? क्या एक अपराधी यह तय नहीं करता कि चुनाव में कौन खड़ा  होगा, और किसलिए खड़ा होगा?

कोर्ट के इस बयान पर असमंजस की सिथ्ती बनी हुई है। क्योंकि इसी मामले की पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि वो किसी को भी महज इसलिए पार्टी बनाने से नहीं रोक सकते, क्योंकि वो आपराधिक पृष्ठ भूमि से आता है। कोर्ट ने कहा था कि अपराधियों को भी लोकतंत्र में अपने राजनैतिक विचार रखने का हक है।

गौरतलब है कि सत्ता से अपराध को दूर रखने के लिए, आपराधिक पृष्ठ भूमि वाले राजनेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दिया गया था। लेकिन इसका कोई खास फायदा हुआ नहीं। आपराधिक पष्ठ भूमि वाले नेताओं ने सत्ता को पाने का अप्रतक्ष तरिका निकाल लिया, सज़ा पाने वालो ने चुनाव का हक तो खो दिया, लेकिन सत्ता का नहीं। ये लोग खुद चुनाव ना लडकर भी पदाधिकारी बने रहे, या नई पार्टी बनाते रहे।  

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