राज्यसभा जाने की अपनी उम्मीदें टूटने को लेकर कुमार विश्वास द्वारा दिए गए बयान पर आप नेता गोपाल राय ने कहा कि कुमार पिछले साल अप्रैल में हुए पार्षद चुनाव के दौरान पार्टी को गिराना चाहते थे। कुमार यह सब केंद्र सरकार के इशारे पर करना चाहते थे। इससे एक बात तो साफ हो गई कि अब पार्टी में कुमार विश्वास की वह जगह नहीं रही, जो पहले थी। गोपाल राय ने कहा कि इस बारे में कुमार विश्वास के आवास पर कुछ विधायकों की बैठक भी हुई थी। इसी के साथ इस सारे मामले में कपिल मिश्रा भी शामिल थे, जिनको पार्टी और मंत्री पद से हटाया गया था।

वहीं दूसरी ओर, गोपाल राय के बयान को लेकर कुमार विश्वास ने भी पलटवार किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि विधायक और मंत्री सहित नौ पदों पर बैठे गोपाल राय कार्यकर्ताओं को मीर जाफर कहते हैं। आज सात महीने बाद उनकी कुंभकरणी नींद खुल गई हैै। उन्‍होंने कहा कि दरअसल, इस माहिष्‍मती की शिवगामी देवी कोई और है, हर बार नए कटप्‍पा यहां पैदा किए जाते हैं। मेरा उनसे अनुरोध है कि नए-नए कांग्रेस और भाजपा से आए हुए जो गुप्‍ता बंधु हैं, उनके 'योग' 'दान' का कुछ आनंद लें, मेरे शव के साथ छेड़छाड़ न करें।

बहरहाल, ऐसे में आम आदमी पार्टी के भीतर चल रहा घमासान अब खुलकर सामने आ रहा है, जिससे यह घर की लड़ाई अब घर से बाहर आ चुकी है। हालांकि, इस पूरे मामले में अभी भी अरविंद केजरीवाल मौन साधे हुए हैं, लेकिन सरकार के मंत्री और वरिष्‍ठ नेता आमने सामने आरोप और प्रत्‍याराेप लगा रहे हैं। वहीं पार्टी के कई कार्यकर्ता भी खुलकर विरोध में आ रहे हैं और केजरीवाल से सवाल किए जा रहे हैं कि कारोबारियों को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया जाना किस तरह से पार्टी के हित में है और पार्टी के लिए उनका क्या योगदान है। ऐसे में पार्टी में बिखराव के आसार बनते जा रहे हैं।

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राज्यसभा प्रत्याशियों की घोषणा के बाद तेज हुआ AAP में मचा घमासान, तो क्या बिखराव की ओर बढ़ रही है पार्टी

Published Date 2018/01/05 02:19, Written by- FirstIndia Correspondent

नई दिल्ली। दिल्ली में राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले मतदान को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा किए गए पार्टी प्रत्याशियों के ऐलान के बाद आप में मचा घमासान तेज हो गया है। आप की ओर से कुमार विश्वास की राज्यसभा में जाने की मंशा पर पानी फेर कर पार्टी के संस्थापक सदस्य संजय सिंह, एनडी गुप्ता और संजीव गुप्ता को प्रत्याशी बनाये जाने के बाद एक—दूसरे पर आरोप—प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो चला है और हालात को देखकर लगने लगा है कि शायद अब आप बिखराव की ओर बढ़ रही है।

गौरतलब है कि बीते बुधवार को ही आप ने अपने राज्यसभा प्रत्याशियों के नामों को ऐलान किया था। इसमें आप ने संजय सिंह, एनडी गुप्ता और संजीव गुप्ता को प्रत्याशी बनाया था। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में कुमार विश्वास के नाम पर सहमति नहीं बन पाने के कारण पहले से ही राज्यसभा जाने की मंशा जाहिर कर चुके कुमार विश्वास की उम्मीदों पर पानी फिर गया। इस पर विश्वास ने कहा कि पिछले डेढ़ सालों से जिन सच्चाइयों से उन्होंने परदा उठाया है, उसका उन्हें रिजल्ट मिल गया है। उन्हें सच बोलने की सजा मिल गई है।

राज्यसभा जाने की अपनी उम्मीदें टूटने को लेकर कुमार विश्वास द्वारा दिए गए बयान पर आप नेता गोपाल राय ने कहा कि कुमार पिछले साल अप्रैल में हुए पार्षद चुनाव के दौरान पार्टी को गिराना चाहते थे। कुमार यह सब केंद्र सरकार के इशारे पर करना चाहते थे। इससे एक बात तो साफ हो गई कि अब पार्टी में कुमार विश्वास की वह जगह नहीं रही, जो पहले थी। गोपाल राय ने कहा कि इस बारे में कुमार विश्वास के आवास पर कुछ विधायकों की बैठक भी हुई थी। इसी के साथ इस सारे मामले में कपिल मिश्रा भी शामिल थे, जिनको पार्टी और मंत्री पद से हटाया गया था।

वहीं दूसरी ओर, गोपाल राय के बयान को लेकर कुमार विश्वास ने भी पलटवार किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि विधायक और मंत्री सहित नौ पदों पर बैठे गोपाल राय कार्यकर्ताओं को मीर जाफर कहते हैं। आज सात महीने बाद उनकी कुंभकरणी नींद खुल गई हैै। उन्‍होंने कहा कि दरअसल, इस माहिष्‍मती की शिवगामी देवी कोई और है, हर बार नए कटप्‍पा यहां पैदा किए जाते हैं। मेरा उनसे अनुरोध है कि नए-नए कांग्रेस और भाजपा से आए हुए जो गुप्‍ता बंधु हैं, उनके 'योग' 'दान' का कुछ आनंद लें, मेरे शव के साथ छेड़छाड़ न करें।

बहरहाल, ऐसे में आम आदमी पार्टी के भीतर चल रहा घमासान अब खुलकर सामने आ रहा है, जिससे यह घर की लड़ाई अब घर से बाहर आ चुकी है। हालांकि, इस पूरे मामले में अभी भी अरविंद केजरीवाल मौन साधे हुए हैं, लेकिन सरकार के मंत्री और वरिष्‍ठ नेता आमने सामने आरोप और प्रत्‍याराेप लगा रहे हैं। वहीं पार्टी के कई कार्यकर्ता भी खुलकर विरोध में आ रहे हैं और केजरीवाल से सवाल किए जा रहे हैं कि कारोबारियों को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया जाना किस तरह से पार्टी के हित में है और पार्टी के लिए उनका क्या योगदान है। ऐसे में पार्टी में बिखराव के आसार बनते जा रहे हैं।

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