इस विधि से करें होलिका दहन, होगी मनोकामना पूरी 

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/02/26 04:22

होली के एक दिन पहले होलिका दहन का तयौहार मनाया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है, जिसके बाद ही अगली सुबह को गुलाल और रंगों की होली खेली जाती  है। होली के दिन फागुआ और गीत गाने का भी रिवाज रहा है। बॉलीवुड में कई गीत ऐसे हैं, जिन्हें विशेष रूप से होली के लिए ही फिल्माया गाया। होली आते ही वातावरण में एक अजीब सी चंचलता आ जाती है। 

नियमों के अनुसार होली के एक महीन पहले माघ पूर्णिमा वाले दिन गुलर के पेड़ की टहनी को मोहल्ले के चौराहे के बीच में लगा देने का रिवाज है। तथा फाल्गुन पूर्णिमा पर लोग एक साथ मिलकर होलिका दहन करते है। होलिका दहन करने से पहले उसकी विधिवत पूजा करना आवश्यक है। पूजा के लिए इस दिन जल,रोली, फूल माला,चावल गुड़ और नई पकी फसल के पौधों की बालियां रखना फलदायक रहेगा।

होलिका दहन के शुभ मुहूर्त के समय चार मालाएं होलिका को अर्पित करनी चाहिए। जिसके बाद तीन या सात बार होलिका का परिक्रमा करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में प्रदोष काल के दौरान करें। लेकिन ध्यान रखें कि जब भद्राकाल चल रहा हो तो इस दौरान होलिका दहन नहीं करें। भद्राकाल के समय होलिका दहन शुभ नहीं माना जाता है । 

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in

पूजा पाठ के बाद \'चाणक्य\' ने दिए मंत्र, कार्यकर्ताओं को जीत का पाठ पढ़ा रहे हैं शाह

28 सितंबर को जोधपुर आएंगे पीएम मोदी, तीनों सेनाओं के प्रमुखों से करेंगे संयुक्त कॉन्फ्रेंस
जलते तिरंगे से क्या है \'भगवा\' कनेक्शन ? भरतपुर में क्या महंत ने किया गाय से दुष्कर्म ?
जयपुराइट्स को जल्द मिलेगी बॉटनिकल पार्क की सौगात, द्रव्यवती प्रोजेक्ट के उद्घाटन के साथ खुलेगा पार्क
राजस्थान के चुनावी रण में राहुल गांधी 20 सितंबर को फिर आ रहे दस्तक देने
ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों से ही होंगे प्रदेश में चुनाव
3 साल से रोजगार के इंतजार में आवेदक, अल्पसंख्यक मामलात विभाग में निकली थी भर्ती
बिजली कर्मचारियों का महापड़ाव बना \'शक्तिस्थल\'