रामरहीम प्रकरण: पुलिस जांच से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं, 24 को फिर मांगी रिपोर्ट

FirstIndia Correspondent Published Date 2017/11/09 12:18

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा से लापता हुई विवाहिता को लेकर गुरमत रामरहीम के खिलाफ दर्ज प्रकरण में पुलिस जांच से असंतुष्ट होकर जांच अधिकारी को 24 नवंबर को पुन: प्रगति रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी डेरे पर जाएं और रामरहीम से भी पूछताछ करें।

न्यायाधीश महेन्द्र माहेश्वरी की एकलपीठ ने यह आदेश कमलेश कुमार की ओर से दायर आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान जवाहर सर्किल थाने के जांच अधिकारी अदालत में पेश हुए। उनकी ओर से पेश जांच रिपोर्ट देखकर अदालत ने कहा कि उन्होंने प्रभावी जांच ही नहीं की है। अदालत ने जांच अधिकारी से यह भी पूछा कि निचली अदालत के आदेश के बाद उन्होंने क्या जांच की। इस पर जांच अधिकारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

अदालत ने जांच अधिकारी से पूछा कि उन्होंने अब तक डेरे में जाकर जांच क्यों नहीं की और रामरहीम से पूछताछ क्यों नहीं हुई। इस पर जांच अधिकारी ने कहा कि उन्हें नहीं पता की रामरहीम कौनसी जेल में बंद हैं। अदालत के बताने पर उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित अदालत में प्रार्थना पत्र पेश कर रामरहीम से पूछताछ की अनुमति ली जाएगी। इस पर अदालत ने 24 नवंबर को जांच रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा है। 

याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता की पत्नी गुड्डी देवी 24 मार्च 2015 को रामरहीम के डेरे पर गई थी। वहां से वह 28 मार्च को लापता हो गई। प्रकरण को लेकर 8 मई 2015 को रामरहीम व डीपीएस दत्ता के खिलाफ जवाहर सर्किल थाने में मामला दर्ज कराया गया। जिस पर पुलिस ने मार्च 2016 में एफआर लगा दी।

वहीं याचिकाकर्ता की प्रोटेस्ट पिटिशन पर अदालत ने एफआर नामंजूर करते हुए एक माह में जांच पूरी करने के आदेश दिए। याचिका में कहा गया कि अदालती आदेश के बावजूद भी पुलिस ने अब तक कोई जांच नहीं की है। यहां तक की याचिकाकर्ता के बयान तक नहीं लिए गए। 

फर्जी दस्तावेजों से मान्यता लेने वालों को 3 साल की सजा

सीबीआई मामलों की विशेष एसीजेएम अदालत ने फर्जी दस्तावेजों से बीएड और शिक्षा शास्त्री कोर्स की मान्यता लेने के मामले में सामुदायिक शिक्षा प्रसार समिति के तत्कालीन अध्यक्ष पंकज चौधरी, सचिव यशौदा चौधरी, सह-सचिव श्रीनिवास और सदस्य गिरिश शर्मा को तीन साल की सजा सुनाई है। सजा के साथ ही अदालत ने प्रत्येक अभियुक्त पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। 

अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि अभियुक्तों ने वर्ष 2007 में बडी सादडी में श्रीनाथ टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज का संचालन किया था। अभियुक्तों ने एनसीटीई से मान्यता लेने के लिए जमीन का फर्जी बेचाननामा सहित अन्य झूठे शपथ पत्र दिए थे। प्रकरण में सीबीआई ने वर्ष 2009 में प्राथमिकी दर्ज कर अभियुक्तों के खिलाफ मई 2013 में आरोप पत्र पेश किया था।

 

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