कांग्रेस में चुनाव से पहले सीएम उम्मीदवार हो घोषित: विश्वेन्द्र सिंह

FirstIndia Correspondent Published Date 2017/10/13 04:25

भरतपुर। प्रदेश में जब एक तरफ दो लोकसभा सीटों और एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने जा रहे हैं, तभी राजस्थान के भरतपुर में कांग्रेस के दो विधायकों ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावती तेवर दिखाना शुरू कर दिए हैं। साथ ही, हाल ही में हुए पीसीसी सदस्य चुनावों को लेकर भी इन विधायकों ने अपनी ही पार्टी की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए अनियमित्ता का आरोप भी लगाया है।

कुम्हेर डीग से कांग्रेस विधायक व वरिष्ठ प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष विश्वेन्द्र सिंह और धौलपुर के बाड़ी से लगातार दो बार विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा ने अपने बयान में अपनी ही कांग्रेस पार्टी से मांग की है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस आलाकमान को प्रदेश में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करना चाहिए, जिसके नेतृत्व में चुनाव संपन्न हो सके। अन्यथा कांग्रेस का फिर से सत्ता में आना मुश्किल होगा।

सिंह ने कहा कि पार्टी को जनता के बीच सर्वे कराकर सीएम चेहरा घोषित करना चाहिए, जिससे जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं में जो असमंजस की स्थिति है, उसे दूर किया जा सके। हालांकि आज प्रदेश की जनता में भाजपा के खिलाफ रोष व्याप्त है, लेकिन भाजपा के पास वसुंधरा राजे का चेहरा सीएम के लिए पहले से ही निर्धारित है और यदि कांग्रेस ने भी ऐसा नहीं किया तो कांग्रेस का फिर से सत्ता में आना बेहद मुश्किल होगा। पंजाब में कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को चुनावों से पहले सीएम का चेहरा घोषित कर दिया था, तो इसी तरह राजस्थान में भी करना चाहिए।

दोनों कांग्रेस नेताओं ने हाल ही में संपन्न हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य चुनावों में भी अनियमित्ता बरतने का आरोप लगाया है। विश्वेन्द्र सिंह ने कहा है कि कांग्रेस को प्रदेश में सीएम का चेहरा घोषित करना चाहिए। क्योंकि भाजपा के लिए वसुंधरा राजे एकमात्र चेहरा है, जिसे कांग्रेस को हराना बेहद कठिन होगा। इसलिए कांग्रेस को भी सीएम चेहरा प्रदेश की जनता के बीच घोषित करना चाहिए।

वहीं दूसरी ओर, धौलपुर के बाड़ी से लगातार दो बार कांग्रेस विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा का कहना है कि हाल में हुए पीसीसी सदस्य चुनावों में जाती विशेष के लोगों को प्राथमिकता दी गई है, जबकि उनका चयन पीसीसी सदस्य के लिए नहीं हो सका है और बाहर के दो लोगों को उनके क्षेत्र से पीसीसी सदस्य चुना गया है, जो गलत है।

बहरहाल, प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव और उससे पूर्व अजमेर, अलवर और मांडलगढ़ में होने वाले उपचुनावों को लेकर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की कवायदें जारी हैं। ऐसे में कांग्रेस विधायकों के बगावती तेवरों को देखते हुए यदि कांग्रेस स्थितियों को नहीं संभालती है तो इन चुनावों में कांग्रेस को जीत के लिए अपनों से भी संघर्ष करना पड़ सकता है।

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