राजस्थान में इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन से बढ़ी बिजली खपत, सबसे ज्यादा बिजली ई-रिक्शा और ई-ऑटो कर रहे खर्च

राजस्थान में इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन से बढ़ी बिजली खपत, सबसे ज्यादा बिजली ई-रिक्शा और ई-ऑटो कर रहे खर्च

जयपुर : राजस्थान में इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन से बिजली खपत बढ़ी है. इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के बीच दिलचस्प तथ्य सामने आया है. सबसे ज्यादा बिजली कार नहीं, ई-रिक्शा और ई-ऑटो खर्च कर रहे हैं. राजस्थान में फिलहाल करीब 4 लाख 9 हजार इलेक्ट्रिक वाहन हैं. 

जिन्हें चार्जिंग के लिए सालाना 82.23 करोड़ यूनिट बिजली की जरूरत है. जो प्रदेश की कुल बिजली खपत का करीब एक फीसदी है. इसमें तिपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 44.63 करोड़ यूनिट पानी 54.3% है. एक इलेक्ट्रिक बस या ट्रक की सालभर औसतन 1.32 लाख यूनिट बिजली खपत है.

जिस पर 8 रुपए प्रति यूनिट की दर से करीब 10.56 लाख रुपए का खर्च आता है. केंद्र के EV30030 (विजन-2030) के तहत अगले पांच वर्षों में EV और बढ़ेंगे. इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 5 से 32 गुना तक बढ़ने का अनुमान है. ऐसे में बिजली उत्पादन, वितरण और चार्जिंग नेटवर्क पर दबाव भी तेजी से बढ़ेगा.

केंद्र सरकार की ऊर्जा पर विशेषज्ञ समिति की हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 1.7 करोड़ के पार पहुंच सकती है. इनके लिए बिजली की मांग 5 से 32 गुना तक बढ़ने का अनुमान है.