जयपुर : स्पाइनल एनेस्थीसिया में काम आने वाले बुपिवैकेन हेवी इंजेक्शन को लेकर दिल्ली से आए अलर्ट ने ड्रग आयुक्तालय की बड़ी भागदौड़ करवा दी है. जांच में पता चला कि BUPICAIN HEAVY इंजेक्शन के जिस बैच में "ड्रग रियेक्शन" मिला है, उसी बैच के 14000 इंजेक्शन राजस्थान में भी सप्लाई किए गए है. ऐसे में आनन-फानन में ड्रग कंट्रोलर ने प्रदेशभर में अलर्ट जारी करने के साथ ही इन संदिग्ध इंजेक्शनों की खेप की आपूर्ति पर रोक और रिकॉल की कार्रवाई की है.
दरअसल, हैदराबाद के अपोलो अस्पताल 16 मरीजों को "बुपिवैकेन हेवी" बैच नम्बर BKBP02601 इंजेक्शन दिया गया था, जिसके बाद उन्हें उल्टी, घबराहट और तेज सिरदर्द की शिकायत हुई. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कुछ मरीजों को सीजर आने लगे, जिसके चलते उन्हें तुरंत आईसीयू में भर्ती करना पड़ा और 2 मरीजों को वेंटिलेटर सपोर्ट पर लेना पड़ा. घटना के बाद जैसे ही एनेस्थीसिया पेशेंट सेफ्टी एसोसिएशन (एपीएसए) ने देशभर के एनेस्थीसिया चिकित्सकों के लिए इंजेक्शन का उपयोग तत्काल रोकने की एडवाजरी जारी की तो निर्माता कम्पनी व केन्द्रीय औषधि महानियंत्रक भी एक्टिव मोड में आए. केन्द्र से आए पत्र के बाद ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बुपिवैकेन हेवी" के सम्बन्धित बैच नम्बर की सप्लाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई है. फाटक ने बताया कि कम्पनी के मुख्य सप्लाई केन्द्र पर जांच के दौरान 7000 इंजेक्शन मिले है. इसके साथ ही सात जिलों में भी करीब 7000 सप्लाई किए गए है. सूचना मिलते ही फील्ड अधिकारियों को मौके पर भेजकर 8500 की सप्लाई रोकी गई है जबकि सैम्पल के लिए 1500 इंजेक्शन उठाए गए है. इसके अलावा शेष बची 3 से 4 हजार इंजेक्शन की खेप को फील्ड से "रिकॉल"किया जा रहा है.
--- कहां कितनी सप्लाई ---
-ग्रेट इंडिया मेडिकॉज, हनुमानगढ़ : 960 इंजेक्शन
-गोयल मेडिकल हॉल, श्रीगंगानगर : 100 इंजेक्शन
-शिवांगी मेडिकल एजेंसी, श्रीगंगानगर :720 इंजेक्शन
-गोयल फार्मा, भरतपुर : 960 इंजेक्शन
-जिंदल मेडिकल एजेंसी, भरतपुर : 960 इंजेक्शन
-स्प्रेक्ट्रल हेल्थ केयर, गंगापुरसिटी : 860 इंजेक्शन
-स्नेह मेडिकॉज कोटा : 960 इंजेक्शन
-श्री लक्ष्मी मेडिकॉज, टोंक : 480 इंजेक्शन
-शिवा डिस्ट्रीब्यूटर्स, धौलपुर : 240 इंजेक्शन
-संजीवनी हेल्थ केयर, जयपुर : 720 इंजेक्शन
-श्रीनारायण दास मेडिकल एजेंसी : 240 इंजेक्शन
इस मामले को लेकर राहत की बात ये है कि राजस्थान में काफी संख्या में लोगों ने इस इंजेक्शन को उपयोग में लिया है, लेकिन अभी तक किसी में भी "ड्रग रियेक्शन" नहीं मिला है. ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि प्रदेश में सप्लाई किए गए 14000 इंजेक्शनों में से कुछ जगहों पर मरीजों के उपयोग में भी इंजेक्शन लिए गए है. लेकिन किसी भी जगह "ड्रग रियेक्शन" नहीं आया है. हालांकि, ऐतियातन सभी जगहों से सैम्पल लेकर जांच को भेजे गए है. जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.