VIDEO: पंजाब में पंगे से बचने के लिए कोई बदलाव नहीं करने का फैसला, मौजूदा पीसीसी चीफ और नेता प्रतिपक्ष करेंगे कंटिन्यू, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: आखिरकार लंबे समय से जारी मंथन के बाद कांग्रेस हाईकमान ने चुनाव से पहले पंजाब में स्टेट लीडरशिप में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है.वहीं चन्नी और रंधावा जैसे दिग्गजों को विभिन्न चुनावी कमेटियों में एडजेस्ट कर दिया है.साथ ही तीन कार्यकारी पीसीसी चीफ भी बनाए गए हैं.नियुक्तियों और फेरबदल के बाद मनीष तिवाड़ी ने अपनी नाराजगी जाहिर की है.

पंजाब में चुनाव से पहले गुटबाजी को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान ने पहले लीडरशिप में बदलाव करने का मन बनाया.जिसके तहत रणनीतिकार सुनील कोणुगोलू से पहले एक रिपोर्ट मंगाई गई.फिर अजय माकन सहित दीन नेताओं की एक कमेटी बनाई.कमेटी ने पंजाब कांग्रेस के करीब 70 नेताओं से रायशुमारी की.खुद राहुल गांधी ने तीन बार पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ मंथन किया, लेकिन इतने तामझाम औऱ प्रयासों के बाद फैसला हुआ मौजूदा पीसीसी चीफ औऱ नेता प्रतिपक्ष नहीं बदले जाएंगे.

पंजाब में चुनाव से पहले आखिर लीडरशिप में नहीं हुआ बदलाव: 
-चन्नी,रंधावा और सिंगला थे पीसीसी चीफ बनने की दौड़ में
-लेकिन आपसी सहमति नहीं बनने से बदलाव नहीं करने का हुआ फार्मूला लागू
-पीसीसी चीफ अमरिंदर राजा वडिंग और नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा करेंगे कंटिन्यू
-कईं चुनावी कमेटियों का किया गया गठन
-रंधावा,चन्नी और सिंगला को कमेटी में किया एडजस्ट
-राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर रंधावा को कोर कमेटी का बनाया हैड
-तीन कार्यकारी पीसीसी चीफ भी बनाए गए

हालांकि नियुक्तियों और कमेटियों के गठन के बाद भी पंजाब में पंगे पर ब्रेक नहीं लग पा रहे है.मनीष तिवाड़ी ने कोई भी जिम्मेदारी नहीं मिलने पर सोशल मीडिया पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है.वहीं पूर्व सीएम चन्नी और राजस्थान प्रभारी ने कमेटियों में लेने पर अभी तक आभार जताने जैसी अपना कोई रिएक्शन नहीं दिया है.दरअसल सभी नेता वडिंग और बाजवा पर निष्क्रिय होने का आऱोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग कर रहे थे.ऐसे में हाईकमान ने फिर बदलाव का मन भी बना लिया.लेकिन एक माह की भागदौड़ के बाद फैसला किया खोदा पहाड़ निकली चुहिया जैसे.

दरअसल कांग्रेस रणनीतिकारों ने इस आधार पर फैसला लिया कि चुनाव में अब बहुत कम समय बचा है.ऐसे में मौजूदा लीडरशिप को चुनाव से पहले अचानक हटाने पर मैसेज अच्छा नहीं जाएगी और गुटबाजी इससे ज्यादा बढ सकती है.इसलिए कांग्रेस ने कोई बदलाव नहीं करने का अंतिम फैसला लिया.अब देखते है कि कांग्रेस के नेता एकजुटता से चुनाव लड़ते है या फिर पिछली बार सिद्धू प्रकरण जैसा माहौल देखने को मिलेगा.