जयपुर: राजस्थान के राज्यसभा चुनावों में बीजेपी ने टिकट देने में प्रयोग किए. राजनीतिक , सामाजिक और क्षेत्रीय आधार पर कार्ड खेले गए. राज्यसभा के टिकट में बीजेपी ने ओबीसी और मूल ओबीसी वर्ग को विशेष तौर पर साधा गया..जाट वर्ग शेष था उसे भी अब सतीश पूनिया के जरिए साधा जा रहा ..देश भर में गुर्जर वर्ग से भी अलका सिंह गुर्जर को भेजा जा रहा.
राजस्थान में 1993 से अब तक 30 साल के चुनाव में एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा की सरकार बनती आई है. इस लिहाज से बीजेपी का नेतृत्व 'मारक अंदाज' में काम कर रहा है. यही कारण है कि ओबीसी और 'मूल OBC' के बीच बीजेपी ने राजनीतिक संदेश देना शुरू कर दिया है. पहले ओबीसी और मूल ओबीसी को आंकड़ों के जरिए जान ले.
राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग या OBC की जनसंख्या का अनुमान विभिन्न स्रोतों के आधार पर अलग अलग
-मंडल आयोग (1980) के अनुसार OBC की जनसंख्या को भारत में 52% अनुमानित
- इसे राजस्थान के लिए भी एक मानक माना जाता है।
- राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (NSSO, 2004-05) के अनुसार
- राष्ट्रीय स्तर पर OBC को 40.94% अनुमानित किया गया
- वर्ष 1999-00 में यह अनुमान 35.8% था 5.14% की बढ़ोतरी के साथ
- राजस्थान में भी लगभग यही अनुपात होने की संभावना है, हालांकि स्पष्ट आंकड़े नहीं
- UDISE+ डेटा 2019-20 के अनुसार राजस्थान में प्राथमिक स्कूल के 48% छात्र OBC थे
- जो जनसंख्या में समान अनुपात का संकेत देता है
- CSDS रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में OBC की अनुमानित जनसंख्या 47% है
- राजनीतिक बयानों के आधार पर, राजस्थान में OBC की जनसंख्या "50% से थोड़ा अधिक" मानी जाती है
-इसमें करीब 82 जातियाँ मानी जाती है
-ओबीसी वर्ग में कुल 81 से अधिक जातियाँ शामिल हैं, लेकिन इनमें मुख्य रूप से जाट, गुर्जर, माली (सैनी), कुम्हार, यादव, बिश्नोई, और आंजना शामिल
राज्य में ओबीसी को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 21% आरक्षण प्राप्त
- 200 सदस्यीय विधानसभा में लगभग 30% से 35% विधायक ओबीसी समुदाय से ही चुनकर आते हैं
-राजस्थान की विधानसभा में 15 फीसदी से अधिक सीटों पर जाट समाज का कब्जा रहता है.
बीजेपी ने बेहद सोच विचार कर जाट चेहरे सतीश पूनिया को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया. इसके पीछे RLP को कमजोर करना भी प्रमुख है. सतीश पूनिया बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रह चुके उन्हें पता है कि सामजिक सियासत का क्या प्रभाव है..इसलिए वे खुद किसान पुत्र कहते है. जाट समाज परम्परागत तौर पर कांग्रेस से जुड़ा रहा है इसके पीछे सामंत प्रथा के खिलाफ आंदोलन भी रहा राज्य में जितने भी बड़े जाट नेता हुए वे अधिकांश तौर पर कांग्रेस के चेहरे रहे नाथू राम मिर्धा,परसराम मदेरणा,रामनिवास मिर्धा, डॉ हरि सिंह, शीश राम ओला,नारायण सिंह ,विश्वेन्द्र सिंह,हेमा राम चौधरी, हरीश चौधरी प्रमुख है. आज भी कांग्रेस ने राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को बना रखा है.
गुर्जर समाज पहले से ही जनसंघ और बीजेपी को राजस्थान में फॉलो करता आया है. राजेश पायलट और सचिन पायलट के प्रभाव के कारण गुर्जर समाज ने कांग्रेस की ओर रुख किया. आज भी सचिन पायलट चुनौती है बीजेपी के लिए दौसा के उप चुनाव में ये देखा भी जा चुका. यही कारण है बीजेपी ने अलका सिंह गुर्जर को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया. अलका सिंह खुद बांदीकुई से विधायक रहे चुकी.उनके पति नाथू सिंह गुर्जर ने दौसा से लोकसभा चुनाव जीता था उन्हें संसद में बेबी MP कहा गया क्योंकि वो सबसे युवा थे..आज उनकी पत्नी अलका सिंह गुर्जर बीजेपी का राष्ट्रीय चेहरा है.
--- राजस्थान से राज्यसभा सांसद और जातीय संदेश ---
--सतीश पूनिया को उम्मीदवार बनाने का मकसद--
जाट क्षत्रप के तौर पर स्थापित करना
बेनीवाल फैक्टर को बैलेंस करना
राजस्थान में संख्या बल के लिहाज से सबसे बड़े वर्ग के तौर पर है जाट
करीब 70सीटों पर व्यापक पर प्रभाव
चूरू,सीकर , झुंझुनूं और नागौर को टारगेट करना
शेखावाटी और जयपुर देहात की जाट पॉलिटिक्स को साधना
पूनिया जयपुर देहात के आमेर से विधायक रह चुके
-- अलका सिंह गुर्जर को उम्मीदवार बनाने का मकसद --
गुर्जर समाज के बीच संदेश देना
अलका के जरिए पूर्वी राजस्थान,जयपुर ,अजमेर ,टोंक,पर फोकस
अलका सिंह गुर्जर के पति नाथू सिंह गुर्जर का सामाजिक राजनीतिक प्रभाव रहा है
अलका सिंह खुद रह चुकी दौसा से बांदीकुई की विधायक
सचिन पायलट के मुकाबले में बीजेपी का एक ओर कार्ड!
अब तक इन नेताओं के जरिए बीजेपी ने संदेश देने की कोशिश की थी. इनमें मदन राठौड़ , घनश्याम तिवाड़ी,चुन्नी लाल गरासिया है. इन्हें राज्यसभा में भेजकर बीजेपी ने जातीय क्षेत्रीय संदेश देने का काम किया.
--बीजेपी के ये राज्यसभा सांसद और पॉलिटिकल संदेश -
--मदन राठौड़
2030 तक कार्यकाल
मदन राठौड़ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष
मदन राठौड़ के जरिए मूल ओबीसी को साधा गया
मारवाड़ और गोडवाड़ को साधने का काम
--घनश्याम तिवाड़ी
2028 तक कार्यकाल
तिवाड़ी के जरिए ब्राह्मणों के बीच संदेश देने का प्रयास
शेखावाटी और जयपुर को साधने पर रहा फोकस
-चुन्नीलाल गरासिया
2030 तक कार्यकाल
आदिवासी वोट बैंक को साधने पर रहा टारगेट
खासतौर से बांसवाड़ा,डूंगरपुर,उदयपुर ग्रामीण और प्रतापगढ़
सियासत में संदेश देने का अपना महत्व हैं. बीजेपी ने राज्यसभा में OBC कार्ड चलकर एक बड़ा संदेश देने का काम किया है. मकसद ये भी आगामी पंचायत और निकाय चुनाव. राजस्थान को सीएम भजन लाल शर्मा के प्रयासों से राज्यसभा में दो सीटें मिली.