लखनऊ (उत्तर प्रदेश): रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ स्थित प्रदेश बीजेपी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष अराजकता फैलना चाहता है. ये बांग्लादेश की तर्ज पर बदलाव चाहते है. संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश है. राहुल गांधी आत्म मंथन करें. टकराव नहीं राष्ट्र निर्माण का मार्ग चुने. राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई चुनाव सुधार के लिए नहीं है. इनकी लड़ाई SIR के लिए नहीं है. ये सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे. डंके की चोट पर सरकार गिराने की बात है. राजनाथ सिंह ने कहा कि ये सत्ता हासिल करने की साजिश है. विकास यात्रा में बाधा का लाइसेंस नहीं है. कानून का सम्मान करना जरूरी है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आपने देखा होगा कि राहुल गांधी ने वोट चोरी को हाइड्रोजन बम बताकर पूरे देश में शोर मचाया था मगर सच्चाई यह है कि उनका यह तथाकथित हाइड्रोजन बम दिवाली का पटाखा भी साबित नहीं हुई.हमने कभी भी संवैधानिक संस्थाओं पर शक नहीं किया है. यह हमारा चरित्र है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "उत्तर प्रदेश में कांग्रेस 37 सालों से सत्ता से बाहर है.मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि क्या समाजवादी पार्टी के बगैर आप अपनी रायबरेली की सीट भी जीतने का सामर्थ्य रखते हैं या नहीं?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं मानता हूं कि कांग्रेस के संरक्षण और शासन काल में तीन सबसे बड़े अक्षम्य अपराध हुए हैं. उनका पहला अक्षम्य अपराध 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाया गया अपातकाल था. दूसरा अक्षम्य अपराध 1984 में कांग्रेस के संरक्षण में सिख भाई-बहनों का नरसंहार था. तीसरा अक्षम्य अपराध 1990 में राम भक्त कारसेवकों की खून की गंगा बहाने वाले लोगों को समर्थन देकर उनकी सरकार को बचाना था. चौथा, आज कांग्रेस द्वारा संविधान, संवैधानिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं को चोट पहुंचाकर किया जा रहा है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं कहना चाहूंगा कि राहुल गांधी और उनके सहयोगियों को यह समझना होगा कि लोकतंत्र अराजकता फैलाना, संवैधानिक संस्थाओं की साख पर चोट करने या भारत की विकास यात्रा में बाधा डालने का लाइसेंस नहीं है. सर्वोच्च न्यायालय के कल की टिप्पणी भी मैं समझता हूं कि इसी ओर एक संकेत है. कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कानून का सम्मान करना भी आवश्यक है.राहुल गांधी को लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर व्यवधान की राजनीति करने के बजाय जनमत का सम्मान करते हुए अपनी राजनीतिक भूमिका पर आत्ममंथन करना चाहिए; यह मेरी राहुल गांधी को सलाह है.