जयपुर: राजस्थान में पंचायत चुनाव के चलते सियासत परवान पर है. जीत के लिए तमाम सियासी दल प्रचार-प्रसार में जुटे हुए हैं. कांग्रेस के कई दिग्गज नेता और पदाधिकारी इस बार चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे है. दरअसल कांग्रेस के कई दिग्गजों ने अपने सियासी सफर का आगाज पंचायत चुनाव से किया था और बाद में वो सत्ता के शिखर तक पहुंचे. डोटासरा,जूली,मदेरणा,धारीवाल,ओला और रामेश्वर डूडी जैसे नेताओं की एक लंबी लिस्ट है जो पंचायत चुनाव से सियासत की सीढ़ी चढते हुए कई अहम पदों पर पहुंचे.
निकाय के बाद अब राजस्थान में पंचायत चुनाव का रण सज चुका है. पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन का दौर समाप्त होने के बाद प्रचार का शोर चरम पर है. भाजपा और कांग्रेस सहित तमाम सियासी दलों ने देहात की जनता का दिल जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. बात कांग्रेस की करें तो इस बार पार्टी के कई बड़े चेहरे और पार्टी पदाधिकारी चुनावी रण में उतर चुके है. इसमें कई नेताओं का यह चुनावी सियासत में पर्दापण है. क्योंकि पंचायत चुनाव की पाठशाला से कांग्रेस के कई ऐसे दिग्गज नेता निकले जो गांव की राजनीति से शुरुआत करते हुए बाद में कोई विधायक बना तो किसी ने संसद की दहलीज पर दस्तक दी.
पंचायत चुनाव से सत्ता के सियासी शिखर तक सफर
-पंचायत चुनाव से निकले राजस्थान कांग्रेस के कई दिग्गज नेता
-किसी ने पंच,किसी ने सरपंच तो किसी ने प्रधान-प्रमुख से शुरु की सियासत
-गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रधान से पीसीसी चीफ तक का किया सफर
-टीकाराम जूली ने जिला प्रमुख से आगाज किया और अब है विधानसभा नेता प्रतिपक्ष
-नारायण सिंह सरपंच से पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद तक
-शीशराम ओला ने सरपंच से सियासी सफर शुरु किया और केन्द्र में रहे मंत्री
-परसराम मदेरणा सरपंच से पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष के सफर तक
-हेमाराम चौधरी सबसे पहले बने थे वार्ड पंच और फिर नेता प्रतिपक्ष पद तक पहुंचे
-शांति धारीवाल जिला प्रमुख बनने के बाद सीधे बने गए थे फिर लोकसभा सांसद
-रामेश्वर डूडी,प्रमोद भाया,श्रवण कुमार और नरेंद्र बुडानिया भी निकले पंचायत चुनाव से
इस तरह पंचायत चुनाव से राजनीति का सियासी आगाज करने वाले नेताओं की एक लंबी फेहरिस्त है. इन नेताओं ने गांव और जमीन पर अपनी पकड़ से राजनीति में मजबूत पहचान बनाई. फिर विधायक,सांसद औऱ मंत्री पद तक पुहंचे. इसके अलावा पार्टी के कई अहम पदों पर भी काबिज रहे. दरअसल गांव की राजनीति से निकले अधिकतर नेता स्वाभिमानी,सच्चाई और ईमानदारी जैसे अपने सिद्धांतों की बदौलत सियासत के लंबे औऱ सफल खिलाड़ी साबित हुए. सत्ता के शिखर पर पहुंचने के बाद इन्होंने गांव और ग्रामीणों से जुड़ी समस्याओं से कभी मुंह नहीं मोड़ा. यही वजह रही कि जनता ने चुनाव में दिल खोलकर इनको अपना समर्थन दिया.
खास बात है कि मौजूदा जूली और डोटासरा की जोड़ी पंचायत चुनाव का प्रोडक्ट है. प्रधान और प्रमुख बनने के बाद दोनों ने पीछे मोड़कर नहीं देखा. लिहाजा आज राजस्थान में दोनों कांग्रेस की तरफ से अहम पदों पर काबिज है. लिहाजा इन नेताओं के सियासी सफर और ग्राफ को देखते हुए इस बार चुनाव में कई दिग्गजों ने अपनी किस्मत आजमाई है. अब देखते है इन पंचायत चुनाव में पार्टी को कितने नए चेहरे अब मिलते है जो आगे जाकर लंबी रेस के घोड़े साबित हो सकते है.