जयपुरः राजस्थान कांग्रेस निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुटी है. लेकिन चुनावी रणनीति बनाने के लिए बुलाई गई जिला कांग्रेस कमेटियों की बैठकें अब पार्टी के लिए नई चुनौती बन गई हैं. जिन बैठकों में सड़क, पानी, बिजली और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा होनी थी, वहां कई जिलों में गुटबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और नेताओं की आपसी तकरार हावी रही.
गए थे हरि भजन को, ओटन लगे कपास. निकाय व पंचायत चुनाव को लेकर हुई कांग्रेस की कुछ ऐसा ही हुआ . निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारी के लिए प्रदेश कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में तीन अगस्त तक वार्ड से लेकर जिला स्तर तक बैठक करने का निर्देश दिया था. मकसद था स्थानीय समस्याओं पर चर्चा कर चुनावी एजेंडा तैयार करना, लेकिन कई जिलों में बैठकों का फोकस मुद्दों से हटकर नेताओं और कार्यकर्ताओं की आपसी खींचतान पर आ गया. कई जगह आरोप-प्रत्यारोप और तीखी नोकझोंक देखने को मिली. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पहले ही साफ किया था कि पार्टी निकाय और पंचायत चुनाव स्थानीय मुद्दों के आधार पर लड़ेगी. सड़क, पानी, बिजली, सीवरेज, चिकित्सा और मनरेगा जैसे मुद्दों पर सुझाव लेने के लिए तीन अगस्त तक सभी जिलों में बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे. लेकिन कई बैठकों में स्थानीय मुद्दे पीछे छूटते नजर आए.
कोटा, जयपुर, अजमेर, टोंक, झुंझुनूं, सवाई माधोपुर और धौलपुर समेत कई जिलों से गुटबाजी और नेताओं के आमने-सामने आने की खबरें सामने आई हैं. टोंक में तो बैठक के दौरान मारपीट जैसी स्थिति भी बन गई. इससे पार्टी के भीतर चुनाव से पहले संगठन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं. जयपुर में RR तिवाड़ी, अर्चना शर्मा व गंगादेवी ने अपनी हार की पीड़ा जाहिर की. तिवाड़ी ने तो यहां तक कह दिया कि मुझे कांग्रेस के जयचंदों ने हरा दिया.
वही राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष ममता शर्मा ने बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा के बेटे सत्येश शर्मा पर कांग्रेस की जिला सत्रीय बैठक में "दुर्व्यवहार" के गंभीर आरोप लगाए हैं. ममता शर्मा ने बैठक के बाद एक वीडियो जारी कर विधायक पुत्र की परवरिश पर ही सवाल खड़े किए हैं
हालांकि कांग्रेस संगठन इन घटनाओं को सीमित बता रहा है. पार्टी का कहना है कि अधिकांश जिलों में कार्यकर्ताओं से चुनावी फीडबैक लिया गया है और जिला प्रभारियों की रिपोर्ट के आधार पर ही निकाय और पंचायत चुनाव की रणनीति तय की जाएगी. प्रदेश महासचिव व मीडिया चेयरपर्सन स्वर्णिम चतुर्वेदी ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस ने सभी विधानसभा क्षेत्रों और जिलों में बैठकें कराई हैं. एक-दो जगह की घटनाओं को छोड़ दें तो अधिकांश स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने चुनावी सुझाव दिए हैं. सभी प्रभारियों की रिपोर्ट के आधार पर पार्टी चुनाव मैदान में उतरेगी."
निकाय और पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस स्थानीय मुद्दों के सहारे जनता तक पहुंचने की रणनीति बना रही है. लेकिन जिला स्तर की बैठकों में सामने आई गुटबाजी ने संगठन की चुनौती बढ़ा दी है. अब देखना होगा कि पार्टी इन अंदरूनी मतभेदों को सुलझाकर चुनावी मैदान में कितनी मजबूती से उतर पाती है.