VIDEO: निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारी तेज, चुनावी मोड में राज्य निर्वाचन आयोग, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राज्य निर्वाचन आयोग अब चुनावी मॉड पर आ गया है. इसके तहत आयोग ने संभावित शहरी निकाय चुनाव और पंचायती राज चुनाव से पहले कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए तमाम पूर्व जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं. तो वहीं प्रशासनिक जरूरत के अनुसार चुनाव कार्य से जुड़े अधिकारियों के तबादले पोस्टिंग 15 अगस्त से पहले करना सुनिश्चित करने को भी कहा है. 

सरकार की ओर से हाई कोर्ट में दिया हाफना में के अनुसार 15 अगस्त से 15 नवंबर के बीच नगरीय निकाय और पंचायती राज चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी. इसे लेकर मस्टर्ड राज्य निर्वाचन आयोग ने 15 अगस्त से पूर्व कानून व्यवस्था के लिए आज से जरूरी तैयारियां करने को लेकर सरकार को निर्देश जारी किए हैं.

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी किए विस्तृत दिशा-निर्देश
-चुनाव प्रक्रिया के दौरान नए हथियार लाइसेंस जारी  नहीं किए जाएंगे
-चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद आम नागरिकों के शस्त्र जमा कराने की होगी कार्रवाई 
-और आवश्यकतानुसार हथियारों के सत्यापन की कार्रवाई की जाएगी
-मतदान समाप्त होने से 48 घंटे पूर्व शराब के उपयोग, बिक्री व वितरण पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के निर्देश जारी
-मतदान दिवस से पहले वाहनों की व्यापक जांच अभियान चलाया जाएगा 
-ताकि हथियार, गोला-बारूद, नकदी व अन्य आपत्तिजनक सामग्री की आवाजाही रोकी जा सके
-मतदान के दिन सुबह 6 बजे से अधिक वाहनों के काफिले निकालने की अनुमति नहीं होगी
-और एक वाहन में तीन से अधिक वाहन शामिल होने पर उसे काफिला माना जाएगा
-चुनाव ड्यूटी में लगे अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज होने पर जिला निर्वाचन अधिकारी एसपी करेंगे जरूरी कार्रवाई
-आयोग ने निर्देश दिए हैं कि हर जिले में जिला मजिस्ट्रेट व पुलिस अधीक्षक की अध्यक्षता में स्क्रीनिंग कमेटी गठित की जाएगी, जो यह तय करेगी कि किन व्यक्तियों को अपने शस्त्र जमा कराने होंगे
-विशेष रूप से ऐसे व्यक्तियों पर ध्यान दिया जाएगा,जिनकी जमानत पर रिहाई हुई हो और जिनकी आपराधिक पृष्ठभूमि हो
-विशेष रूप से ऐसे व्यक्तियों पर ध्यान दिया जाएगा,जो चुनाव के दौरान या अन्य समय दंगा-फसाद में शामिल रहे हों,जिनके विरुद्ध कमजोर वर्गों को धमकाने की शिकायतें हों और जिनसे आम लोगों को भय या धमकी की आशंका हो
-हालांकि आयोग ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी जरूरी समझे जाने पर अन्य व्यक्तियों से भी शस्त्र जमा करा सकते हैं
-चुनाव समाप्त होने के सात दिन के भीतर शस्त्र वापस करने की व्यवस्था की जाएगी
-मतगणना केंद्रों के आसपास निषिद्ध क्षेत्र में चुनाव प्रचार पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा
-मतगणना स्थल पर केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश मिलेगा
-किसी भी व्यक्ति द्वारा मोबाइल फोन, कैमरा या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी
-नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सुरक्षा प्रभारी तत्काल कार्रवाई करेंगे

राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी किए निर्देश 
-सभी संभागीय आयुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, जिला निर्वाचन अधिकारियों व एसपी को दिए निर्देश
-नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए 
-कानून-व्यवस्था की साप्ताहिक समीक्षा रिपोर्ट करनी होगी पोर्टल पर अपलोड
-चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक आयोग लगातार निगरानी रखेगा
-राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि 
-हर मतदाता भयमुक्त होकर मतदान कर सके, इसके लिए चुनाव प्रक्रिया के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों की विशेष निगरानी की जाए और असामाजिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश
-हर निर्वाचन क्षेत्र में संवेदनशील व क्रिटिकल मतदान केंद्रों की पहचान कर उनकी सूची तैयार की जाएगी
-ऐसे मतदान केंद्रों को विशेष श्रेणी में रखा जाएगा, जहां पहले मतदान प्रभावित हुआ हो, पुनर्मतदान हुआ हो, वहां 90 प्रतिशत से अधिक मतदान के साथ एकतरफा मतदान की आशंका रही हो या जातीय व सामाजिक तनाव की संभावना हो.
-असामाजिक व आपराधिक तत्वों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और उनके विरुद्ध आवश्यक प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाएगी.

-तबादले/ पोस्टिंग पर प्रतिबंध को लेकर दिए ये खास निर्देश-
-राज्य सरकार को 15 अगस्त से पहले चुनाव कार्य से जुड़े अधिकारियों के तबादले पोस्टिंग का काम पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं. 
-साथ ही 3 साल से एक ही जगह रहने वाले या गृह जिले में पोस्टेड चुनाव से जुड़े अधिकारियों का तबादला करने को कहा है.
-जब चुनाव कार्यक्रम की होगी घोषणा तब से लेकर चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने तक रहेगी रोक
-IAS, IPS, RPS, RAS और चुनाव कार्य से जुड़े अन्य अधिकारियों पर तब तक रहेगी रोक
-गृह जिले में लगे हुए अधिकारियों का तबादला करना होगा 15 अगस्त तक
-जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला कलेक्टर, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक पर यह नियम लागू
-पुलिस उपाधीक्षक, उपखंड अधिकारी, तहसीलदार और जयपुर और जोधपुर पुलिस आयुक्तालय के पुलिस आयुक्त, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त और सहायक पुलिस आयुक्त जैसे अधिकारियों के तबादले नहीं किए जाएंगे चुनाव अवधि के दौरान. 
-जे डी सी, उप आयुक्त, नगर निगमों और नगर परिषदों के आयुक्त, सचिव, मुख्य नगर नियोजक, विकास अधिकारी, अधिशासी अधिकारी के तबादलों पर भी रहेगी तब रोक
-और पंचायत समितियों के विकास अधिकारी, तहसीलदार और अन्य संबंधित अधिकारियों पर भी चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ तबादले संबंधी प्रतिबंध लागू रहेगा 
-आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारियों ने 30 नवंबर 2026 तक किसी जिले, नगरीय निकाय या पंचायत समिति क्षेत्र में लगातार तीन वर्ष या उससे अधिक समय पूरा कर लिया है या अपने गृह जिले में कार्यरत हैं, उन्हें चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले स्थानांतरित किया जाएगा

ऐसे तबादले 15 अगस्त 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं.
चुनाव से सीधे जुड़े किसी भी पद पर ऐसा अधिकारी या कर्मचारी नियुक्त नहीं किया जाएगा, जिसके विरुद्ध भारत निर्वाचन आयोग या राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव संबंधी कार्यों के लिए अयोग्यता घोषित की गई हो.
यदि किसी अपरिहार्य प्रशासनिक आवश्यकता के कारण चुनाव अवधि में किसी अधिकारी का स्थानांतरण आवश्यक हो, तो संबंधित प्रस्ताव राज्य निर्वाचन आयोग की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करने के बाद ही लागू किया जा सकेगा.

राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी विभागों और जिला प्रशासन को इन निर्देशों की कड़ाई से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव निष्पक्ष व पारदर्शी वातावरण में पूरे कराए जा सकें.