जयपुर: प्रसुताओं की मौतों को लेकर चर्चाओं में आए राजस्थान में अब बेहतर चिकित्सीय प्रबंधन के पॉजिटिव रिजल्ट सामने आए है.चिकित्सा विभाग के आंकड़ों को देखे तो अगस्त माह की तुलना में सितम्बर माह में मातृ मृत्यु के केस आधे रह गए है.खुद मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने विभागीय समीक्षा बैठक में सामने आए डेटा पर अधिकारियों की तारीफ की है.साथ ही निर्देश दिए है कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित फॉलोअप और प्रसव पूर्व जांच सेवाओं की निगरानी और बढ़ाई जाए.
सीएस वी. श्रीनिवास ने स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान एवं फॉलोअप, प्रसव सखी कार्यक्रम तथा नवजात शिशु देखभाल सेवाओं की समीक्षा की.इस दौरान उन्होंने 6 सितम्बर से 17 सितम्बर तक प्रदेश में हुई मातृ मृत्युदर की अस्पतालवार समीक्षा की. उन्होंने संबंधित अस्पताल प्रभारियों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों से प्रत्येक मामले की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान बताया गया कि अगस्त की तुलना में सितम्बर माह में मातृ मृत्यु के मामलों में कमी आई है। अगस्त माह में 73 मातृ मृत्यु हुई थी, जबकि सितम्बर माह में घटकर 35 रही है.
विशेषज्ञ चिकित्सकों का जल्द खुलेगा भर्ती का पिटारा:
-मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने चिकित्सा विभाग की बैठक में दिए निर्देश
-मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि सभी चिकित्सा संस्थानों का हो आंकलन
-विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और जरूरत का किया जाए विस्तृत आंकलन
-इस दौरान जहां भी कमी मिले, उसके हिसाब से शुरू की जाए भर्ती की प्रक्रिया
-उन्होंने कहा कि अस्पतालों में मरीजों की संख्या और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की हो समीक्षा
-डॉक्टरों की जरूरत की मैपिंग की जाए,ताकि जरूरत के अनुसार मानव संसाधन उपलब्ध हो सके
-इस दौरान सीएस ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, HRP महिलाओं की पहचान एवं फॉलोअप,
-प्रसव सखी कार्यक्रम तथा नवजात शिशु देखभाल सेवाओं की भी समीक्षा की
-उन्होंने 6 सितम्बर से 17 सितम्बर तक प्रदेश में हुई मातृ मृत्युदर की अस्पतालवार समीक्षा की
-उन्होंने संबंधित अस्पताल प्रभारियों और सीएमएचओ से जानकारी ली और जरूरी निर्देश दिए
उदयपुर में मातृ मृत्यु पर मुख्य सचिव गंभीर:
-मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने चिकित्सा विभाग की बैठक में दिए निर्देश
-उदयपुर जिले में हुई मातृ मृत्यु को गंभीरता से लेते हुए दिए गए निर्देश
-निदेशालय स्तर से उदयपुर टीम भेजकर व्यवस्थाओं और मामलों की विस्तृत समीक्षा के निर्देश
-उन्होंने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान और
-उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच और समय पर उपचार की सुविधा मिलना सुनिश्चित किया जाए
-मुख्य सचिव ने मेडिकल कॉलेजों में मॉड्यूलर ओटी के अपग्रेडेशन पर विशेष ध्यान देने के दिए निर्देश
-उन्होंने कहा कि अस्पताल में ऑपरेशन के भार के अनुसार मॉड्यूलर ओटी की जरूरत तय की जाए
-उन्होंने जहां अतिरिक्त मॉड्यूलर ओटी की आवश्यकता हो,वहां इसकी संख्या बढ़ाई जाए
-इसके लिए जरूरत पड़ने पर बजट के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजने के दिए निर्देश
प्रसव सखी कार्यक्रम चिकित्सा विभाग की अहम पहल:
-चिकित्सा विभाग की समीक्षा बैठक में बोले मुख्य सचिव वी श्रीनिवास
-उन्होंने कहा कि इसे सभी अस्पतालों में और बेहतर तरीके से लागू किया जाए
-उन्होंने कहा कि प्रसूता के अस्पताल पहुंचने से लेकर प्रसव और
-प्रसव के बाद तक उसे जरूरी सहायता और सुविधाएं आसानी से मिलें
-इसके लिए संबंधित स्टाफ के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए
-उन्होंने प्रसव सखी कार्यक्रम के तहत अस्पतालों में किए जा रहे समन्वय और
-उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए
बैठक में मुख्य सचिव ने मेडिकल कॉलेजों में संचालित नियोनेटल आईसीयू तथा जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में संचालित एसएनसीयू एवं एनआईसीयू की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इन इकाइयों में जरूरी उपकरण, दवाइयां और प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध रहे. गंभीर स्थिति वाले नवजात शिशुओं को समय पर बेहतर उपचार मिले और आवश्यकता होने पर उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर करने की व्यवस्था भी प्रभावी हो. प्रमुख चिकित्सा सचिव गायत्री राठौड़ ने राठौड़ ने रेफरल सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया.
उन्होंने कहा कि जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर उच्च चिकित्सा संस्थान तक पहुंचाने के लिए रेफरल व्यवस्था की लगातार निगरानी की जाए. बैठक में मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम, प्रबंध निदेशक आरएमएससीएल पुखराज सैन, आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण अविचल चतुर्वेदी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजस्थान हैल्थ एश्योरेंस एजेंसी हरजीलाल अटल, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे.