VIDEO: सवाई माधोपुर को बाढ़ के पानी से मिलेगी निजात, लटिया और झरेटी नाले के बाढ़ मार्ग परिवर्तन की बड़ी योजना, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: पिछले साल सवाई माधोपुर शहर में अगस्त तक हुई भारी बारिश ने कुछ इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी दी थी और हजारों परिवारों को कई दिनों तक परेशानी उठानी पड़ी. सवाई माधोपुर में यह नजारा हर दो-चार साल में दिखाई देता रहा है. लाखों लोगों की इसी पीड़ा को दूर करने के लिए जल संसाधन विभाग बड़ी राहत की तैयारी में जुटा है. शहर में बाढ़ की स्थिति बनाने वाले लटिया और झरेटी नाले के बाढ़ मार्ग परिवर्तन की बड़ी योजना के तहत जल्द ही डीपीआर भी तैयार होगी.  डीपीआर में किन-किन बिंदुओं पर काम होगा.

सवाई माधोपुर स्थित लटिया नाले में भारी बारिश के साथ ही बाढ़ की स्थिति बनती रही है और पिछले साल तो हालात बहुत ही विकट बने थे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव हुआ. बुनियादी ढांचे, आजीविका और सार्वजनिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचा. बात करें बारिश की तो  पिछले साल सवाई माधोपुर शहर में अगस्त तक 1227.30 मिमी और 1152.50 मिमी की सबसे भारी वर्षा दर्ज की गई. ऐसे में बाढ़ के चलते हजारों परिवारों को कई दिनों तक घर से बाहर रहना पड़ा और घर से पानी निकलने के बाद ही समस्या का समाधान हो सका. अब मुख्यमंत्री की पहल पर दोनों नालों से बाढ़ की स्थिति परिवर्तन के लिए बड़े स्तर पर काम भी शुरू हो सकेगा.

--- डीपीआर में समाहित होने वाले कुछ मुख्य बिंदु ---
-लटिया नाला व झरेटी नाला की हाइड्रोलिक क्षमता और बहाव की निरंतरता को बेहतर बनाना ताकि आसपास के इलाकों में लोगों की जिंदगी, इंफ्रास्ट्रक्चर और संपत्ति सुरक्षित रह सके 
-लटिया नाला का ड्रोन सर्वे करना ताकि इलाके का सेक्शन, क्रॉस-सेक्शन और रेवेन्यू मैप तैयार किया जा सके
-UIT के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सड़कों, पुलों, पुलियाओं और सार्वजनिक इमारतों को बाढ़ से हुए नुकसान का आंकलन किया जाएगा
-भविष्य में बाढ़ की घटनाओं के दौरान सुरक्षित कनेक्टिविटी और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
-नाले की मौजूदा स्थिति का अध्ययन करना, जिसमें उसका अलाइनमेंट, बेड लेवल, चौड़ाई, गहराई और पानी ले जाने की क्षमता शामिल है
-ग्रामीण इलाकों में बाढ़ को कम करने के लिए डायवर्जन स्ट्रक्चर/चैनल का डिजाइन तैयार किया जाएगा
-लटिया नाला और झरेटी नाला के जरिए बाढ़ के पानी के कुशल बहाव (फ्लड रूटिंग) को सुनिश्चित किया जाएगा
-वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालना और चैनल को बहाल करना
-कैचमेंट एरिया हाइड्रोलाजी और रेनफॉल-रनआफ मॉडल के जरिए बाढ़ के पानी के इनफ्लो और डिस्चार्ज की मात्रा की जांच करना 
-लटिया नाला में मिलने वाली स्थानीय सहायक नदियों की पहचान करना और उनके इनफ्लो, लंबाई आदि का विवरण तैयार करना
-बाढ़ संभावित इलाकों की पहचान करना और आसपास की बस्तियों व इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जोखिम कम करने के उपाय सुझाना
-किनारों के कटाव का आकलन करना और सुरक्षा के उचित उपाय जैसे रिटेनिंग स्ट्रक्चर, पिचिंग, चैनलाइजेशन का काम सुझाना
-सस्टेनेबल इको टूरिज्म डेवलपमेंट प्लान तैयार करना
-लटिया नाला के लिए जमीन बहाली (लैंड रेस्टोरेशन) योजना बनाना

जल संसाधन विभाग ने हाल ही बड़ी बैठक कर सवाई माधोपुर में नालों की समस्या के माध्यम पर परामर्श सेवाओं के लिए 295.14 लाख रुपए की राशि का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसमें 30 से अधिक बिंदुओं को शामिल किया जाएगा ताकि हर एंगल से देखा जा सके कि किस तरह बाढ़ के पास से निजात मिल सकती है. अब देखने वाली बात यह रहेगी कि कितनी जल्दी डीपीआर बनती है और काम तब तक धरातल दिखाई देता है.