जयपुर: एक बंटवारा हुआ, नक्शे पर एक लकीर खींची गई और दो मुल्क वजूद में आए. लेकिन क्या एक लकीर खींच भर देने से हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच बन आई दीवार हर रिश्ते को तोड़ देती है.जवाब है जी नहीं! विस्थापित सरहद से परे है. जिनके लिए जंग कभी खत्म नहीं होती. ऐसा ही ऑपरेशन सिंदूर के समय हुआ. भारतीय सेना के अभियान ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए. मगर इसके बाद बॉर्डर भी बंद हो गए. 10 मई 2025 के बाद से पाकिस्तान में रह रहे हिंदू विस्थापितों का भारत में आना नामुमकिन हो गया उलटे यहां जो रह रहे थे उन्हें वीज़ा कारणों से वापिस लौटना पड़ रहा.
ज़बाँ हमारी न समझा यहाँ कोई 'मजरूह', हम अजनबी की तरह अपने ही वतन में रहे. पाकिस्तान से आई लक्ष्मी और नूरा की यही कहानी है. सीमा के उस पर जुल्मों से परेशान हो कर भारत के राजस्थान तो ये आ गई लेकिन परिवार बिछुड़ हो गए किसी का बेटा बिछुड़ा तो किसी का भाई और बहन. उम्मीद जगी थी लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदले हालतों ने आशाओं और अरमानों को मिटा दिया. भारत और पाकिस्तान के बीच सरहद बंद होने से पाकिस्तान से भारत में आ रहे हिंदू विस्थापित का आना थम गया. इतना ही नहीं जो भारत आने में पहले कामयाब हो गए थे ऑपरेशन सिंदूर के बाद उनका अधूरा परिवार पाकिस्तान की सरजमीं पर ही अटक गई. जयपुर में रह कुछ सालों पहले आई लक्ष्मी खुद तो जैसे तैसे पाकिस्तान के उमरकोट से जयपुर पहुंच गई मगर तीन बेटे और उनका परिवार बिछुड़ गए. नूरा भी क्या करे उसके सगे सम्बन्धी भी पाकिस्तान से भारत नहीं आ पा रहे इनकी आँखों में अपनों से बिछड़ने का दर्द साफ झलकता है. बच्ची जीविका की भी अपनी दर्द भरी दास्तान है.
राजस्थान में ऑपरेशन सिंदूर से पहले हजारों की संख्या में पाकिस्तान के कराची, रहीमयार खान, हिंदूमल कोट, कराची, उमरकोट, हैदराबाद, सख़्हर, खैरपुर समेत कई इलाकों से हिंदुओं ने भारत का रुख अपनाया. इन्हें वहां जबरन धर्मांतरण, महिलाओं युवतियों के अपहरण समेत कई जुल्मो का सामना करना पड़ रहा था यहीं कारण है कि घर भार छोड़ कर स्वदेश का रुख करना पड़ा.
पीएम नरेंद्र मोदी के भारत की सत्ता संभालने के बाद हिंदू विस्थापितों की उम्मीदें जगी. पाकिस्तान में रह रहे मेघवाल ओढ़ राजपूत माहेश्वरी, सिंधी, पंजाबी,पुष्करणा ब्राह्मण समेत कई जातियों के लोग जैसलमेर,बाड़मेर, श्रीगंगानगर,बीकानेर,जयपुर और जोधपुर समेत कई शहरों में आकर बस गए हालांकि इनमें से कइयों के परिवार के सदस्य अभी तक हिन्दुस्तान नहीं आ पाए. साल 2025 के 10मई से भारत - पाक बॉर्डर बंद है. हालांकि ये कार्य ऑपरेशन सिंदूर से पहले ही हो गया था.. वीजा लेना देना बंद हो गया था. 30अप्रैल 2025 को आखिरी बार पाकिस्तान से हिंदू विस्राथापित हिंदुस्तान आए थे. पाक से भारत में आकर कुछ साल पहले बस चुके हिंदू विस्थापित गोरधन दास मेघवाल और चिदम शर्मा बताते है कि सीमा पार उधर से आना बंद है लेकिंग इधर से करीब 200लोग ऐसे जिन्हें हिंदुस्तान छोड़कर वापिस पाकिस्तान जाना पड़ गया. वीजा कारणों से ये एग्जिट हो चुके.
पाकिस्तान से आए हिंदू विस्थापितों के बीच CAA को लेकर भी विसंगतियां है. नागरिकता कानून कहता है कि जो व्यक्ति या परिवार साल 2014 के 31 दिसंबर तक आया है वो CAA में नागरिकता प्राप्त कर सकता है. उनके बाद जो आए उन्हें स्थानीय कलेक्ट्रेट के माध्यम से 1955 के एक्ट में नागरिकता लेनी होगी. एक गजट नोटिफिकेशन के कारण भी गफलत है जो कि 18 मई 2026 को जारी हुआ था. जो पाक हिंदू नागरिकता लेंगे उन्हें 15दिनों में पासपोर्ट जमा कराना होगा, नोटिफिकेशन में ये कहीं मेंशन नहीं है कि पासपोर्ट 18 मई से पहले का लेंगे या नहीं 17मई का कहां देंगे बाइट चिदम शर्मा हिन्दू विस्थापित राजस्थान में करीब 25 हजार हिंदू विस्थापितों को मिली है नागरिकता 2013 में कराची से आए हिंदू विस्थापित चिदम शर्मा विस्थापितों की समस्याओं को गिनाते है.
पाकिस्तान से हिंदू विस्थापित बड़ी संख्या में राजस्थान में बीते कुछ सालों में आते रहे है यहां बस भी चुके. मगर इनकी समस्या ज्यों की त्यों है. जयपुर में फर्स्ट इंडिया की टीम ने एक ऐसी ही पाक हिंदू विस्थापितों की बस्ती की ओर रुख किया और समस्याओं को करीब से जाना. दर्द और पीड़ा साफ झलक रही सरहद पार से अपनी माटी की महक इन्हें खींच लाई थी. बरसो से इन्होंने दर्द और दंश पाकिस्तान में झेले जयपुर की ये बस्ती तकलीफो से भरी है इनके आधार कार्ड नहीं बन रहे पानी,बिजली समेत कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. जर्जर घरो में ये निवास कर रहे. छोटे बच्चे उन जर्जर मकानों में जीवन यापन कर रहे जिनकी छत मरम्मत मांग रही यहां प्लास्टर कभी भी गिर जाता है. खतरे की घंटी में रात बितानी पड़ती है कभी कोई बड़ा हादसा यहां हो सकता है. इतना ही नहीं पाक हिंदू विस्थापित बस्तियों के बच्चे शिक्षा से महरूम है इनके दाखिले सरकारी स्कूल में नहीं हो सकते इन बस्तियों में साफ सफाई का अभाव है..पेयजल के लिए नल के आगे कतार लगती है. हिंदुस्तान में आकर इन्हें बार बार ये कहना पड़ता है हम हिंदू है जय श्री राम हमारे आराध्य है. फिर भी कुछ मदद करते है लेकिन अधिकांश नहीं करते ये भी इनकी पीड़ा है
पाकिस्तान से आए हिंदू विस्थापित में से कुछ ऐसे भी है जो पौराणिक आस्था से जुड़े है. ओढ़ राजपूत जसराज कहते है कि हम उस भागीरथ की संतान है जो गंगा को पृथ्वी पर लेकर आए थे. पाकिस्तान में हमारे साथ जुल्म हुए हमारी नस्लों को बदला गया हम हिंदुस्तानी है.
दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वफ़ा आएगी. सरहदें अच्छी कि सरहद पे न रुकना अच्छा सोचिए आदमी अच्छा कि परिंदा अच्छा.