जयपुरः राजधानी का इकॉलोजिकल तो दूर की बात अब तो कारोबारी बेखौफ होकर धड़ल्ले से नाहरगढ़ सेंचुरी के इको सेंसिटिव जोन में भी अवैध कॉलोनियां काट रहे हैं. ऐसा ही एक मामला दिल्ली हाईवे के पास आमेर के ठाठर गांव में बसाई जा रही अवैध कॉलोनी का है.
राजधानी के इकोलॉजिकल जोन में किसी भी तरह की आवासीय या कॉमर्शियल कॉलोनी बसाई पर सख्त पाबंदी है, बावजूद इसके भू कारोबारी धडल्ले से अवैध बसावट करने में लगे हुए हैं. अब तो भू कारोबारी इतने बेपरवाह और बेखौफ हो चुके हैं कि वे संरक्षित नाहरगढ़ सेंचुरी के इको सेंसिटिव जोन में भी तेजी से कॉलोनियां काट रहे हैं. जेडीए के जोन 2 में जयपुर दिल्ली हाईवे के पास आमेर के ठाठर गांव में नाहरगढ़ सेंचुरी से जुड़ी अरावली पहाड़ी की तलहटी में प्राइम सिटी के नाम से अवैध कॉलोनी बसाई जा रही है. प्राइम सिटी करीब 38 बीघा कृषि भूमि पर बसाई जा रही है. जबकि इको सेंसिटिव जोन में नई कॉलोनी की बसावट पर पूर्णतया पाबंदी है.
-जेडीए के मास्टर प्लान और गुलाब कोठारी प्रकरण में हाई कोर्ट के आदेश अनुसार यहां अवैध बसावट नहीं की जा सकती है
-लेकिन भू कारोबारियों को ना तो राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश की परवाह है और ना ही जेडीए की कार्रवाई का डर है
-स्थानीय लोगों का कहना है कि जेडीए की प्रवर्तन शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार शिकायतें दे चुके हैं
-यहां दिन रात भूखंडों की चारदीवारी बनाई जा रही है. मकान भी बनने लगे हैं.
-इस कंपनी से जुड़े बद्री विशाल शर्मा व अन्य कर्ताधर्ता लोगों को गुमराह कर भूखंड बेचने में लगे हैं.
-प्राइम सिटी में 1027 भूखण्ड है,इसमें से 984 भूखण्ड तो आवासीय है और 43 भूखण्ड कॉमर्शियल हैं
-मुख्य सडक़ चालीस फीट है और अंदर की पच्चीस फीट है
-चालीस फीट पर 20 हजार प्रति वर्गगज के हिसाब से भूखण्ड बेचे जा रहे हैं तो पच्चीस फीट पर 25 हजार प्रति वर्गगज के भाव हैं
-कमर्शियल भूखण्ड 30 हजार रुपये प्रति वर्गगज के हिसाब से बेच रहे हैं
-स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां करीब ढाई सौ वर्ष पुरानी संरक्षित छतरियों के आस-पास कॉलोनी के लिए निर्माण किए जा रहे हैं
-मामले में प्रवर्तन अधिकारी घनश्याम सिंह राठौड़ का कहना है कि
-"राजस्व अपीलीय अधिकरण ने निर्माण कार्य दखलअंदाजी नहीं करने के आदेश दिए हैं"
-"मामले में जेडीए की ओर से कानूनी कार्यवाही की जा रही है"
पिछले करीब पांच महीने से यह मामला जेडीए के जिम्मेदार अधिकारियों की नजर में हैं. इसके बावजूद बेरोकटोक चल रही बसावट रोकने की प्रभावी कार्यवाही नहीं होना, कई गंभीर सवाल खड़े करता है.