झालाना से निकलकर फॉरेस्ट कॉलोनी में घूम रही मादा लेपर्ड आखिर पिंजरे में कैद, तीन सप्ताह से फॉरेस्ट अधिकारियों के बंगलों के आसपास लगातार दिख रहा था मूवमेंट

झालाना से निकलकर फॉरेस्ट कॉलोनी में घूम रही मादा लेपर्ड आखिर पिंजरे में कैद, तीन सप्ताह से फॉरेस्ट अधिकारियों के बंगलों के आसपास लगातार दिख रहा था मूवमेंट

जयपुर: झालाना से निकलकर फॉरेस्ट कॉलोनी में घूम रही मादा लेपर्ड आखिर पिंजरे में कैद हो गई. तीन सप्ताह से फॉरेस्ट अधिकारियों के बंगलों के आसपास लगातार मूवमेंट दिख रहा था. हॉफ अरिजीत बनर्जी के निर्देश पर पिंजरा लगाने के बाद देर रात सफलता मिली.

रेस्क्यू में देरी को लेकर रेंज अधिकारी विजयपाल यादव की मॉनिटरिंग पर सवाल उठे. एसीएफ जितेंद्र सिंह शेखावत और रेस्क्यू टीम लेपर्ड को आमागढ़ लेकर पहुंची. आमागढ़ में मादा लेपर्ड को सुरक्षित रिलीज किया गया.

वन विभाग ने राहत की सांस ली. पहले मेल लेपर्ड संग्राम को भी आमागढ़ में रिलीज किया था. बाद में मौत हुई. झालाना के 20-25 लेपर्ड्स के बीच मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग व्यवस्था पर फिर सवाल उठे.

झालाना से निकलकर फॉरेस्ट कॉलोनी में घूम रही मादा लेपर्ड आखिर पिंजरे में कैद: 
-तीन सप्ताह से फॉरेस्ट अधिकारियों के बंगलों के आसपास लगातार दिख रहा था मूवमेंट
-हॉफ अरिजीत बनर्जी के निर्देश पर पिंजरा लगाने के बाद देर रात सफलता
-रेस्क्यू में देरी को लेकर रेंज अधिकारी विजयपाल यादव की मॉनिटरिंग पर उठे सवाल
-एसीएफ जितेंद्र सिंह शेखावत और रेस्क्यू टीम लेपर्ड को आमागढ़ लेकर पहुंची
-आमागढ़ में मादा लेपर्ड को सुरक्षित रिलीज किया गया, वन विभाग ने ली राहत की सांस
-पहले मेल लेपर्ड संग्राम को भी आमागढ़ में किया था रिलीज, बाद में हुई मौत
-झालाना के 20-25 लेपर्ड्स के बीच मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग व्यवस्था पर फिर सवाल