जयपुरः जयपुर शहर एक बार फिर प्रशासन और कर्मचारियों के टकराव का साक्षी बनने जा रहा है. शहर की सफाई व्यवस्था संभालने वाले वाल्मिकी सफाई कर्मचारी अब सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं. “जब कोई सुन नहीं रहा, तो हड़ताल ही अंतिम रास्ता है”—इस साफ संदेश के साथ वाल्मिकी सफाई कर्मचारी श्रमिक यूनियन ने आंदोलन का बिगुल बजा दिया है. निगम मुख्यालय में हुई अहम बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया कि अगर उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को तेज किया जाएगा.
यूनियन के अध्यक्ष नंदकिशोर डंडोरिया का कहना है कि वे शहर के हालात खराब नहीं करना चाहते, लेकिन लगातार अनसुने किए जाने के कारण उनके पास कोई और विकल्प नहीं बचा है. पिछले लंबे समय से अपनी छह प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलनरत कर्मचारी अब निर्णायक लड़ाई के मूड में हैं. कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि उनकी सहनशीलता की सीमा खत्म हो चुकी है और अब वे अपने अधिकारों के लिए हर संभव दबाव बनाएंगे. निर्णय के मुताबिक, कल से वाल्मिकी सफाई कर्मचारी भूख हड़ताल पर बैठेंगे. इसके बाद भी यदि प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आगामी बुधवार से पूरे शहर में आम हड़ताल शुरू कर दी जाएगी. यह हड़ताल शहर की सफाई व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर सकती है, जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. जयपुर जैसे बड़े और व्यस्त शहर में सफाई कर्मचारियों की भूमिका बेहद अहम है. हर दिन हजारों टन कचरे का उठाव और निस्तारण इन्हीं कर्मचारियों के भरोसे होता है. ऐसे में यदि हड़ताल होती है तो सड़कों पर कचरे के ढेर लगना तय है, यूनियन का आरोप है कि बार-बार ज्ञापन देने और बैठकों के बावजूद उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है. कर्मचारियों का कहना है कि वे किसी टकराव की स्थिति नहीं चाहते, लेकिन मजबूरी में उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है. निगम प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस आश्वासन सामने नहीं आया है, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश और ज्यादा बढ़ गया है.
जयपुर की सफाई व्यवस्था अब एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है. एक तरफ अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे कर्मचारी हैं, तो दूसरी तरफ शहर की व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती प्रशासन के सामने है. अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका खामियाजा सीधे आम जनता को भुगतना पड़ेगा. अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं क्या बातचीत से समाधान निकलेगा या फिर जयपुर कचरे के ढेर के संकट का सामना करेगा?