जयपुरः इस बार राज्यसभा चुनाव के रण में उम्मीदवार चयन में कांग्रेस में सोशल इंजीनियरिंग का नया मॉडल देखने को मिला. कांग्रेस ने इस बार सात में से 4 सवर्ण उम्मीदवार उतारकर सबको चौंका दिया. क्योंकि अभी तक कांग्रेस को दलित,एसटी,अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों की पार्टी माना जाता है.
कांग्रेस इन दिनों बैक टू बैक लीक से हटकर लगातार कई चौंकाने वाले फैसले इन दिनों ले रही है. पहले केरलम में वेणुगोपाल को दरकिनार करते हुए सीएम चयन का नया मॉडल देखने को मिला. फिर कर्नाटक में सीएम परिवर्तन का बड़ा और अहम फैसला हुआ. अब राज्यसभा चुनाव उम्मीदवार चयन में भी फिर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला. कांग्रेस ने लंबे समय बाद एक साथ 4 सवर्ण वर्ग के प्रत्याशियों को राज्यसभा चुनाव का टिकट दिया. वहीं दो उम्मीदवार दलित और एक सीट पर अल्पसंख्यक वर्ग को भी मौका दिया. कांग्रेस पार्टी में इस सवर्ण वर्ग को प्रतिनिधित्व देने के बड़े सियासी मायने निकाले जा रहे हैं.
कांग्रेस में बैक टू बैक हो रहे है अब लीक से हटकर फैसले
केरलम सीएम चयन और कर्नाटक सीएम चेंज के बाद एक औऱ बड़ा बदलाव
राज्यसभा चुनाव प्रत्याशी चयन में सोशल इंजीनियरिंग का नया मॉडल
4 सवर्णों को कांग्रेस ने बनाया राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार
मीनाक्षी नटराजन,प्रवीण चक्रवर्ती,पवन खेड़ा औऱ प्रणव झा को दिया मौका
कांग्रेस पर अभी तक दलित,एसटी,अल्पसंख्यक औऱ पिछड़े वर्ग की पार्टी का है टैग
ऐसे में 4 सवर्णों को टिकट देकर छवि तोड़ने की कोशिश
2029 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का नए जातीय समीकरण पर फोकस
आपको बता दे कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने जो संविधान बदलने वाला नेरेटिव बनाया उसके चलते दलित और एसटी वर्ग का उसको भरपूर समर्थन मिला. जिसके चलते कांग्रेस को 99 सीट मिली. साथ ही इस चुनाव प्रचार के दौरान जातिगत जनगणना की लगातार मांग करते हुए राहुल गांधी ने ओबीसी वर्ग का भी खुलकर समर्थन किया था. जिसके चलते फिर यह धारणा बन गई कि कांग्रेस तो सिर्फ दलित, आदिवासी, मुसलमान और पिछड़ा वर्ग की हितेषी पार्टी है. लेकिन इस मिथक के चलते फिर जनरल यानि सवर्ण वोट बैंक कांग्रेस के लिए बड़ा चैलेंज बन गया. ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव से पहले जातिगत समीकरणों को साधने के लिए कांग्रेस ने सोशल इंजीनियरिंग के नए मॉडल को लागू करने का दांव चला है.
जानकारों का कहना है कि सत्ता में आने के लिए कांग्रेस 2029 के आम चुनाव से पहले नए समीकरण स्थापित करना चाहती है. जिसके तहत अब सवर्ण वोट बैंक को साधने के भी प्रयास शुरु हो गए हैं. इसके लिए उन्हें सत्ता और संगठन में भागीदारी देने का फैसला किया है. अब देखते है कांग्रेस का जातियों को साधने का यह नया मॉडल कितना कारगर साबित होता है.
राज्यसभा चुनाव का रण
कांग्रेस का सोशल इंजीनियरिंग का नया मॉडल
चार सवर्णों को पार्टी ने बनाया इस बार उम्मीदवार
पवन खेड़ा,मीनाक्षी नटराजन,प्रवीण चक्रवर्ती और प्रणव झा को बनाया प्रत्याशी
सवर्णो को उम्मीदवार बनाकर पुरानी छवि तोड़ने का प्रयास
कांग्रेस पर दलित,एसटी,पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की हिमायती का टैग
2029 से पहले नए समीकरण बनाने में जुटी कांग्रेस