जयपुर: राजस्थान में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राजस्थान रोडवेज ने 300 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की तैयारी तेज कर दी है. टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं.
अब जल्द ही प्रदेश के 16 प्रमुख शहरों की सड़कों पर आधुनिक सुविधाओं से लैस ई-बसें दौड़ती नजर आएंगी. इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने में रोडवेज के प्रबंध निदेशक पुरुषोत्तम शर्मा की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उनके विशेष प्रयासों, लगातार मॉनिटरिंग और केंद्र व राज्य स्तर पर प्रभावी समन्वय के चलते ही प्रदेश में ई-बसों के संचालन का रास्ता साफ हो पाया है. राजस्थान रोडवेज लंबे समय से परिवहन सेवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहा था. अब इलेक्ट्रिक बस परियोजना को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियां मिलने के बाद रोडवेज ने तेजी से प्रक्रिया आगे बढ़ाई है.
अधिकारियों के अनुसार इन 300 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन जयपुर सहित प्रदेश के 16 प्रमुख शहरों में किया जाएगा. इनमें अजमेर, कोटा, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, अलवर, भरतपुर, शहर शामिल हैं.ई-बसों के संचालन से यात्रियों को आरामदायक, सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त सफर का अनुभव मिलेगा. बसों में वातानुकूलन, आधुनिक सीटें, जीपीएस आधारित ट्रैकिंग, सीसीटीवी कैमरे, डिजिटल सूचना प्रणाली और महिला सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. रोडवेज प्रशासन का मानना है कि इससे प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई पहचान मिलेगी और निजी वाहनों पर निर्भरता भी कम होगी.
रोडवेज अधिकारियों के अनुसार परियोजना के तहत चार्जिंग स्टेशन विकसित करने का कार्य भी तेज गति से चल रहा है. कई शहरों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा चुका है, जबकि शेष स्थानों पर काम अंतिम चरण में है. अनुमान है कि आगामी छह से आठ महीनों में बसों की आपूर्ति शुरू हो जाएगी और दिसंबर तक बड़ी संख्या में ई-बसें सड़कों पर उतर सकती हैं. राजस्थान रोडवेज अपने बेड़े को मजबूत करने के लिए कुल 1567 नई बसों को शामिल करने की दिशा में भी काम कर रहा है. इनमें से लगभग 500 बसें डीजल आधारित होंगी, जबकि 767 सीएनजी मॉडल पर संचालित की जाएंगी. इसके अलावा 300 इलेक्ट्रिक बसों को भी चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा. इस योजना से रोडवेज की परिवहन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा.आने वाले समय में यह पहल प्रदेश के शहरी परिवहन तंत्र को नई दिशा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.