जयपुर: सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौतों पर चिकित्सा विभाग काफी चिंतित है.खुद मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने लगातार सामने आ रही घटनाओं के कारणों और रोकथाम को लेकर गायनोलॉजिस्ट विशेषज्ञों के साथ चर्चा की.इस दौरान उन्होंने कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा एवं बांसवाड़ा में प्रसूताओं की मृत्यु में एनीमिया की कमी, हाईबीपी, पीपीएच एवं न्यूट्रेशन को कारण बताया. खींवसर ने स्वास्थ्य भवन में गायनोलॉजिस्ट विशेषज्ञों के साथ प्रदेश में हाल ही में प्रसूताओं की मृत्यु की घटनाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की.
इस दौरान उन्होंने पुराने आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में मातृ मृत्यु में लगातार कमी आई है. वर्ष 2023-24 में मातृ मृत्यु 1 हजार 94 तथा वर्ष 2024-25 में 986 तथा वर्ष 2025-26 घटकर 824 रही है. इस प्रकार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मातृ मृत्यु में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है. उन्होंने कम समय में प्रसूताओं की मृत्यु होने पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक घटना को गंभीरता से ले रही है और मातृ स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है.
एनीमिया की कमी, हाईबीपी एवं PPH जैसे कारणों से मृत्यु ! :
-सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौतों पर चिकित्सा विभाग चिंतित
-चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की अध्यक्षता में हाईलेवल बैठक
-बैठक के बाद खींवसर ने कहा कि दो वर्षों में मातृ मृत्यु में 25 प्रतिशत की कमी आई
-प्रसूताओं में एनीमिया की कमी, हाईबीपी एवं पीपीएच जैसे कारणों से मृत्यु
-इस दौरान उन्होंने गायनोलॉजिस्ट विशेषज्ञों के साथ की विस्तार से चर्चा
-साथ ही कहा कि गायनोलॉजिस्ट विशेषज्ञों से प्राप्त सुझावों पर किया जाएगा अमल
प्रदेश में मातृ मृत्यु में लगातार कमी आई:
-सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौतों पर चिकित्सा विभाग चिंतित
-चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की अध्यक्षता में हाईलेवल बैठक
-बैठक में खींवसर ने कहा कि प्रसूताओं की मृत्यु पर राज्य सरकार बहुत संवदेनशील
-कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा एवं बांसवाड़ा में प्रसूताओं की मृत्यु में एनीमिया की कमी,
-हाईबीपी, पीपीएच एवं न्यूट्रेशन जैसे कारण रहे हैं, जो अलग-अगल स्थानों से रेफरल केस के माध्यम से सरकारी अस्पतालों में भर्ती हुए थे
-गायनोलॉजिस्ट विशेषज्ञों के अनुसार हाई बीपी से लीवर और किडनी फेल जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होती है और दुर्भाग्यवश एक के बाद एक घटनाएं हुई है
-इस दौरान खींवसर ने कहा कि राज्य में मातृ मृत्यु में लगातार कमी आई है
-वर्ष 2023-24 में मातृ मृत्यु 1 हजार 94 तथा वर्ष 2024-25 में 986 तथा
-वर्ष 2025-26 घटकर 824 रही है
-इस प्रकार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मातृ मृत्यु में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है
सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौतों पर चिकित्सा विभाग चिंतित:
-चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की अध्यक्षता में हाईलेवल बैठक
-बैठक में गायनोलॉजिस्ट विशेषज्ञों ने लेबर रूम की स्ट्रेन्थन, ओवर क्राउडिंग,
-प्राइमरी लेवल पर एनीमिया का इलाज, रेफरल केस का ऑडिट करना,
-रेफरल आउट रजिस्टर होना, एक आपेस्टिक आईसीयू की स्थापना,
-प्रसव पूर्व जांच की मॉनिटरिंग, ऑपरेशन से पूर्व ईसीजी, आशा वर्कर एवं
-एएनएम द्वारा गर्भवती महिलाओं का समय समय पर निरीक्षण कराना,
-लोगों को भी जागरूक करना, प्रोटोकॉल की पालना सहित अन्य सुझाव दिए
-इस दौरान उन्होंने कम समय में प्रसूताओं की मृत्यु होने पर जाहिर की चिंता
-उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक घटना को गंभीरता से ले रही है
-मातृ स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है
-उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 में जोधपुर में तीन दिन में 18 प्रसूताओं की मृत्यु हुई थी
-उन सभी का एक ही कारण था, ऐसे ही जयपुर, में भी वर्ष 2011-12 में 8 प्रसूताओं की -एक के बाद एक मृत्यु हुई थी,
-लेकिन अभी की घटनाओं का एक समान कारण नही हैं और
-सभी प्रसूताएं उच्च जोखिम वाली थी, तथा सभी का कारण अलग-अलग था
-मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बांसवाड़ा एवं
-भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के चिकित्सकों से प्रसूता प्रकरणों के बारे में विस्तार से चर्चा की
-साथ ही बैठक में बीकानेर एवं कोटा के अधीक्षकों एवं
-प्राचार्यों के साथ प्रसूताओं के एक-एक प्रकरण पर विस्तार से चर्चा की
-खींवसऱ ने कहा कि विभाग के लिए चुनौतिपूर्ण समय है
-प्रोटोकॉल की पालना पूरी करें तथा एएनसी की मॉनिटरिंग को प्रभावी बनाएं
-उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पतालों में संक्रमण नहीं फैले, यह पहले से सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में PHS गायत्री राठौड, मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा बाबूलाल गोयल, अतिरिक्त मिशन निदेशक डॉ. टी.शुभमंगला, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी, सरकारी एवं निजी गायनोलॉजिस्ट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े जिलों के मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, जिला अस्पतालो के पीएमओ सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे.