जयपुर: राजस्थान सरकार ने सार्वजनिक परिवहन वाहनों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए Vehicle Location Tracking Device (VLTD) के क्रियान्वयन के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी कर दी है.
नई SOP के अनुसार अब सार्वजनिक सेवा वाहनों तथा केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित श्रेणी के माल वाहनों में AIS-140 मानक के अनुरूप VLTD और पैनिक बटन अनिवार्य होगा. बिना सक्रिय VLTD के भविष्य में वाहन पंजीकरण, फिटनेस, प्रदूषण प्रमाण-पत्र (PUCC), परमिट जारी करने तथा परमिट नवीनीकरण जैसी सेवाएं प्रभावित होंगी. SOP के तहत नए वाहन पंजीकरण, स्वामित्व हस्तांतरण, फिटनेस और PUCC के दौरान VAHAN 4.0 पोर्टल पर VLTD का ऑनलाइन सत्यापन अनिवार्य किया गया है.
जिन श्रेणियों में यह व्यवस्था पहले से लागू है, वहां इसका तत्काल प्रभाव रहेगा, जबकि अन्य श्रेणियों में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा.दस्तावेज के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में 15 जून 2026 से राष्ट्रीय परमिट वाले सभी माल वाहनों तथा खतरनाक वस्तुओं का परिवहन करने वाले N-2 और N-3 श्रेणी के वाहनों में भी VLTD अनिवार्य किया जा चुका है. SOP में वाहन मालिकों को सुविधा देते हुए कहा गया है कि वे राज्य सरकार के पोर्टल पर सूचीबद्ध किसी भी AIS-140 प्रमाणित OEM से VLTD लगवा सकेंगे.
हालांकि डिवाइस का मॉडल, IMEI, सिम विवरण और अन्य तकनीकी जानकारी राज्य के VLTD बैकएंड पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करना अनिवार्य होगा.राज्य में कार्य करने से पहले प्रत्येक VLTD निर्माता को Type Approval Certificate (TAC), Conformity of Production (CoP), अधिकृत परीक्षण एजेंसी की स्वीकृति सहित अन्य तकनीकी दस्तावेज राज्य के मेकर पोर्टल पर अपलोड करने होंगे. CoP की वैधता समाप्त होते ही संबंधित मॉडल का फिटमेंट स्वतः बंद हो जाएगा.
नई SOP में पहली बार OEM कंपनियों के लिए वित्तीय प्रावधान भी तय किए गए हैं. राज्य VLTD पोर्टल पर पंजीकरण के लिए प्रत्येक OEM को एक लाख रुपये की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी. इसके अलावा प्रत्येक VLTD डिवाइस के पंजीकरण पर 1000 रुपये का शुल्क राजकोष में जमा कराया जाएगा. विभाग ने इसके लिए निर्धारित चालान प्रक्रिया भी तय की है. प्रत्येक VLTD डिवाइस में कम से कम एक वर्ष की वैधता वाला एक्टिव सेल्युलर प्लान अनिवार्य होगा.
डिवाइस में प्रयुक्त सिम मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) के अनुरूप होना भी आवश्यक होगा ताकि वाहन मालिक भविष्य में सेवा प्रदाता बदल सके.वाहनों में VLTD लगाने का कार्य केवल विभाग द्वारा अधिकृत Retro Fitment Centre (RFC) के माध्यम से होगा. फिटमेंट के बाद वाहन, डिवाइस और पैनिक बटन का डेटा राज्य के बैकएंड पोर्टल से टैग किया जाएगा. वाहन का सत्यापन ऑनलाइन होगा और अलग से भौतिक सत्यापन की आवश्यकता नहीं होगी.SOP में OEM और डीलरों के लिए दंडात्मक प्रावधान भी किए गए हैं.
यदि कोई कंपनी निर्धारित मूल्य से अधिक शुल्क वसूलती है, सिम रिचार्ज के नाम पर अतिरिक्त राशि लेती है, पोर्टेबिलिटी से इनकार करती है अथवा GST बिल जारी नहीं करती है तो पहली बार लिखित चेतावनी देकर सात दिन में राशि लौटाने के निर्देश दिए जाएंगे. पुनरावृत्ति होने पर तीन माह तक राज्य VLTD पोर्टल से निलंबन किया जाएगा, जबकि लगातार उल्लंघन पर संबंधित OEM को स्थायी रूप से डिबार कर दिया जाएगा और उसकी सूचना सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भी भेजी जाएगी.
VLTD एसओपी जारी होने से प्रदेश के हजारों वाहन स्वामियों को बड़ी राहत मिली है, VLTD के अभाव में परमिट नहीं बनने से वाहन स्वामी खासे परेशान थे क्योंकि वाहनों के चालान बनाये जा रहे थे , अब VLTD फिटमेंट के बाद आसानी से परमिट जारी हो सकेंगे.