मेडिकल बोर्ड की अनुमति के लिए नहीं भटकेंगे कैंसर मरीज, RGHS में मरीजों की सुविधा के लिए बड़ा कदम, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम में पारदर्शिता और कैंसर रोगियों को "रिजल्ट बेस्ड ट्रीटमेंट" देने के लिए अब व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. ऑन्कोलॉजी स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन्स के तहत नई व्यवस्था के तहत एक तरफ जहां 30 हजार रुपए से अधिक की ट्रीटमेंट पर मेडिकल बोर्ड की अनुशंषा को अनिवार्य किया गया है, वहीं दूसरी ओर पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जोड़ा गया है. ताकि मरीजों को बोर्ड के गठन से लेकर रिपोर्ट के लिए इधर उधर नहीं भटकना पड़े. आखिर क्या है नई व्यवस्था और इससे क्या आएगा असर.

आमतौर पर कैंसर में अक्सर अत्यधिक महंगी दवाओं (इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी) और जटिल सर्जरी या रेडिएशन तकनीकों का उपयोग होता है. अब तक उपचार के प्रोटोकॉल में एकरूपता की कमी थी. जिससे न केवल मरीजों के उपचार में देरी के साथ फिजुलखर्ची होती थी,बल्कि संसाधनों का भी उचित प्रबंधन नहीं हो पा रहा था. इस तरह की समस्याओं और प्रोटोकॉल की पालना के लिए ऑन्कोलॉजी स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन्स बनाई गई है. नई गाइडलाइन के तहत किसी भी मरीज के इलाज में 30 हजार रुपये से अधिक की दवा, 1 लाख रुपये से अधिक की सर्जरी, या कोई ऐसी तकनीक जो लिस्ट में नहीं है, उन सभी के लिए मेडिकल बोर्ड की मंजूरी चाहिए. मेडिकल बोर्ड को अपना फैसला अधिकतम 10 से 15 दिनों के अंदर देना होगा, ताकि मरीज का इलाज न अटके. खास बात यह है कि मेडिकल बोर्ड केवल कागजों पर फैसला नहीं करेगा. मरीज का मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होना जरूरी है ताकि बोर्ड शारीरिक स्थिति का आकलन कर सकें. हालांकि आईसीयू और वेंटिलेटर के मरीजों के लिए बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने के लिए छूट होगी. बोर्ड से अनुमति की प्रक्रिया में देरी नहीं हो और मरीजों को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए पूरी व्यवस्था को ही ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ा गया है. राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के सीईओ हरजीलाल अटल की माने तो मरीजों को बोर्ड बनाने के लिए रिक्वेस्ट, बोर्ड का गठन और उनकी रिपोर्ट अब पोर्टल के जरिए ऑनलाइन ही मिलेगी.

कैंसर मरीजों को मिलेगा "रिजल्ट बेस्ड ट्रीटमेंट"
RGHS में कैंसर मरीजों के इलाज में मनमानी प्रैक्टिस पर अंकुश की कवायद
बतौर नोडल एजेंसी RSHAA ने फाइनल की ऑन्कोलॉजी स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस
प्रदेश के कैंसर विशेषज्ञों और संबंधित अधिकारियों से राय के बाद जारी गाइडलाइन
गाइडलाइन के तहत हर स्टेज के कैंसर के लिए तय किया गया प्रोटोकॉल
साथ ही इम्यूनोथेरेपी,टारगेटेड थेरेपी और जटिल सर्जरी या
रेडिएशन जैसी महंगी प्रक्रिया के लिए बोर्ड की अनुमति की अनिवार्य
इसके पीछे तर्क ये दिया गया है कि कैंसर का उपचार किसी ब्रांड के नाम पर नहीं,
बल्कि रिजल्ट बेस्ड और चिकित्सकीय जरूरतों के अनुसार हो
नीति का मुख्य उद्देश्य यह है कि राजस्थान में कैंसर का इलाज एक प्रोटोकॉल से हो    

गाइडलाइन में प्रशासन ने कुछ बुनियादी नियम तय किए हैं जो हर अस्पताल पर लागू होंगे. इसके तहत चिकित्सकों को सिर्फ ट्रायल बेस्ट पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से कारगर साबित हो चुके ट्रीटमेंट को भी तवज्जो देनी होगी. इसके लिए जेनेरिक दवाओं और बायोसिमिलर्स (सस्ती लेकिन उतनी ही असरदार दवाएं) को बढ़ावा दिया जाएगा. इलाज के दौरान डॉक्टर यह देखेंगे कि दवा का मरीज पर कितना असर हो रहा है. गाइडलाइन में यह स्पष्ट किया गया है कि इलाज किन नियमों के अनुसार होगा. सभी डॉक्टरों को इलाज के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सीलेंस और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के मानकों का पालन करना होगा. यदि किसी बीमारी का इलाज NICE या ICMR की गाइडलाइन्स में उपलब्ध नहीं है, तभी डॉक्टर अन्य अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसे ESMO या NCCN की मदद ले सकते हैं.  यदि कोई डॉक्टर गाइडलाइन्स से हटकर कोई इलाज लिखता है, तो उसे लिखित में देना होगा कि उसने ऐसा क्यों किया है और इसके पीछे क्या सबूत हैं.