जयपुर: कैंसर मरीजों को "रिजल्ट बेस्ड ट्रीटमेंट" मिलेगा. RGHS में कैंसर मरीजों के इलाज में मनमानी प्रैक्टिस पर अंकुश की कवायद है. बतौर नोडल एजेंसी RSHAA ने ऑन्कोलॉजी स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस फाइनल की. प्रदेश के कैंसर विशेषज्ञों और संबंधित अधिकारियों से राय के बाद गाइडलाइन जारी की. गाइडलाइन के तहत हर स्टेज के कैंसर के लिए प्रोटोकॉल तय किया गया.
साथ ही इम्यूनोथेरेपी,टारगेटेड थेरेपी और जटिल सर्जरी या रेडिएशन जैसी महंगी प्रक्रिया के लिए बोर्ड की अनुमति की अनिवार्य है. इसके पीछे तर्क ये दिया गया है कि कैंसर का उपचार किसी ब्रांड के नाम पर नहीं है. बल्कि रिजल्ट बेस्ड और चिकित्सकीय जरूरतों के अनुसार हो. नीति का मुख्य उद्देश्य यह है कि राजस्थान में कैंसर का इलाज एक प्रोटोकॉल से हो.
आपको बता दें कि मेडिकल बोर्ड की अनुमति के लिए कैंसर मरीज नहीं भटकेंगे. राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम(RGHS) में मरीजों की सुविधा के लिए कदम है. 30 हजार से अधिक के इलाज के लिए अब मेडिकल बोर्ड की अनुमति अनिवार्य की. साथ ही इस प्रक्रिया में मरीजों को दिक्कतों से बचाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाया. नई व्यवस्था में मेडिकल बोर्ड बनाने के लिए रिक्वेस्ट, बोर्ड का गठन और उनकी रिपोर्ट अब पोर्टल के जरिए ही जारी की जाएगी.
यानी मेडिकल बोर्ड से रिलेटेड काम के लिए कोई ऑफलाइन पत्र नहीं भेजा जाएगा. इस व्यवस्था में समय की बचत के साथ पारदर्शिता बढ़ेगी. वहीं मरीज को भी सूचना मिलेगी की उसका केस कहां पर लंबित है. इन मामलों की रोजाना मॉनिटरिंग भी होगी और उच्च अधिकारी द्वारा हर सप्ताह समीक्षा भी की जाएगी. ताकी पोर्टल पर आने वाले केसेज का समय पर निस्तारण किया जा सके. अभी तक बोर्ड बनाने से लेकर रिपोर्ट लेने के लिए मरीज और उनके परिजनों को चक्कर काटने पड़ते थे.