प्रसूताओं की मौतों के बाद अब जागा चिकित्सा विभाग, सभी गर्भवती महिलाओं की सघन स्क्रीनिंग की कवायद, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः प्रदेश के अलग अलग शहरों में प्रसूताओं की मौत और तबीयत बिगड़ने के मामले में चिकित्सा विभाग ने अब स्क्रीनिंग पर फोकस शुरू कर दिया है. मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने एवं मातृ मृत्यु दर को और कम करने के लिए सभी गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य मानकों की सघन स्क्रीनिंग का अभियान तैयार किया गया है. ये अभियन कल से शुरू कल से शुरू होगा, अगले 5 दिन चलेगा. इस दौरान गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जांचों का रिकॉर्ड संधारित कर उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी रखी जाएगी.

राजस्थान में प्रसूताओं की मौत और तबीयत बिगड़ने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है. विभाग कई स्तरों पर जांच करवा चुका है, लेकिन अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अचानक यूं कलक्टर में मौतें क्यों हो रही है. इस घटनाओं को लेकर प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रदेश के सभी चिकित्साधिकारियों से रूबरू हुई. इस दौरान उन्होंने कहा कि फील्ड में कार्यरत आशा वर्कर, एएनएम एवं सीएचओ को स्क्रीनिंग का जिम्मा सौंपते हुए निर्देश दिए कि यह कार्य पूरी संवेदनशीलता एवं गंभीरता के साथ करवाया जाए. गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच एवं नियमित स्क्रीनिंग में किसी भी तरह की लापरवाही पर आशा वर्कर, एएनएम, सीएचओ एवं संबंधित अधिकारियों की  जिम्मेदारी तय की जाएगी. बैठक में चिकित्सा शिक्षा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, निदेशालय स्तर के अधिकारियों सहित सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, आरसीएचओ, ब्लॉक स्तरीय अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े.

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के लिए बनेगा अलग ट्रैकिंग सिस्टम
पीएचएस गायत्री राठौड़ ने वीडियो कांफ्रेस के जरिए की समीक्षा
बैठक में राठौड़ ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला के लिए दिए निर्देश
इनकी कम से कम चार गुणवत्तापूर्ण एएनसी जांच अनिवार्य रूप से करवाने के निर्देश
जांच के दौरान रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, वजन, मूत्र परीक्षण, रक्त शर्करा तथा
अन्य आवश्यक परीक्षण किए जाएं और उनका रिकॉर्ड नियमित रूप से हो संधारित
उन्होंने सभी जिलों के अधिकारियों को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान करने और
उनके हेल्थ की पल पल की रिपोर्ट के लिए अलग ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने के दिए निर्देश
उन्होंने कहा कि एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, पूर्व सिजेरियन, जुड़वां गर्भ, अत्यधिक रक्तस्राव तथा
अन्य जटिलताओं वाले मामलों को चिन्हित कर नियमित फॉलोअप सुनिश्चित किया जाए
प्रत्येक एचआरपी महिला की नामवार सूची उपस्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला स्तर तक उपलब्ध रखने तथा
विशेषज्ञ चिकित्सकों की ओर से नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए

मातृ मृत्यु की प्रत्येक घटना का 24 घंटे के भीतर होगा प्रारंभिक रिव्यू
पीएचएस गायत्री राठौड़ वीसी के जरिए फील्ड अधिकारियों से हुई रूबरू
पीएचएस ने बैठक में जिलों में मातृ मृत्यु की प्रत्येक घटना को लेकर दिए निर्देश
ऐसे प्रकरण का 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक विश्लेषण तथा नियमानुसार मैटरनल डेथ रिव्यू कराने,
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी और मातृ मृत्यु की साप्ताहिक समीक्षा करने तथा लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश
उन्होंने कहा कि कोई भी गर्भवती महिला एएनसी जांच, हीमोग्लोबिन जांच,
टीकाकरण अथवा संस्थागत प्रसव से वंचित नहीं रहनी चाहिए
सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं, रक्त की उपलब्धता, प्रसव कक्ष,
ऑपरेशन थियेटर तथा नवजात पुनर्जीवन उपकरणों को कार्यशील रखने के निर्देश      

बैठक में प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि मातृ मृत्यु की प्रत्येक घटना अत्यंत गंभीर है और इसे रोकने के लिए गर्भावस्था की शुरुआत से लेकर प्रसव एवं प्रसवोत्तर अवधि तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमारी सर्वाच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि अधिकांश मातृ मृत्यु के मामलों में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) की पहचान और समयबद्ध प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने बैठक में निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला का गर्भधारण के प्रथम 12 सप्ताह के भीतर पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए तथा सभी सूचनाएं पीसीटीएस पोर्टल पर समय पर दर्ज की जाएं. बैठक में अधिकारियों को सुरक्षित मातृत्व सेवाओं के लिए जारी मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) और राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए. साथ ही मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार के लिए नियमित मॉनिटरिंग और फील्ड स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया गया. उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही होने पर संबंधित अधिकारियों एवं कार्मिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने एएनसी और एचआरपी के बारे में जिलों के चिकित्साधिकारियों से चर्चा की. उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रसूता की एचआरपी पर निगरानी रखना जरूरी है तथा रेफरल केस में रेफरल पर्ची के साथ सम्पूर्ण चिकित्सकीय विवरण भेजें.