निजी नर्सिंग संस्थान में मनमाने प्रवेश पर अघोषित लगाम ! चिकित्सा विभाग ने जीएनएम वर्ष 2025-26 सत्र के लिए लागू की सख्ती, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः चिकित्सा विभाग ने जीएनएम कोर्स में प्रवेश के नाम पर निजी नर्सिंग संस्थानों की मनमानी पर बड़ी सख्ती दिखाई है. कॉलेजों की तरफ से खाली सीट्स को लेकर बनाए जा रहे दबाव को देखते हुए उन्हें खुद के स्तर पर प्रवेश की अनुमति तो दे दी. लेकिन साथ ही ये राइडर भी लगा दिया कि जीएनएम वर्ष 2025-26 सत्र की काउंसलिंग के लिए रजिस्टर्ड स्टूडेंट्स में से ही खाली सीटें भरी जा सकेंगी. विभाग के इस फैसले से प्रवेश के नाम पर मोटी कमाई करने वाले नर्सिंग संस्थान संचालकों की नींद उड़ गई है.

दरअसल, चिकित्सा विभाग ने जीएनएम कोर्स के वर्ष 2025-26 सत्र में प्रवेश के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली है. विभाग ने 210 नर्सिंग संस्थानों की 11030 सीट्स के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे थे, जिसमें 40 हजास से अधिक स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन करवाया. तीन से चार चरणों की काउंसलिंग प्रक्रिया में विभाग ने पूर्व के अनुभवों को देखते हुए स्टूडेंट्स को स्थानीय स्तर के नर्सिंग संस्थान आवंटित किए. बावजूद इसके सिर्फ 50 फीसदी सीट्स पर ही स्टूडेंट्स ने प्रवेश लिया. अभी तक ऐसी स्थिति में विभाग शेष खाली सीट्स भरने के लिए कॉलेजों को खुली छूट देता आया है, जिसमें वे अपने स्तर पर किसी भी स्टूडेंट्स को प्रवेश दे सकते है. इस प्रक्रिया में कई जगहों से अवैध वसूली और मनमानी की शिकायतें आई थी, जिसको देखते हुए पहली बार विभाग ने नया फार्मूला लागू किया. इसमें 11030 सीट्स में से खाली रही 5930 सीट्स पर प्रवेश के लिए कॉलेजों को अधिकृत तो कर दिया, लेकिन साथ ही ये शर्त भी लगा दी है कि जिन स्टूडेंट्स ने प्रवेश के लिए काउंसलिंग में रजिस्ट्रेशन करा रखा है, उन्हीं को खाली सीट्स पर प्रवेश दिया जाए. इस फैसले से अब उन नर्सिंग कॉलेज प्रशासन की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने खाली सीटें पुराने पैटर्न पर अन्य स्टूडेंट्स को मोटी फीस लेकर आवंटित कर दी.

अब खाली GNM सीट खुद के स्तर पर भर सकेंगे निजी नर्सिंग संस्थान
चिकित्सा विभाग ने वर्ष 2025-26 सत्र के लिए दी एक बारीय शिथिलता
10 जून से 14 जून 2026 तक की समयावधि में खाली सीट भरने की मंजूरी
लेकिन GNM पोर्टल पर पूर्व में रजिस्टर्ड स्टूडेंट्स को ही प्रवेश देने की अनिवार्यता
निदेशक अराजपत्रित राकेश कुमार शर्मा ने प्रवेश के लिए जारी की गाइडलाइन
निजी नर्सिंग संस्थान के प्राचार्य को लिखे पत्र में गाइडलाइन की पालना के निर्देश
दरअसल, निजी नर्सिंग संस्थानों में 11 हजार में से 50 फीसदी सीटें रह गई खाली
विभाग के स्तर पर चार बार की काउंसलिंग के बावजूद जब नहीं भरी गई सीट्स
निदेशक अराजपत्रित शर्मा के मुताबिक इन सीट्स को भरने के लिए दी गई छूट
दिसम्बर 2025 तक 12वीं उत्तीर्ण छात्रों को ही दिया जा सकेगा संस्थानों में प्रवेश
पंजीकृत अभ्यर्थी जीएनएम के लिए एक ही संस्थान में प्रवेश लेने के लिए योग्य
गाइडलाइन में साफ लिखा गया है कि प्रवेश के नियमों में कोई भी गड़बड़ी की गई
तो सम्बन्धित निजी नर्सिंग संस्थान के खिलाफ शुरू होगी नियमानुसार कार्रवाई

राजस्थान में जीएनएम कोर्स में प्रवेश का अजब-गजब फार्मूला....!
काउंसलिंग में आधी सीटें खाली,नर्सिंग संस्थान छूट मिलते ही भर लेते सभी सीट
दरअसल, वर्ष 2022 तक जीएनएम की सीट्स दो तरीके से होती थी आवंटित
50% सीट्स विभाग के स्तर पर, जबकि 50% कॉलेज फैडरेशन करती थीं आवंटित
लेकिन फैडरेशन कोटे की सीट्स में मनमानी फीस व अन्य गंभीर शिकायतें थी आम
ऐसे में विभाग ने 2023-24 में काउंसलिंग से ही शतप्रतिशत सीट्स आवंटन किया लागू
लेकिन संस्थानों ने ऐसी गली निकाली,जिसमें काउंसलिंग में भी रही 50% सीट्स खाली
फिर जैसे ही संस्थानों को दी जाती खुली छूट,तो सभी जगहों पर खाली सीट्स हो जाती "फुल"
सूत्रों के मुताबिक मौजूदा सत्र में भी दर्शाई जा रही विभिन्न संस्थानों में 5930 सीट्स खाली
जबकि फील्ड की सच्चाई ये कि इनमें अधिकांश सीट्स  "पेमेंट" मोड पर हो चुकी लॉक
संस्थानों की इस कारस्तानी को रोकने के लिए इस बार खाली सीट्स भरने का बदला पैटर्न
विभाग ने कॉलेजों को दी खाली सीट्स भरने की छूट, लेकिन लगाई पूर्व में रजिस्टर्ड की शर्त
ऐसे में अब जिन्होंने पहले ही भर ली सीट्स,उन संचालकों ने शर्त हटाने को लेकर शुरू की लॉबिंग
क्योंकि, यदि शर्त नहीं हटी तो उन्हें न सिर्फ अन-रजिस्टर्ड छात्रों को लौटानी होगी मनमानी फीस
बल्कि अन्य रजिस्टर्ड स्टूडेंट्स नहीं मिलने पर संस्थान में खाली सीट्स का भी मंडराया संकट     

विभाग की नई व्यवस्था को लेकर निदेशक अराजपत्रित राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि तीन साल पहले जीएनएम की सभी सीट्स काउंसलिंग से भरने का निर्णय लिया गया था. लेकिन दो सालों में देखा गया कि आधी सीट्स खाली रही, जिन्हें बाद में कॉलेज स्तर पर ही भरा गया. हमने इस बार भी खाली रही सीट्स को भरने के लिए कॉलेजों को छूट दी है, लेकिन रजिस्टर्ड स्टूडेट्स को ही प्रवेश देने की पहली बार शर्त लगाई गई है. ताकि फील्ड में मनमाने तरीके से प्रवेश की प्रक्रिया को रोका जा सके.