जयपुरः RGHS को लेकर अशोक गहलोत ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि RGHS के 52 लाख लाभार्थी भाजपा सरकार में अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं. भुगतान अटका है, निजी अस्पताल योजना से हाथ खींच रहे हैं. कहीं-कहीं कैशलेस के नाम पर मरीजों से एक लाख रुपए से ज्यादा नकद वसूल लिए गए है. सबसे ज्यादा मार उन पेंशनर्स पर पड़ी है. बुढ़ापे में इलाज के लिए अस्पताल दर अस्पताल ठोकरें खानी पड़ रही है. सरकार को संकट का समाधान कर भुगतान का संकट तुरंत सुलझाना चाहिए.
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मामले में कहा कि ऑपरेशन के बाद किडनी फेल होने से पांच महिलाओं की जान जा चुकी है. 16 जुलाई को प्रशासन ने निःशुल्क इलाज और किडनी ट्रांसप्लांट का भरोसा दिया. लेकिन कैडेवर (मृत दाता) सूची में पंजीकरण हुआ 15 सितंबर को, यानी दो महीने बाद. अब जांच कमेटियों ने निलंबित तीनों डॉक्टरों को क्लीन चिट देकर बहाल भी कर दिया.सवाल सीधा है, अगर किसी की व्यक्तिगत लापरवाही नहीं थी.
भाजपा सरकार रिपोर्ट सार्वजनिक करने से क्यों बच रही ?
तो पांच महिलाओं की मौत और कई की किडनी फेल होने का जिम्मेदार कौन'? पीड़ित परिवार जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं. फिर भाजपा सरकार रिपोर्ट सार्वजनिक करने से क्यों बच रही है'? जिन बेटियों की जिंदगी दांव पर है, उन्हें वादों में उलझाए रखना संवेदनहीनता की हद है. इन्हें जल्द ट्रांसप्लांट, पूरा मुआवजा और जवाबदेही चाहिए.