जयपुर : कोटा में पांच प्रसुताओं की मौत के मामले में भले ही चिकित्सा विभाग ने कारणों पर अधिकृत चुप्पी साध रखी हो, लेकिन तीन कमेटियों की रिपोर्ट की समीक्षा के बाद सामने आई "सरकारी" सच्चाई ने पूरे सिस्टम को सोचने को मजबूर कर दिया है. जांच कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर हाईलेवल कमेटी ने फाइनल रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी है, जिसमें सभी की मौत अलग-अलग कारणों से दर्शाई गई है. कमेटी ने एक-दो प्रकरणों में गंभीर प्रवृत्ति की लापरवाही भी मानी है. आखिर, हाईलेवल कमेटी ने पूरे प्रकरण में क्या-क्या तथ्य निकाले,
कोटा में 5 प्रसुताओं की मौत के मामले में एक माह से अधिक समय बीतने और चार कमेटियों की रिपोर्ट मिलने के बावजूद चिकित्सा विभाग किसी भी अधिकृत बयान की स्थिति में नजर नहीं आ रहा है. प्रकरण को लेकर शुरूआत में ऑपरेशन थिएटर में इंफेक्शन, इसके बाद गर्भवतियों की गंभीर स्थित और फिर दवाओं की गुणवत्ता यानी ऑक्सीटोसिन की बजाय पानी के इंजेक्शन लगाने से मौतों की आशंका जाहिर की गई. लेकिन अब प्रकरण को लेकर कोटा मेडिकल कॉलेज, एसएमएस मेडिकल कॉलेज और एम्स जोधपुर की तरह से करवाई गई जांच और फिर इन जांच रिपोर्ट की समीक्षा के लिए गठित हाईलेवल कमेटी ने सम्पूर्ण तथ्यों और समीक्षा के साथ सरकार को रिपोर्ट सौंपी है. हालांकि, चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर का कहना है कि फाइनल रिपोर्ट हमें मिल गई है,जिस पर एक्सपर्ट गायनोक्लोजिस्ट के साथ चर्चा के बाद ही कुछ कहा जा सकता है.
चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर जिस रिपोर्ट की समीक्षा का जिक्र कर रहे है, उसमें कई तरह के चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है. सूत्रों की माने फाइनल रिपोर्ट में मॉनिटरिंग लेप्स के साथ ही ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल को भी फोलो नहीं करने की बात सामने आई है. आईए आपको बताते है कि फाइनल रिपोर्ट में 5 प्रसुताओं की मौत की क्या-क्या मानी गई वजह ?
प्रसुताओं की मौतों पर रिपोर्ट तैयार, अब विभाग के एक्शन का इंतजार
-कोटा में प्रसूताओं की मौत पर गठित तीनों कमेटियों के तथ्यों पर तैयार फाइनल रिपोर्ट
-हालांकि विभाग ने रिपोर्ट पर साध रखी चुप्पी, लेकिन सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में कई तथ्य
-एक केस में "पल्मोनरी एम्बोलिज्म" का जिक्र,जिसमें शरीर में जम जाता है खून का थक्का
-ये खून का थक्का टूटकर रक्तप्रवाह के जरिए फेफड़ों तक पहुंच जाता है, जो होता है जानलेवा
-इसके अलावा एक अन्य केस में "सेप्टीसिमिया" के चलते मल्टी ऑर्गन फेलियर की बनी स्थिति
-हालांकि, निजी अस्पताल में सामने आए इस केस में चिकित्सकों की लापरवाही का भी जिक्र
-रिपोर्ट के मुताबिक चार माह की गर्भवती की बच्चेदानी में इंफेक्शन के बावजूद लगाए गए टांके
-जिसके चलते पूरे शरीर में फैल गया इंफेक्शन और मल्टी ऑर्गन फेलियर से हुई महिला की मौत
-एक महिला को कार्डियक प्रॉब्लम तो एक महिला में "Postpartum Hemorrhage"
-रिपोर्ट में ये भी साफ लिखा गया है कि प्रोटोकॉल फॉलो करने में भी बरती गई लापरवाही
-साथ ही मरीजों के रिकॉर्ड में लिखे गए ट्रीटमेंट चार्ट में भी सम्पूर्ण जानकारी का पाया गया अभाव
चिकित्सा विभाग का अब तक का एक्शन
-पूरे प्रकरण में आठ चिकित्सा कार्मिकों गिर चुकी गाज
-घटना के बाद प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया चिकित्सा प्रोटोकॉल और
-प्रक्रिया में लापरवाही मानते हुए डॉ. नवनीत कुमार को किया गया था निलंबित
-जबकि यूटीबी पर कार्यरत सहायक आचार्य डॉ. श्रद्धा उपाध्याय हो चुकी बर्खास्त
-इसके अलावा सीनियर नर्सिंग अधिकारी गुरजौत कौर और निमेश वर्मा भी निलंबित
-स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के यूनिट हेड डॉ. बीएल पाटीदार और
-यूनिट हेड डॉ. नेहा सीहरा को जारी किए जा चुके कारण बताओ नोटिस