जयपुर: भजनलाल कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय कन्वेंशन हॉल में प्रेस ब्रीफिंग हुई. इस अवसर पर मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि खेजड़ी और अन्य वृक्षों के संरक्षण को लेकर बिल के प्रारूप का अनुमोदन हुआ. राजस्थान ट्री प्रोटेक्शन बिल के प्रारूप का अनुमोदन हुआ. यूसीसी बिल के प्रारूप का अनुमोदन हुआ. ट्री प्रोटेक्शन बिल का उद्देश्य खेजड़ी और 29 तरह के पेड़ अधिसूचित किए.
इन पेड़ों का काटना प्रतिबंधित किया है. विधिवत अनुमति का प्रावधान किया गया है. अधिक पौधे लगाने और उसे बड़ा करने का प्रावधान किया है. वृक्षों को परिभाषित किया गया है. पेड़ों को काटने, गिराने पर भी रोक रहेगी. वन क्षेत्र बढ़ाने का उद्देश्य है. एक्ट वन क्षेत्र में लागू नहीं होगा. जवाबदेही तय की गई है. दोषी पाए जाने पर 1 लाख का जुर्माना, 1 वर्ष की सजा या दोनों ही सजा का प्रावधान है.
पेड़ काटना जरूरी है तो सक्षम अधिकारी के पास आवेदन करना होगा. 10% अधिक वृक्ष लगाने होंगे या कॉस्ट जमा कराना होगा जिसकी राशि से पौधारोपण किया जाएगा. अनुमति नहीं मिलती है तो अपील का अधिकार है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को इस बिल से मजबूती मिलेगी. खेजड़ी को बचाने के लिए 363 लोगों ने जीवन त्याग दिया था. इस वृक्ष संरक्षण से मरुस्थल बढ़ने से रोक लग सकती है.
यूसीसी बिल के प्रारूप का अनुमोदन हुआ है. संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुरूप निर्णय लिया है. नागरिकों के लिए एक समान संहिता हो इस भावना अनुसार बिल के प्रारूप का अनुमोदन किया है. विवाह, विवाह विच्छेद, उत्तराधिकार, लिव इन रिलेशनशिप से जुड़े पहलू शामिल हैं. आदिवासी क्षेत्रों पर इसके नियम लागू नहीं होंगे. सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड रंजना देसाई की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने रिपोर्ट दी है. इसके आधार पर इस बिल का प्रारूप बना है.
मंत्री जोगाराम पटेल ने आगे कहा कि 10 हजार तक की पेनल्टी अनदेखी करने पर 25 हजार के जुर्माने का प्रावधान किया है. राजस्थान समान सिविल संहिता लागू होगी. उत्तराधिकार में कई कानूनों में पिता को अधिकार नहीं, इसमें पिता को भी अधिकार मिलेगा. अगर वैध उत्तराधिकार नहीं मिला तो वह संपत्ति सरकारी संपत्ति मानी जाएगी. लेकिन सरकार को संपत्ति से जुड़ा बकाया जमा कराना होगा. विवाह का अन्य पंजीकरण, बहु विवाह पर रोक.
पुरुष के लिए 21 और महिला के लिए 18 वर्ष की आयु सीमा. अपने धर्म, रीति रिवाज अनुसार विवाह हो सकेंगे. भाई को बहन से दोगुना मिलने का कानून था. अब ऐसे कानून खत्म हो गए हैं. राजस्थान चौथा राज्य जिसने यूसीसी लाने के लिए किया प्रावधान किया. वन सेवा से जुड़े नियमों में संशोधन का अनुमोदन किया.