जयपुर: विश्वेंद्र सिंह फिर चर्चा में...इतिहास में भरतपुर के पूर्व महाराज विश्वेंद्र सिंह अनेकों कारणों से राजनीति में चर्चित रहे चाहे बीजेपी में हो या चाहे कांग्रेस में.अब पीसीसी चीफ डोटासरा से अदावत के कारण चर्चित.गहलोत राज में सचिन पायलट का साथ देने के कारण चर्चा में आए थे.उनके इस्तीफे के संकेत को लेकर बीजेपी ने प्रतिक्रिया दी है. मूंछों पर ताव देते विश्वेन्द्र सिंह यूं ही रौबिले राजनेता नहीं है.लोहागढ़ या कहे भरतपुर की सीमा शुरु होने से लेकर आखिर तक वहां की सियासत में उन्हीं की तूती बोलती है, चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी.वे आज कांग्रेस में है लेकिन उनके राजमहल के दरवाजे हर दल के नेता के लिये खुले है बशर्ते हुकुम की शान में कोई गुस्ताखी ना हो जाये, अन्यथा अंजाम भुगतने के लिये भी नेता तैयार रहते है.
राजनीति की पाठशाला के विधार्थियों को याद होगा कि जब प्रदेश कांग्रेस की कमान डॉ चंद्रभान के हाथों में थी तब उनके भरतपुर दौरे में उनके साथ क्या हुआ था,कैसे विश्वेन्द्र सिंह ने बता दिया था कि भरतपुर की राजनीति उन्हीं के हिसाब से चलती है ,नहीं चलोगे तो भुगतोगे.उनके समर्थकों ने उन्हीं की अगुवाई में जो किया वो सबने देखा, अपनी ही सरकार में सत्ताधारी दल के संगठन के मुखिया को भागना पड़ा. तब गहलोत सरकार थी, तत्कालीन पीसीसी चीफ डॉ चंद्रभान ने लाख की कोशिश की विश्वेन्द्र सिंह को अनुशासनहीनता का दंड दिलाने की ,मगर वह खुद ही पीसीसी चीफ से विदा हो गये,लेकिन विश्वेन्द्र सिंह पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जुर्रत कांग्रेस नेतृत्व नहीं कर पाया.आखिर क्या है विश्वेन्द्र सिंह की सियासी शख्सियत.
विश्वेन्द्र सिंह, रौबीले राजनेता:
गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे
सचिन पायलट का साथ दिया
-सबसे पहले कांग्रेस में सीएम फेस जारी करने की मांग उठाई
कहा था 'कांग्रेस ऐसी नाव है जिसका कोई मांझी नहीं है
आखिर बगैर मांझी नाव को किनारे तक पहुंचायेगा कौन'
विश्वेन्द्र सिंह राजस्थान के जाट राजघराने के पूर्व महाराजा है, जाट शिरोमणि राजा सूरजमल के वंशज है
-भरतपुर से सांसद रह चुके है
-कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों से विधायक रह चुके है
-यूपी की मथुरा सीट से चुनाव लड़ चुके है
-युवा तुर्क के तौर पर सियासत में पहचान रही है
-खांटी और दबंग राजनीति करते है
-सीधी बात बोलते है,भले ही सामने वाले को कड़वी लगे
-पिछली राजे सरकार में वे CM राजे के राजनीतिक सलाहकार थे
- गुर्जर आंदोलन के वक्त वे ही इकलौते राजनेता थे
- जो आंदोलनकारियों से वार्ता के लिये आंदोलन स्थल पहुंचे थे
- प्रयास यही रहे कि शांति कायम हो
-गुर्जर समाज में उनका ससुराल है उनकी पत्नी दिव्या सिंह यूपी के
प्रतिष्ठित गुर्जर राज परिवार से हे
- उनकी वसुंधरा राजे और उनके पुत्र दुष्यंत सिंह से रिश्तेदारी भी है
-पूर्वी राजस्थान की राजनीति में उनके प्रभाव का अंदाज यह है
- वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर
-कांग्रेस में है लेकिन RSS प्रमुख मोहन भागवत उनके महल में मिलने आए ..
-अपने मनचाहे नेता को चुनाव जीताने में मदद करते है
-सब जानते है डॉ दिगम्बर सिंह एक बड़ा कारण रहे उनके बीजेपी से जुदा होने का
-लेकिन डॉ दिगम्बर ने निधन से पहले ही उनसे दुश्मनी भुलाकर दोस्ती कर ली थी..
-वैसे भी सियासत में दोस्ती और दुश्मनी ज्यादा दिनों की नहीं होती
-डॉ विश्वेन्द्र सिंह की दोस्ती के अपने किस्से है..
-कांग्रेस में भंवर जितेन्द्र सिंह से उनका याराना है
-डॉ किरोड़ी लाल मीणा से उनके करीबी सम्बंध है
-विश्वेन्द्र सिंह से जुड़ी खास बात यह है कि उनका दिल भरतपुर में ही लगता है
-दिल्ली व जयपुर उन्हें कम ही रास आते है
विश्वेंद्र सिंह जनता दल से बीजेपी में आए , इनकी पत्नी दिव्या सिंह भी बीजेपी सांसद रही ,आज विश्वेंद्र सिंह कांग्रेस में है
वसुन्धरा राजे की गौरव यात्रा को लेकर विश्वेन्द्र ने कह दिया था कि "मैं करुंगा स्वागत"
प्रदेश कांग्रेस में पिछले लम्बे समय से विश्वेन्द्र सिंह खुद को अलग थलग महसूस कर रहे है.यही कारण है कि उनके त्यागपत्र के संकेत ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी.इतिहास गवाह धौलपुर उपचुनावों में उनकी नाराजगी कांग्रेस को भारी पड़ी और बीजेपी को लाभ मिला था.पूर्वी राजस्थान में बीजेपी सियासी जोखिम नहीं लेना चाहती. साथ भी चाहिये विश्वेन्द्र सिंह का, राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मौजूदा समय में यह इलाका बीजेपी के लिये तलवार की धार जैसा है.ऐसे में विश्वेन्द्र सिंह की राह किस और होगी इस पर सबकी नजरें, बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस को इंतजार है.उनके इस्तीफा के संकेत क्या राजनीतिक रंग लेंगे ये अहम रहेगा.
भरतपुर के पूर्व महाराज विश्वेंद्र सिंह ने कहा मैंने कांग्रेस आलाकमान को लिखे पत्र के जरिए अपने इस्तीफे के संकेत की बात कही थी मेरी बात हुई नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से मेरा साफ कहना कल आए लोग मुझे नहीं चला सकते. वो क्या मेरे खिलाफ रिपोर्ट देंगे सबको पता है भरतपुर में किसने कांग्रेस को लोकसभा का चुनाव जिताया ! संजना जाटव कैसे जीती थी. सचिन पायलट के अलावा कोई नेता प्रचार में नहीं आया था. विधानसभा चुनाव में मिली हार के कुछ माह बाद ही कांग्रेस को विजय मिली थी. मैंने पत्र के जरिए अपनी बात कह दी है मैने अपने त्यागपत्र के संकेत दिए है.