VIDEO: अवैध कॉलोनियों का "एपिसेंटर" बना हाथोज का पीथावास गांव, नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाकर बसाई जा रही कॉलोनियां, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजधानी के कालवाड़ रोड इलाके में स्थित हाथोज का पीथावास गांव अवैध कॉलोनियों का "एपिसेंटर" बन गया है. बड़े पैमाने पर कई अवैध कॉलोनियां इस क्षेत्र में आकार ले रही हैं. लेकिन इनमें सबसे चर्चित है विराज एनक्लेव और शिव शक्ति कॉलोनी.

ग्राम पीथावास में खन्ना कृषि फार्म की तीस बीघा भूमि पर विराज एनक्लेव और उससे लगती करीब दस बीघा कृषि भूमि पर शिव शक्ति के नाम से अवैध कॉलोनी बसाई जा रही है. खसरा नम्बर 171, 170 और उससे जुड़े खसरों पर दोनों ही अवैध कॉलोनियों में सैकड़ों आवासीय एवं कॉमर्शियल भूखंड की खरीद-फरोख्त हो रही है, वहीं भू कारोबारी छोटे-छोटे भूखंडों पर विलाज बनाकर अवैध बसावट को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं. कृषि भूमि का लैंड कंवर्जन करवाए बिना ही अवैध कॉलोनी विराज एनक्लेव एवं शिव शक्ति में पचास गज, अस्सी गज और सौ वर्गगज के भूखंड़ों पर अवैध विलाज बनाने और बेचने का धंधा जोरों पर चल रहा है. दोनों ही अवैध कॉलोनियों में एक सौ से अधिक अवैध विलाज बनाने का काम धडल्ले से चल रहा है. इन दोनों अवैध कॉलोनियों में ना तो पक्की सडक़ है और ना ही पेयजल, सीवरेज जैसी दूसरी सुविधाएं. फिर भी धडल्ले से अवैध विलाज का निर्माण कार्य चल रहा है. यहां पर पचास, अस्सी और सौ वर्गगज भूखंड पर बन रहे विलाज की कीमत 65 लाख से 90 लाख रुपये है.

-पीथावास में विराज एनक्लेव खन्ना कृषि फार्म हाउस की कृषि भूमि पर बसाई जा रही है
-खसरा नम्बर 171 की 4 हैक्टेयर जमीन की खरीद खरीद मैसर्स विराज डवलपर्स वैभव सिने मल्टीफ्लेक्स वैशाली नगर जयपुर के पार्टनर वीरेन्द्र सिंह पुत्र भंवर सिंह निवासी क्राउन प्लाजा वैशाली नगर जयपुर के नाम से की गई है
-बताया जा रहा है कि विराज एनक्लेव द्वारा खरीदी गई उक्त जमीन में एक कई बड़े रसूखदारों का पैसा लगा है
-जानकारों के अनुसार इस फर्म व इससे जुड़े अन्य लोगों ने आस-पास भी कृषि भूमि खरीदी है.
-इन सौदों में करीब 125 करोड़ रुपए की बड़ी राशि खर्च की गई,इसमें से करीब 90 फीसदी रकम बतौर ब्लैक मनी ली गई है
-इन कॉलोनियों में चालीस से पचास हजार रुपए प्रति वर्गगज के भाव से भूखंड बेचे जा रहे हैं
-इनमें भी करीब 90 फीसदी राशि ब्लैकमनी के तौर पर ली जा रही है

ऐसा नहीं है कि कालवाड़ रोड इलाके में चर्चित इन दोनों कॉलोनियों की जानकारी जेडीए व जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं हैं. लेकिन इन सबके बावजूद प्रभावी कार्रवाई के नाम पर अब तक कुछ नहीं किया गया है.

-इन दोनों कॉलोनियों को लेकर स्थानीय लोगों की ओर से लगातार जेडीए और जिला प्रशासन में शिकायतें की जा रही हैं
-लेकिन जेडीए और जिला प्रशासन दोनों एजेंसियों की ओर से मामले में अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है
-कृषि भूमि का बिना स्वीकृति अकृषि उपयोग पर राजस्थान काश्तकारी अधिनियम के तहत स्थानीय तहसीलदार की ओर से खातेदारी निरस्त की जा सकती है
-इसी तरह जेडीए एक्ट के मुताबिक बिना स्वीकृति निर्माण या बसावट पर ध्वस्तीकरण किया जाना चाहिए
-लेकिन इन सबके बावजूद दोनों एजेंसियों की नाक के नीचे विलाज बनाने और भूखंड काटने का काम धड़ल्ले से चल रहा है
-जेडीए के प्रवर्तन अधिकारी मनीष शर्मा का कहना है कि "मामले में नोटिस दिया जा चुका है. जो विलाज बन चुके हैं उनको सील करने और"
-"जो निर्माणाधीन हैं उन विलाज को ध्वस्त करने की शीघ्र कार्रवाई की जाएगी"
-दूसरी तरफ स्थानीय तहसीलदार आरसी गुर्जर का कहना है कि "मैने अभी पदभार संभाला है, जल्द ही मामला का पता कर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी."

इन दोनों अवैध कॉलोनियों का मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है कि जेडीए के नोटिस के बावजूद यहां काम बंद करने के जाए दिन रात अवैध विलाज निर्मित करने और कॉलोनी में निर्माण का काम तेजी से चल रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जेडीए और जिला प्रशासन मामले में सख्त कार्रवाई करेंगे या फिर रसूखदारों के दबाव में मामला यूं ही रफा-दफा हो जाएगा?