जयपुरः राजस्थान में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती और व्यापक विस्तार के तेजी से जारी कामों को मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के दिल्ली दौरे के बाद और गति मिलने के आसार हैं. इस दौरे के दौरान प्रदेश की जारी रेलवे परियोजनाओं को जल्दी पूरा करने से जुड़े कई बिंदुओं को लेकर सहमति बनी है जिसका परिणाम जल्द सामने आने की संभावना है.
राजस्थान में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के व्यापक विस्तार और आधुनिकीकरण की दिशा में कई अहम परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है. राज्य में प्रमुख रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास, नई रेल लाइनों, गेज परिवर्तन और डबलिंग परियोजनाओं के माध्यम से यात्री सुविधाओं, पर्यटन, औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलने जा रही है.
इसी कड़ी में सीएस वी.श्रीनिवास ने रेलवे बोर्ड अध्यक्ष सतीश कुमार के साथ अहम विषयों पर बैठक की.
सीएस ने रेलवे बोर्ड अध्यक्ष सतीश कुमार के साथ बैठक करके अजमेर-चंदेरिया, लूणी-भीलड़ी, जयपुर- सवाई माधोपुर और बालोतरा-पचपदरा की प्रगति और अगली कार्ययोजना को लेकर विचार-विमर्श किया.
इसमें भूमि आवंटन सहित अन्य कामों को लेकर आ रही बाधाओं को दूर करके जल्द परियोजनाएं पूरी करने को लेकर अमल करने पर सहमति बनी.
राजस्थान में जारी रेलवे परियोजनाओं की स्थिति
राजस्थान के प्रमुख रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास
राजस्थान के अहम रेलवे स्टेशनों पर व्यापक पुनर्विकास कार्य किए जा रहे हैं. अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकसित किए जा रहे छोटे स्टेशनों के अतिरिक्त, लगभग 3,062 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से प्रमुख स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है.
जैसलमेर, गांधीनगर-जयपुर, जयपुर, उदयपुर सिटी, जोधपुर, बीकानेर, सांगानेर, पाली मारवाड़, अजमेर, अलवर और आबू रोड स्टेशनों पर पुनर्विकास कार्य कई चरणों में जारी है.
जैसलमेर स्टेशन का पुनर्विकास कार्य पूरा हो चुका है, जबकि गांधीनगर-जयपुर स्टेशन का कार्य अंतिम चरण में है. जयपुर स्टेशन का पुनर्विकास तेजी से प्रगति पर है और अन्य स्टेशनों पर भी काम लगातार आगे बढ़ रहा है.
इन परियोजनाओं का मकसद यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना, स्टेशन आवागमन को बेहतर बनाना, सुगम पहुंच सुनिश्चित करना और आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित करना है. इससे यात्रियों के यात्रा अनुभव में सुधार होगा तथा राज्य में पर्यटन, आर्थिक विकास और बुनियादी विकास को भी नई गति मिलेगी.
बालोतरा–पचपदरा नई रेल लाइन
11 किलोमीटर की बालोतरा–पचपदरा की नई रेल लाइन परियोजना के लिए अंतिम लोकेशन सर्वेक्षण (FLS) को 12 दिसंबर 2025 को मंजूरी दी गई थी.
परियोजना के तहत सर्वे का एक दौर पूरा हो चुका है, एल-सेक्शन तैयार कर लिया गया है और कॉन्सेप्ट प्लान को भी स्वीकृति मिल चुकी है. विस्तृत लागत अनुमान तकनीकी परीक्षण के दौर में है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानि DPR जून 2026 के अंत तक प्रस्तुत किए जाने की संभावना है.
प्रस्तावित रेल मार्ग पुरानी मीटर गेज लाइन के समानांतर होगा, जहां कई स्थानों पर अतिक्रमण मौजूद हैं. इस बारे में राजस्थान सरकार ने परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान अतिक्रमण संबंधी समस्याओं के समाधान में जरूरी सहयोग का आश्वासन दिया है.
प्रगति पर नई रेल लाइन परियोजनाएं
1. आरडीएसओ टेस्ट ट्रैक चरण-I एवं II (63.56 किमी)
वर्ष 2018-19 और 2020-21 में स्वीकृत इस परियोजना में अब तक 93 प्रतिशत भौतिक तथा 90 प्रतिशत वित्तीय प्रगति हासिल की जा चुकी है. कुल 57.76 किलोमीटर ट्रैक बिछाया जा चुका है और विद्युत व सिग्नल-टेलीकॉम कार्य अंतिम चरण में हैं.
हालांकि 28.04 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी लंबित होने के कारण बाकी है. राजस्थान सरकार से सशर्त एनओसी मिल चुकी है और मामले का समाधान करने के प्रयास जारी हैं.
2. तरंगा हिल–आबू रोड नई रेल लाइन (116.65 किमी)
21 जुलाई 2022 को स्वीकृत यह परियोजना अंबाजी माता मंदिर की रेल कनेक्टिविटी के लिए अहम है. परियोजना में 45 प्रतिशत भौतिक और 58 प्रतिशत वित्तीय प्रगति दर्ज की गई है.
भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है और निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है. करीब 27 किलोमीटर खंड दिसंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना है.
3. नीमच–बड़ी सादड़ी नई रेल लाइन (48.35 किमी)
अक्टूबर 2018 में स्वीकृत इस परियोजना में 60 प्रतिशत भौतिक और 58 प्रतिशत वित्तीय प्रगति हुई है. निर्माण अनुबंध प्रदान किए जा चुके हैं और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है.
पूरे 48.35 किलोमीटर खंड के चालू वित्तीय वर्ष में शुरू होने की संभावना है.
4. पुष्कर–मेड़ता नई रेल लाइन (51.35 किमी)
13 फरवरी 2024 को स्वीकृत इस परियोजना में अब तक 7 प्रतिशत भौतिक और 24 प्रतिशत वित्तीय प्रगति हुई है.
चिह्नित खंडों के लिए सिविल कार्यों के टेंडर जारी किए जा चुके हैं और निर्माण कार्य शुरू हो गया है. भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया राज्य सरकार के सहयोग से जारी है.
5. रास–मेड़ता सिटी नई रेल लाइन (55.90 किमी)
मेड़ता रोड बाईपास सहित इस परियोजना को 13 फरवरी 2024 को स्वीकृति मिली थी. वर्तमान में यह भूमि अधिग्रहण चरण में है.
भूमि अधिग्रहण की औपचारिकताओं को जल्द पूरा करने के लिए राजस्थान सरकार के साथ तालमेल जारी है. कई ड्रॉइंग स्वीकृति के चरण में हैं और टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
6. रामदेवरा–पोकरण (भैरव गुफा–कैलाश टेकरी मार्ग) नई रेल लाइन (13.38 किमी)
8 अप्रैल 2025 को स्वीकृत इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है. सिविल कार्यों के टेंडर जारी किए जा चुके हैं और निर्माण कार्य शुरू हो गया है.
7. चूरू बाईपास (4.85 किमी)
28 नवंबर 2025 को स्वीकृत इस परियोजना की ड्रॉइंग अंतिम रूप में तैयार की जा रही है. भूमि अधिग्रहण और टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
प्रगति पर गेज परिवर्तन परियोजनाएं
1. देवगढ़–नाथद्वारा गेज परिवर्तन (82.54 किमी)
24 जनवरी 2023 को स्वीकृत इस परियोजना में 73 प्रतिशत भौतिक और 65.67 प्रतिशत वित्तीय प्रगति हासिल की जा चुकी है.
भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है और निर्माण अनुबंध जारी किए जा चुके हैं. कार्य तेजी से चल रहा है और करीब 45 किलोमीटर खंड चालू वित्तीय वर्ष में शुरू होने की संभावना है.
2. नाथद्वारा–नाथद्वारा टाउन नई रेल लाइन (9.30 किमी)
वर्ष 2018-19 में स्वीकृत इस परियोजना के तहत शुरुआती कार्य जारी हैं. सिविल, सिग्नल एवं दूरसंचार और विद्युत कार्यों के सभी अनुबंध जारी किए जा चुके हैं.
हालांकि 2.09 हेक्टेयर निजी भूमि के अधिग्रहण पर जोधपुर उच्च न्यायालय की ओर से स्थगन आदेश जारी होने के कारण लगभग 300 मीटर खंड में भूमि अधिग्रहण लंबित है. रेलवे इस मामले की पैरवी कर रहा है, जबकि शेष हिस्से में मिट्टी भराई और पुल निर्माण कार्य जारी हैं.
प्रगति पर दोहरीकरण (डबलिंग) परियोजनाएं
1. अजमेर–चंदेरिया डबलिंग (178.20 किमी)
19 फरवरी 2024 को स्वीकृत इस परियोजना में 18 प्रतिशत भौतिक और 23 प्रतिशत वित्तीय प्रगति हुई है.
मुख्य निर्माण अनुबंध जारी किए जा चुके हैं और कार्य तेजी से चल रहा है. भूमि अधिग्रहण लगभग पूरा हो चुका है. लगभग 33 किलोमीटर खंड चालू वित्तीय वर्ष में शुरू होने की संभावना है.
2. लूणी–समदड़ी–भीलड़ी डबलिंग (271.93 किमी)
इस परियोजना में 36 प्रतिशत भौतिक और 32 प्रतिशत वित्तीय प्रगति दर्ज की गई है.
मुख्य निर्माण अनुबंध अंतिम रूप ले चुके हैं और कार्य जारी है. कुछ स्थानों को छोड़कर भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है. वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब 50 किलोमीटर खंड चालू करने का लक्ष्य रखा गया है.
जयपुर–सवाई माधोपुर डबलिंग (131.30 किमी)
19 फरवरी 2024 को स्वीकृत इस परियोजना में 19 प्रतिशत भौतिक और 16.39 प्रतिशत वित्तीय प्रगति हुई है.
सभी प्रमुख निर्माण अनुबंध जारी किए जा चुके हैं और कार्य जारी है. चालू वित्तीय वर्ष में लगभग 33 किलोमीटर खंड पूरा करने का लक्ष्य है.
4. सवाई माधोपुर बाईपास लाइन (13.50 किमी)
9 दिसंबर 2022 को स्वीकृत इस परियोजना में 75 प्रतिशत भौतिक और 73 प्रतिशत वित्तीय प्रगति दर्ज की गई है.
संरचनात्मक कार्य जारी हैं और पश्चिम मध्य रेलवे द्वारा कुस्तला में कनेक्टिविटी उपलब्ध होने की स्थिति में दिसंबर 2026 तक परियोजना पूरी करने का लक्ष्य है.
5. समदड़ी बाईपास लाइन (1.40 किमी)
6 अगस्त 2025 को स्वीकृत इस परियोजना की ड्रॉइंग अंतिम चरण में है. भूमि अधिग्रहण और टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
6. लालगढ़–बीकानेर ईस्ट डबलिंग (11.10 किमी)
21 अगस्त 2025 को स्वीकृत इस परियोजना की ड्रॉइंग अंतिम रूप में तैयार की जा रही है. भूमि अधिग्रहण और टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
7. उमरा–डेबारी डबलिंग (24.80 किमी)
24 दिसंबर 2025 को स्वीकृत इस परियोजना की ड्रॉइंग अंतिम चरण में है. भूमि अधिग्रहण तथा टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
8. रींगस–सीकर डबलिंग (50.60 किमी)
13 फरवरी 2026 को स्वीकृत इस परियोजना की ड्रॉइंग अंतिम रूप में तैयार की जा रही है. भूमि अधिग्रहण और टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
ये सभी परियोजनाएं राजस्थान में रेलवे नेटवर्क को मजबूत बनाने, यात्री सुविधाओं में सुधार करने और औद्योगिक, धार्मिक और पर्यटन क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क प्रदान करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएंगी. सीएस के दौरे के बाद अधूरी परियोजनाओं के पूरी होने से राजस्थान में रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी, यात्री और माल परिवहन अधिक आसान होगा, धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर बनेगी और राज्य के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी.