जयपुरः निकाय और पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी एक बार फिर उभरकर सामने आ गई है. बाड़मेर और अजमेर के नेताओं ने अपने-अपने विरोधी गुटों की शिकायत लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का दरवाजा खटखटाया है. बाड़मेर में पूर्व विधायक मेवाराम जैन सैकड़ों समर्थकों के साथ पहुंचे, तो अजमेर में पूर्व जिलाध्यक्ष विजय जैन ने मोर्चा खोला. चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर चल रही इस खींचतान का सियासी असर क्या होगा,
निकाय और पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस में संगठन के भीतर की लड़ाई अब बंद कमरों से निकलने लगी है. पिछले दिनों जिला स्तर पर हुई बैठकों में विवाद उभरे थे, लेकिन अब गुटबाजी की रार PCC तक पहुंच गई है. मंगलवार को बाड़मेर व अजमेर के नेताओं ने जयपुर में पीसीसी वॉर रूम पहुंचकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात की और अपने-अपने जिलों में चल रही गुटबाजी की शिकायत की. सबसे ज्यादा सियासी हलचल बाड़मेर में हैं, जहां पूर्व विधायक मेवाराम जैन अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ PCC पहुंचे. बाड़मेर की इस सियासी अदावत की जड़ें काफी पुरानी हैं. विधानसभा चुनाव के दौरान मेवाराम जैन को कांग्रेस से निष्कासित किया गया था. बाद में आलाकमान के फैसले के बाद उनकी कांग्रेस में वापसी हुई. मेवाराम की वापसी का हरीश चौधरी ने खुलकर विरोध किया था, लेकिन उनकी चल नहीं पाई. अब पंचायत और निकाय चुनाव से ठीक पहले दोनों खेमों की यह राजनीतिक खींचतान फिर चर्चा में है. मेवाराम जैन ने सीधे तौर पर पूर्व मंत्री हरीश चौधरी का नाम नहीं लिया, लेकिन साफ कहा कि गुटबाजी करने वाले व्यक्ति का नाम प्रदेश अध्यक्ष को बता दिया है.
पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा जब बाड़मेर के नेताओं से मुलाकात करके गुटबाजी दूर करने का प्रयास कर रहे थे, तभी अजमेर से भी एक धड़ा विरोध करने पीसीसी वॉर रूम पहुंच गया. पूर्व जिलाध्यक्ष विजय जैन ने मौजूदा अध्यक्ष राजकुमार जयपाल व पूर्व आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ के खिलाफ अपनी शिकायत प्रदेश अध्यक्ष के सामने रखी. विजय जैन का आरोप है कि अजमेर में एक बाहरी व्यक्ति के दखल से पार्टी का सिस्टम प्रभावित हो रहा है और स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है.
विजय जैन की शिकायत के बीच एक दूसरा सियासी पेंच भी है. अजमेर के मौजूदा जिलाध्यक्ष राजकुमार जयपाल पहले ही विजय जैन को कारण बताओ नोटिस जारी कर चुके हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से कर चुके हैं. यानी अजमेर में शिकायत करने वाला खेमा खुद भी संगठनात्मक कार्रवाई के घेरे में है. पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा ने भी स्वीकारा कि अजमेर व बाड़मेर में शिकायतें आ रही है, लेकिन उन्होंने भरोसा दिया कि कांग्रेस सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी और किसी भी कार्यकर्ता के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.
अब सवाल सिर्फ दो जिलों की गुटबाजी का नहीं है. सवाल यह है कि चुनावी मैदान में उतरने से पहले कांग्रेस अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर कैसे लाएगी? क्योंकि बाड़मेर में एक तरफ मेवाराम जैन और हरीश चौधरी के बीच पुरानी राजनीतिक अदावत है, तो अजमेर में स्थानीय बनाम बाहरी नेतृत्व का मुद्दा उठाया जा रहा है. हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने विवाद को बड़ा रूप देने के बजाय सुलह का रास्ता दिखाया है. लेकिन सियासत में सवाल सिर्फ बयान से खत्म नहीं होते. चुनाव के ऐलान के साथ टिकट, वार्ड, पंचायत और स्थानीय संगठन पर पकड़ की लड़ाई तेज होगी. ऐसे में अगर बाड़मेर और अजमेर जैसे अहम जिलों में खेमेबाजी बनी रही, तो उसका सीधा असर चुनावी रणनीति और कार्यकर्ताओं की एकजुटता पर पड़ सकता है. प्रदेश नेतृत्व भले ही एकजुट होकर चुनाव लड़ने का दावा कर रहा हो, लेकिन चुनावी जाजम पर कौन सा खेमा किसके साथ बैठेगा, असली परीक्षा अब उसी की है.