डिजिटल दौर में बदलेगी मतदाता जागरुकता की रणनीति, चुनाव, मीडिया और मतदाता शिक्षा पर अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः HCM RIPA में आज चुनाव,मीडिया और मतदाता शिक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भारत निर्वाचन आयोग के डीजी मीडिया आशीष गोयल ने कहा कि डिजिटल जमाने से कदमताल करते हुए ECI समय पर सही सूचना पहुंचाने के लिए इंफ्लूएंसर की मदद लेगा. उन्होंने कॉन्फ्रेंस में घोषणा की. कि अब देश के हर स्कूल, हर कॉलेज में चुनाव साक्षरता क्लब होंगे जिसमें युवा इंफ्लूएंसर को मतदाता जागरूकता बढ़ाने के उनके प्रदर्शन के आधार पर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होने का मौका मिलेगा. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने कहा कि गलत नैरेटिव बनने से रोकने के लिए और सही सूचना पहुंचाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग नए प्रयोग कर रहा है और यह कॉन्फ्रेंस भी इसी की कड़ी है. फर्स्ट इंडिया के सीईओ व मैनेजिंग एडिटर पवन अरोड़ा ने चुनाव आते ही जागने के बजाय पूरे वर्ष लगातार जागरूकता अभियान चलाने पर जोर देते हुए कहा कि पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं को उनके जन्मदिन पर विशेष संदेश भेजने जैसी पहल भी शुरू की जानी चाहिए. 

HCM RIPA में हुई अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में सेमिनार में डीजी मीडिया आशीष गोयल ने मुख्य वक्ता के रूप में निर्वाचन आयोग के नवाचारों, नोटा और मतदाता जागरूकता अभियानों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के हर नवाचार में राजनीतिक दलों की भागीदारी रहती है और मतदाता सूची भी उन्हें उपलब्ध कराई जाती है. ऐसे में ईवीएम को लेकर गलत नैरेटिव बनाए जाने का कोई औचित्य नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां लगभग 100 करोड़ से अधिक मतदाता निर्वाचन प्रक्रिया का हिस्सा हैं, 64 करोड़ से अधिक लोग मतदान करते हैं और लगभग डेढ़ से 1.80 करोड़ लोग चुनाव प्रबंधन में योगदान देते हैं. उन्होंने कहा कि बिहार, असम और केरल जैसे राज्यों में मतदान प्रतिशत काफी ऊंचा रहा है. सिंगापुर में मतदान अनिवार्य होने के बावजूद वहां का मतदान प्रतिशत पश्चिम बंगाल से कम रहा जबकि वहां सबसे ज्यादा वोटिंग होने की बात कही जाती है.  गोयल ने कहा कि देश में करीब 3000 राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं, इसलिए चुनाव प्रक्रिया पर गलत नैरेटिव बनाना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उद्देश्य केवल अयोग्य मतदाताओं को हटाकर शुद्ध मतदाता सूची तैयार करना है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मतदान समाप्त होने और ईवीएम सील होने के बाद मतदान प्रतिशत बढ़ने की बातें पूरी तरह गलत हैं.उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति लगभग 1 जीबी डेटा का उपभोग होता है और सोशल मीडिया के दौर में सही सूचना पहुंचाना बड़ी चुनौती है. इसी उद्देश्य से अब प्रत्येक स्कूल और कॉलेज में इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब (ELC) बनाए जाएंगे. ये संस्थान स्वयं मतदाता जागरूकता गतिविधियां और क्विज आयोजित करेंगे तथा उनका डेटा आयोग के डैशबोर्ड पर अपलोड किया जाएगा. उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित किया जाएगा.

पैनलिस्ट के रूप में शामिल होते हुए फर्स्ट इंडिया न्यूज़ सीईओ व मैनेजिंग एडिटर पवन अरोड़ा ने कहा कि भ्रम और अफवाहों को दूर करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग को रील, वीडियो और अन्य डिजिटल माध्यमों का अधिक प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के लिए आयोग में अलग पेशेवर प्रकोष्ठ बनाया जाना चाहिए. साथ ही वहीं दैनिक भास्कर के राष्ट्रीय संपादक एल.पी पंत ने कहा कि सूचना को लगातार अपडेट करने वाले प्लेटफार्म पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं तो वहीं टाइम्स ऑफ इंडिया के ब्यूरो चीफ भानुप्रताप सिंह ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में मतदान के प्रति उदासीनता एक बड़ी चुनौती है और इसे दूर करने में प्रिंट मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. पवन अरोड़ा ने कहा कि चुनाव के समय सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाए रखने की होती है. उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में तथ्यों को छिपाने की गुंजाइश बहुत कम होती है, क्योंकि कैमरा स्वयं सच बयान करता है, जबकि प्रिंट मीडिया में खबर को रोकने या दबाने की संभावना और समय दोनों होते हैं. 
अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि पेड़ न्यूज़ और प्रमोशनल न्यूज़ में अंतर है. उन्होंने कहा कि पेड़ न्यूज़ जैसी प्रवृत्ति अब अधिक समय तक चल नहीं सकती. उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खबरों को लगातार अपडेट करने की सुविधा होने से सवाल भी उठते हैं, लेकिन इसका समाधान फैक्ट-चेकिंग है. चुनाव आयोग स्वयं एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय स्रोत है और कोई भी व्यक्ति तथ्यों का पुनः सत्यापन कर सकता है. दैनिक भास्कर के राष्ट्रीय सपादक  एल पी पंत ने कहा कि मीडिया का मूल दायित्व सरकार और पूरी व्यवस्था की निगरानी करना है. उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मूल समस्या प्रक्रिया और समय को लेकर है, न कि उसके उद्देश्य को लेकर है. आयोग को ऐसे प्रयोग करने चाहिए जिनसे अनावश्यक विवाद न हों. पंत ने चुनावी खर्च की सीमा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान निर्धारित सीमा में विधानसभा या लोकसभा का चुनाव वास्तविक रूप से लड़ पाना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि  कम अंतर से जीते गए चुनावों का ऑडिट जैसे सुधारों पर भी विचार होना चाहिए. आयोग का दायित्व है कि वह उठने वाले सवालों का संतोषजनक जवाब दे.पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस.वाई. कुरैशी का उल्लेख करते हुए चर्चा में कहा गया कि यदि वीवीपैट के सौ प्रतिशत मिलान जैसे किसी विषय पर व्यवहारिक व्यवस्था बनती है तो मीडिया उसे प्रमुखता से उठाएगा. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की भूमिका पर बोलते हुए पवन अरोड़ा ने कहा कि आयोग स्वयं चुनाव के दौरान वीडियोग्राफी और सीसीटीवी के उपयोग को बढ़ावा देता है, क्योंकि कैमरा आचार संहिता उल्लंघन जैसी घटनाओं को उजागर करने का प्रभावी माध्यम है. उन्होंने कहा कि आज सरकारी कार्यालयों में भी अधिकारी सबसे पहले समाचार चैनलों से ही ताजा जानकारी प्राप्त करते हैं, जबकि अखबार अगले दिन विस्तृत जानकारी देते हैं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया घटना आधारित होता है और उसकी विश्वसनीयता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है.उन्होंने कहा कि समाचार चैनल केवल राजनीतिक खबरें ही नहीं दिखाते, बल्कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों का समाधान कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इससे मीडिया की विश्वसनीयता और जनविश्वास दोनों बढ़ते हैं.भानु प्रताप ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में मतदान के प्रति उदासीनता एक बड़ी चुनौती है और इसे दूर करने में प्रिंट मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. 
पवन अरोड़ा ने भी इस बात से सहमति जताते हुए कहा कि मतदाता जागरूकता वन-टाइम कार्यक्रम नहीं हो सकती. चुनाव आते ही जागने के बजाय पूरे वर्ष लगातार जागरूकता अभियान चलाने होंगे. साथ ही प्रथम बार मतदाता बनने वाले युवाओं को उनके जन्मदिन पर विशेष संदेश भेजने जैसी पहल भी शुरू की जानी चाहिए.       

चर्चा के दौरान  सुझाव दिया गया कि चुनाव आयोग को भी मीडिया के साथ संवाद और नवाचार बढ़ाने चाहिए ताकि चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सभी सवालों का समय पर जवाब दिया जा सके.